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विश्लेषण: क्या मध्य प्रदेश में कर्ज़ माफ़ी के नाम पर हुई है किसानों के साथ ‘वादा ख़िलाफ़ी’?

Tuesday - December 18, 2018 11:45 am , Category : WTN HINDI
किसानों की कर्ज़ माफ़ी को भाजपा ने बताया किसानों के साथ ‘छलावा’
किसानों की कर्ज़ माफ़ी को भाजपा ने बताया किसानों के साथ ‘छलावा’

मध्य प्रदेश में किसानों की कर्ज़ माफ़ी पर ‘बवाल’, किसानों और भाजपा ने बताया ‘धोखा’

DEC 18 (WTN) – मध्य प्रदेश में किसानों की कर्ज़ माफ़ी का मुद्दा विधानसभा चुनाव के दौरान काफ़ी छाया रहा था, किसानों की कर्ज़ माफ़ी के चुनावी वादे के कारण ही कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाने में सफल रही है। कांग्रेस की सरकार बनने और शपथ लेने के तुरन्त बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बाक़ायदा किसानों की कर्ज़ माफ़ी की फ़ाइल पर हस्ताक्षर कर दिये। आदेश जारी होने के तुरन्त बाद आदेशित प्रति सोशल मीडिया पर दिन भर प्रचारित होती रही। लेकिन मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने जिस तरह से कर्ज़ माफ़ी की है, उस पर किसानों और भाजपा ने सवाल उठाने शुरू कर दिये हैं।
 
सबसे पहले आपको बता दें कि राज्य की कांग्रेस सरकार ने किसानों की कर्ज़माफ़ी किस तरह से की है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के हस्ताक्षर वाली जो आदेशित प्रति मीडिया के सामने है उसमें साफ़ लिखा गया है, “मध्य प्रदेश राज्य में स्थित राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंकों में अल्पकालीन सहकारी ऋण के रूप में शासन द्वारा ‘पात्रता’ अनुसार ‘पात्र’ पाये गये किसानों के रुपये दो लाख की सीमा तक का दिनांक 31 मार्च, 2018 की स्थिति में बक़ाया फसल ऋण माफ़ किया जाता है।”
 
लेकिन कांग्रेस सरकार के इस आदेश को भाजपा ने किसानों के साथ वादा ख़िलाफ़ी बताया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री किसानों की कर्ज़माफ़ी जिस तरीक़े से करना चाहते हैं, वह प्रदेश के किसानों के साथ वादा ख़िलाफ़ी है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में प्रदेश के ‘सभी’ किसानों के दो लाख रुपये तक के कर्ज़ माफ़ करने का वादा किया था। पर अब सरकार बन जाने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ‘सिर्फ़’ 31 मार्च, 2018 तक के कर्ज़दार किसानों के कर्ज़ माफ़ करने की बात कर रहे हैं।

विपक्ष का आरोप है कांग्रेस सरकार के इस आदेश के बाद सिर्फ़ 5 प्रतिशत किसानों को ही वास्तविक कर्ज़माफ़ी का लाभ मिल पाएगा, वो भी लाभ सिर्फ़ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो कि 31 मार्च, 2018 की स्थिति में डिफाल्टर थे, जबकि कांग्रेस ने वादा ‘सभी’ किसानों के कर्ज़ माफ़ करने का किया था। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस सरकार किसानों के साथ ‘पक्षपात’ कर रही है। एक अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू होता है और मुख्यमंत्री कमलनाथ जैसा कह रहे हैं, उसके अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष में कर्ज़ लेने वाले किसानों का कर्ज़ माफ़ नहीं किया जाएगा। यह प्रदेश के किसानों के साथ धोखा है।
 
भाजपा की मांग है कि कांग्रेस सरकार यदि सही में प्रदेश के किसानों को राहत देना चाहती है, तो वह 30 सितम्बर, 2018 तक की स्थिति में कर्जदार किसानों के कर्ज़ माफ़ करे। इधर इस बारे में किसानों का कहना है कि मार्च क्लोजिंग तक लगभग 95 प्रतिशत किसान अपनी कर्ज़ अदायगी कर देते हैं ताक़ि नए वित्तीय वर्ष में उन्हें कर्ज़ मिल सके। ऐसे में 31 मार्च तक प्रदेश के क़रीब 95 किसान अपना कर्ज़ जमा कर देते हैं और बाक़ि जो 5 प्रतिशत किसान कर्ज़ जमा नहीं कर पाते हैं उनकी कोई ना कोई मज़बूरी होती है। ऐसे में कांग्रेस सरकार की कर्ज माफ़ी वास्तव में किसानों के साथ वादा ख़िलाफ़ी है।  
 
मध्य प्रदेश में भाजपा का आरोप है कि राज्य की कांग्रेस सरकार ने किसानों के साथ कर्ज़ माफ़ी में वादा ख़िलाफ़ी है। कुछ इसी तरह का आरोप कांग्रेस सरकार की कर्ज़ माफ़ी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी लगाया था। विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान झाबुआ में आमसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “कर्नाटक में भी कांग्रेस सरकार ने कर्ज़ माफ़ी का वादा किया था, लेकिन कर्नाटक में वोट तो ले लिये, सरकार भी बना ली। लेकिन ब्याज माफ़ करने की और कर्ज़ माफ़ करने की बात तो छोड़ो, किसानों को जेल भेजने का वारंट निकाल रहे हैं। वारंट यह कि आपने पैसा जमा नहीं कराया तो जेल जाने की तैयारी करो।”
 
जिस तरह के आरोप भाजपा और किसान मध्य प्रदेश में लगा रहे हैं कि कांग्रेस ने कर्ज़ माफ़ी के नाम पर राज्य के किसानों के साथ वादा ख़िलाफ़ी है, उसका जवाब तो कांग्रेस को देना ही होगा। भाजपा का आरोप है कि 31 मार्च, 2018 तक की कर्ज़ माफ़ी से सिर्फ़ 5 प्रतिशत किसानों की ही कर्ज़माफ़ी होगी और वो भी उन किसानों की जो कि डिफॉल्टर हैं। अब देखना होगा कि भाजपा और किसानों के इन आरोपों का क्या जवाब राज्य की कांग्रेस सरकार देती है। क्योंकि यदि वास्तव में कांग्रेस की कर्ज़माफ़ी किसानों के साथ वादा ख़िलाफ़ी है, तो कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।