जानिए साल 2018 में हुए टैक्स सम्बन्धित बदलाव
Friday - December 21, 2018 3:49 pm ,
Category : WTN HINDI
बदले गये हैं साल 2018 में इनकम टैक्स समेत कई टैक्स सम्बन्धित नियम
पैन कार्ड से लेकर इनकम टैक्स रिटर्न तक में हुए हैं बड़े परिवर्तन
DEC 21 (WTN) – साल 2018 में टैक्स से जुड़े कई बदलाव किये गये हैं जिसके कारण इस साल लोगों को टैक्स जमा करने में काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। आने वाले समय में भी आपके लिए इन नियमों की ज़रूरत पड़ सकती है इसलिए आपका इन नियमों को जानना काफ़ी ज़रूरी है।
आइये आपको बताते हैं कि टैक्स सम्बन्धित क्या-क्या बदलाव साल 2018 में हुए हैं। टैक्स सम्बन्धित ये बदलाव आपको जानना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि इनमें से कई बदलाव इनकम टैक्स से जुड़े हुए हैं।
साल 2018 में इनकम टैक्स रिटर्न को तय अवधि के बाद फ़ाइल करने पर पेनल्टी का नया नियम बनाया गया है। नये नियम के मुताबिक़, अगर कोई तय अवधि के बाद इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करता है, तो उस पर 10 हज़ार रुपए तक की पेनल्टी लग सकती है। छोटे टैक्स पेयर्स के लिए 1 हज़ार रुपए की पेनल्टी का प्रावधान है।
अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करते समय कोई ग़लती की है, तो अब आप अपने इनकम टैक्स रिटर्न को अगले साल 31 मार्च तक ही ठीक कर पाएंगे। पहले टैक्स पेयर्स को 2 साल तक रिटर्न ठीक करने के लिए समय मिलता था।
साल 2018 के नये नियमों के मुताबिक़, सीनियर सिटीजन के लिए 50 हज़ार तक के ब्याज पर अब कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा। सरकार ने इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट में 80टीटीटीबी नाम का नया सेक्शन जोड़ा है। ये डिडक्शन आईटीआर फ़ाइल करते समय उपलब्ध रहेगा।
बात करें पैन कार्ड की, तो इससे जुड़े नियमों में इस साल दो बार बदलाव हुए हैं। पैन कार्ड में हुए पहले बदलाव में ट्रांसजेंडर का विकल्प जोड़ा गया है, वहीं इसके बाद माता-पिता के अलग होने की स्थिति में पिता का नाम देना आवेदन में अनिवार्य नहीं रह गया है। पैन कार्ड का यह नया नियम इसी महीने की पांच दिसम्बर से लागू हुआ है। इतना ही नहीं, अब विदेश में पैसा भेजने पर पैन कार्ड देना ज़रूरी कर दिया गया है।
वहीं इस साल पैन कार्ड की अर्जी देने के लिए आधार कार्ड को ज़रूरी कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद ये ज़रूरी हो गया। इसके अलावा जिसके पास भी 1 जुलाई 2017 तक पैन नम्बर है, उसे इसे आधार से लिंक करना ज़रूरी कर दिया है। इसके लिए 31 मार्च 2019 अंतिम तारीख़ है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनपीएस यानि कि नेशनल पेंशन सिस्टम में मैच्युरिटी के समय निकाले जाने वाले 60 प्रतिशत हिस्से पर टैक्स में पूरी छूट दे दी गई। बाक़ी बची 40 प्रतिशत रक़म से अभी भी एन्युटी ख़रीदना जरूरी है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसी साल एक अप्रैल से टैक्स पेमेंट पर सेस में एक प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सेस को अब तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दिया गया है, वहीं इसका नया नाम एजुकेशन और हेल्थ सेस कर दिया गया है।
मेडिकल और ट्रांसपोर्ट अलाउंसेस की जगह अब स्टैंडर्ड डिडक्शन ने ले ली है और इसके लिए बाक़ायदा बजट में 40 हज़ार रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन का प्रावधान किया गया था। इसको आईटीआर फ़ाइल करते समय क्लैम किया जा सकता है।
साल 2018 में ही बजट में ही इक्विटी और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड के बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का प्रस्ताव किया गया है। 1 लाख रुपए से ऊपर के फ़ायदे पर 10 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान किया गया है, एक साल बाद फंड के बेचने पर यह टैक्स लगेगा।
वहीं इक्विटी म्यूचुअल फंड पर इसी साल बजट से डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लगाया गया है। एक अप्रैल 2018 से म्यूचुअल फंड के डिविडेंड पर 10 प्रतिशत टैक्स लगना शुरू हो गया है।
54ईसी बॉन्ड में निवेश पर टैक्स छूट लेने के नियम में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत अब टैक्स बचाने के लिए 3 साल के बदले 5 साल तक निवेश करना पड़ेगा।
DEC 21 (WTN) – साल 2018 में टैक्स से जुड़े कई बदलाव किये गये हैं जिसके कारण इस साल लोगों को टैक्स जमा करने में काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। आने वाले समय में भी आपके लिए इन नियमों की ज़रूरत पड़ सकती है इसलिए आपका इन नियमों को जानना काफ़ी ज़रूरी है।
आइये आपको बताते हैं कि टैक्स सम्बन्धित क्या-क्या बदलाव साल 2018 में हुए हैं। टैक्स सम्बन्धित ये बदलाव आपको जानना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि इनमें से कई बदलाव इनकम टैक्स से जुड़े हुए हैं।
साल 2018 में इनकम टैक्स रिटर्न को तय अवधि के बाद फ़ाइल करने पर पेनल्टी का नया नियम बनाया गया है। नये नियम के मुताबिक़, अगर कोई तय अवधि के बाद इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करता है, तो उस पर 10 हज़ार रुपए तक की पेनल्टी लग सकती है। छोटे टैक्स पेयर्स के लिए 1 हज़ार रुपए की पेनल्टी का प्रावधान है।
अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करते समय कोई ग़लती की है, तो अब आप अपने इनकम टैक्स रिटर्न को अगले साल 31 मार्च तक ही ठीक कर पाएंगे। पहले टैक्स पेयर्स को 2 साल तक रिटर्न ठीक करने के लिए समय मिलता था।
साल 2018 के नये नियमों के मुताबिक़, सीनियर सिटीजन के लिए 50 हज़ार तक के ब्याज पर अब कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा। सरकार ने इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट में 80टीटीटीबी नाम का नया सेक्शन जोड़ा है। ये डिडक्शन आईटीआर फ़ाइल करते समय उपलब्ध रहेगा।
बात करें पैन कार्ड की, तो इससे जुड़े नियमों में इस साल दो बार बदलाव हुए हैं। पैन कार्ड में हुए पहले बदलाव में ट्रांसजेंडर का विकल्प जोड़ा गया है, वहीं इसके बाद माता-पिता के अलग होने की स्थिति में पिता का नाम देना आवेदन में अनिवार्य नहीं रह गया है। पैन कार्ड का यह नया नियम इसी महीने की पांच दिसम्बर से लागू हुआ है। इतना ही नहीं, अब विदेश में पैसा भेजने पर पैन कार्ड देना ज़रूरी कर दिया गया है।
वहीं इस साल पैन कार्ड की अर्जी देने के लिए आधार कार्ड को ज़रूरी कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद ये ज़रूरी हो गया। इसके अलावा जिसके पास भी 1 जुलाई 2017 तक पैन नम्बर है, उसे इसे आधार से लिंक करना ज़रूरी कर दिया है। इसके लिए 31 मार्च 2019 अंतिम तारीख़ है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनपीएस यानि कि नेशनल पेंशन सिस्टम में मैच्युरिटी के समय निकाले जाने वाले 60 प्रतिशत हिस्से पर टैक्स में पूरी छूट दे दी गई। बाक़ी बची 40 प्रतिशत रक़म से अभी भी एन्युटी ख़रीदना जरूरी है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसी साल एक अप्रैल से टैक्स पेमेंट पर सेस में एक प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सेस को अब तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दिया गया है, वहीं इसका नया नाम एजुकेशन और हेल्थ सेस कर दिया गया है।
मेडिकल और ट्रांसपोर्ट अलाउंसेस की जगह अब स्टैंडर्ड डिडक्शन ने ले ली है और इसके लिए बाक़ायदा बजट में 40 हज़ार रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन का प्रावधान किया गया था। इसको आईटीआर फ़ाइल करते समय क्लैम किया जा सकता है।
साल 2018 में ही बजट में ही इक्विटी और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड के बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का प्रस्ताव किया गया है। 1 लाख रुपए से ऊपर के फ़ायदे पर 10 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान किया गया है, एक साल बाद फंड के बेचने पर यह टैक्स लगेगा।
वहीं इक्विटी म्यूचुअल फंड पर इसी साल बजट से डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लगाया गया है। एक अप्रैल 2018 से म्यूचुअल फंड के डिविडेंड पर 10 प्रतिशत टैक्स लगना शुरू हो गया है।
54ईसी बॉन्ड में निवेश पर टैक्स छूट लेने के नियम में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत अब टैक्स बचाने के लिए 3 साल के बदले 5 साल तक निवेश करना पड़ेगा।