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बड़ा सवाल: क्या किसानों की कर्ज माफ़ी ही ‘एकमात्र समाधान’ है किसानों की समस्याओं का?

Saturday - December 15, 2018 12:09 pm , Category : WTN HINDI
किसानों की ‘नाराज़गी’ दूर करने मोदी सरकार कर सकती है किसानों का ‘कर्ज माफ़’!
किसानों की ‘नाराज़गी’ दूर करने मोदी सरकार कर सकती है किसानों का ‘कर्ज माफ़’!

विश्लेषण: क्या चुनाव जीतने का ‘एकमात्र साधन’ रह गई है किसानों की कर्ज माफ़ी योजना?
 

DEC 15 (WTN) - मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार के बाद समीक्षा का दौर जारी है कि भाजपा की हार के पीछे के क्या कारण हैं। बात करें मध्य प्रदेश की, तो कहा जा रहा है कि किसानों की नाराज़गी और कांग्रेस के कर्ज माफ़ी के वादे के कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। समीक्षकों का मानना है कि नोटबंदी के बाद किसानों को लगभग एक साल तक नकदी की समस्या से परेशान होना पड़ा जिसके कारण वे समय पर बीज, खाद और खेती से सम्बन्धित उपकरणों को नहीं खरीद सके और इसके कारण किसानों ने भाजपा के ख़िलाफ़ वोटिंग की।
 
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत और भाजपा की हार के पीछे की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है किसानों की कर्ज माफ़ी का कांग्रेस का चुनावी वादा। मध्य प्रदेश में भाजपा की हार के बाद कहा जा रहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार भी किसानों की कर्ज माफ़ी का एक बड़ा दांव खेल सकती है ताकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उसे फ़ायदा मिल सके, जिस तरह का फ़ायदा कांग्रेस को यूपीए शासन के दौरान 2009 के लोकसभा चुनाव में मिला था।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2008 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने देशभर के किसानों का क़रीब 72 हज़ार करोड़ रुपए का कर्ज माफ़ किया था। कांग्रेस को इस कर्ज माफ़ी का सीधा चुनावी फ़ायदा हुआ और 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 200 से ज़्यादा सीटों पर जीत हासिल हुई।
 
बात करें मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव की, तो साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ग्रामीण क्षेत्र की 38 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार किसानों की कर्ज माफ़ी का वायदा कांग्रेस के पक्ष में रहा और उसने ग्रामीण क्षेत्र की 68 सीटों पर जीत हासिल की और भाजपा को 15 सालों के बाद शिकस्त दी।
 
तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार के बाद कहा जा रहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार नाराज़ किसानों को खुश करने के लिए देश के 2.63 करोड़ किसानों का 4 लाख करोड़ रुपयों का कर्ज माफ़ कर सकती है। वहीं कर्ज माफ़ी के साथ ही समर्थन मूल्य में वृद्धि का ऐलान भी मोदी सरकार कर सकती है। इतना ही नहीं, कहा जा रहा है कि किसानों के लिए कई अन्य लोक लुभावन योजनाएं भी लाई जा सकती हैं जिससे किसानों की कथित नाराज़गी को दूर किया जा सके।
 
किसानों की कर्ज माफ़ी राजनीतिक दलों के लिए एक लोक लुभावन योजना है, लेकिन इस तरह की योजना का देश की और बैंकों की वित्तीय हालत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। किसानों को खुश करने के लिए मोदी सरकार कर्ज माफ़ी की घोषणा कर तो देगी, लेकिन उससे राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय देश का राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत से ज़्यादा हो चुका है।

इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने रोजकोषीय घाटा कुल जीडीपी का 3.3 प्रतिशत यानि कि 6.24 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रखने की योजना बनाई थी। लेकिन बिना कर्ज माफ़ी के ही कुछ क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने देश का कुल राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.5 प्रतिशत यानि 6.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही है।
 
इधर, भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने किसानों की कर्ज माफ़ी का विरोध किया है। राजन का कहना है कि कर्ज माफ़ी से राजस्व पर असर पड़ता है। राजन के मुताबिक़, “किसान कर्ज माफ़ी का सबसे बड़ा फायदा सांठगाठ वालों को मिलता है। अक्सर इसका लाभ गरीबों को मिलने की बजाए उन्हें मिलता है, जिनकी स्थिति बेहतर है।”

इससे पहले जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान प्रदेश के किसानों का कर्ज माफ़ करने का वादा किया था तब भी इसका विरोध हुआ था। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की तत्‍कालीन चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने भी किसान कर्ज माफ़ किए जाने पर आपत्ति जताई थी। भट्टाचार्य ने कहा था, “कर्ज लेने वाले कर्ज चुकाने के बजाय अगले चुनाव का इंतज़ार करेंगे।” किसान कर्ज माफ़ी का विरोध करने वालों में रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर रहे एस.एस. मूंदड़ा भी शामिल थे।

बड़ा सवाल यही है कि क्या कर्ज माफ़ी ही किसानों की समस्या का एकमात्र समाधान है। समय-समय पर राजनीतिक दल किसानों की कर्ज माफ़ी का वादा करते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के नेता भूल जाते हैं कि कर्ज माफ़ी से राजकोषीय घाटा बढ़ता है और उसके कारण सरकार के पास विकास कार्यों के लिए कम पैसा बच पाता है।

कर्ज माफ़ी ही किसानों की समस्याओं का एकमात्र समाधान नहीं है, बल्कि किसानों के लिए बीज, खाद, पानी और बिजली की समुचित व्यवस्था करके ही उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। क्योंकि कर्ज माफ़ी जैसी योजनाओं से सिर्फ़ और सिर्फ़ राजकोषीय घाटा बढ़ता है और बैंकों की वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ता है जिसका दुष्प्रभाव बाद में दिखाई देता है।