मध्य प्रदेश पर मायावती की ‘नज़र’
Monday - December 24, 2018 2:07 pm ,
Category : WTN HINDI
‘जातिगत समीकरणों’ के ज़रिये मध्य प्रदेश में ‘जनाधार’ बढ़ाने की तैयारी में बसपा
यूपी के ‘सोशल इंजीनियिरिंग’ फॉर्मूले को मध्य प्रदेश में लागू कर सकती हैं मायावती
DEC 24 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा को मिली करारी हार के बाद पार्टी प्रमुख मायावती चिंता में हैं और अब राज्य में बसपा को फ़िर से मज़बूती प्रदान करने के लिए मायावती यूपी की सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला मध्य प्रदेश में आजमा सकती हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव में हार के कारणों को ढूंढने, पार्टी अध्यक्ष मायावती ने अपने विशेष दूत और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम को मध्य प्रदेश भेजा है। जानकारी के मुताबिक़, मायावती के ख़ास रामजी गौतम राज्य के छोटे-बड़े पदाधिकारियों से विस्तृत चर्चा कर उन कारणों की खोज कर रहे हैं, जिसके कारण पार्टी को हार का सामना मध्य प्रदेश में करना पड़ा है।
पिछले विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में बसपा ने चार सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार पार्टी के सिर्फ़ दो ही सीटों पर जीत नसीब हो सकी। इतना ही नहीं, पिछले चुनाव के मुक़ाबले पार्टी का वोट प्रतिशत भी 1.29 प्रतिशत कम हो गया है। बसपा का जनाधार इतना गिर गया कि पिछले विधानसभा चुनाव में जीते पार्टी के चारों विधायकों को इस बार हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद मायावती ने मध्य प्रदेश में पार्टी में बड़ा फेरबदल करते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार और प्रदेश प्रभारी रामअचल राजभर को हटाने के बाद अब प्रदेश उपाध्यक्ष रामलखन को भी बदल दिया है।
जानकारी के मुताबिक़, बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम ने ग्वालियर, रीवा और जबलपुर क्षेत्र के पार्टी के छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं से विस्तार से चर्चा की और हार के कारणों पर मंथन किया। एक समय मध्य प्रदेश में बसपा का बड़ा जनाधार था, लेकिन धीरे-धीरे राज्य में बसपा का जनाधार कम होता चला गया जिसके बाद मायावती ने इस बारे में एक रिपोर्ट पहले मंगाई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद अब मायावती ने पार्टी की हार की वज़ह जानने के लिए रामजी गौतम को निचले स्तर तक कार्यकर्ताओं बातचीत करने और हार के कारण जानने के लिए भेजा है। बसपा उपाध्यक्ष गौतम के साथ प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष डी.पी. चौधरी और अन्य पदाधिकारी भी चुनाव में हार के कारणों को ढूंढने में लगे हैं।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में हार के बाद मायावती ने राज्य में बसपा नेतृत्व में कई परिवर्तन किये, जिसके तहत पार्टी के उपाध्यक्ष रामलखन के स्थान पर सतना के अच्छेलाल कुशवाह को पार्टी उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। अच्छेलाल को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि सतना से इस बार कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाह ने जीत दर्ज की है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिद्धार्थ कुशवाह पहले बसपा में भी रह चुके हैं, इसलिए मायावती ने विंध्य क्षेत्र के कुशवाह समाज को अपनी तरफ़ मिलाने की पूरी कवायद की है। अच्छेलाल कुशवाह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाने के बाद बसपा को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को कुशवाह समाज का समर्थन मिलेगा, लेकिन रामलखन को हटाए जाने का भी परिणाम बसपा को कुर्मी समाज की नाराज़गी से उठाने पड़ेगा, क्योंकि रामलखन कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।
एक समय बसपा की मध्य प्रदेश के मतदाताओं में बढ़िया पकड़ थी और साल 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने सात सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन धीरे-धीरे बसपा का जनाधार मध्य प्रदेश में कम होता चला गया। आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बसपा अब जातीय संतुलन पर ध्यान देने की कोशिश में है। जिस तरह से यूपी में बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत सवर्णों और ओबीसी समाज को साथ लेकर चलने की नीति बनाई थी और साल 2007 में जीत भी हासिल की थी, वैसी ही कुछ योजना बसपा मध्य प्रदेश में अपना जनाधार वापस पाने के लिए कर सकती है।
DEC 24 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा को मिली करारी हार के बाद पार्टी प्रमुख मायावती चिंता में हैं और अब राज्य में बसपा को फ़िर से मज़बूती प्रदान करने के लिए मायावती यूपी की सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला मध्य प्रदेश में आजमा सकती हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव में हार के कारणों को ढूंढने, पार्टी अध्यक्ष मायावती ने अपने विशेष दूत और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम को मध्य प्रदेश भेजा है। जानकारी के मुताबिक़, मायावती के ख़ास रामजी गौतम राज्य के छोटे-बड़े पदाधिकारियों से विस्तृत चर्चा कर उन कारणों की खोज कर रहे हैं, जिसके कारण पार्टी को हार का सामना मध्य प्रदेश में करना पड़ा है।
पिछले विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में बसपा ने चार सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार पार्टी के सिर्फ़ दो ही सीटों पर जीत नसीब हो सकी। इतना ही नहीं, पिछले चुनाव के मुक़ाबले पार्टी का वोट प्रतिशत भी 1.29 प्रतिशत कम हो गया है। बसपा का जनाधार इतना गिर गया कि पिछले विधानसभा चुनाव में जीते पार्टी के चारों विधायकों को इस बार हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद मायावती ने मध्य प्रदेश में पार्टी में बड़ा फेरबदल करते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार और प्रदेश प्रभारी रामअचल राजभर को हटाने के बाद अब प्रदेश उपाध्यक्ष रामलखन को भी बदल दिया है।
जानकारी के मुताबिक़, बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम ने ग्वालियर, रीवा और जबलपुर क्षेत्र के पार्टी के छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं से विस्तार से चर्चा की और हार के कारणों पर मंथन किया। एक समय मध्य प्रदेश में बसपा का बड़ा जनाधार था, लेकिन धीरे-धीरे राज्य में बसपा का जनाधार कम होता चला गया जिसके बाद मायावती ने इस बारे में एक रिपोर्ट पहले मंगाई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद अब मायावती ने पार्टी की हार की वज़ह जानने के लिए रामजी गौतम को निचले स्तर तक कार्यकर्ताओं बातचीत करने और हार के कारण जानने के लिए भेजा है। बसपा उपाध्यक्ष गौतम के साथ प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष डी.पी. चौधरी और अन्य पदाधिकारी भी चुनाव में हार के कारणों को ढूंढने में लगे हैं।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में हार के बाद मायावती ने राज्य में बसपा नेतृत्व में कई परिवर्तन किये, जिसके तहत पार्टी के उपाध्यक्ष रामलखन के स्थान पर सतना के अच्छेलाल कुशवाह को पार्टी उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। अच्छेलाल को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि सतना से इस बार कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाह ने जीत दर्ज की है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिद्धार्थ कुशवाह पहले बसपा में भी रह चुके हैं, इसलिए मायावती ने विंध्य क्षेत्र के कुशवाह समाज को अपनी तरफ़ मिलाने की पूरी कवायद की है। अच्छेलाल कुशवाह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाने के बाद बसपा को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को कुशवाह समाज का समर्थन मिलेगा, लेकिन रामलखन को हटाए जाने का भी परिणाम बसपा को कुर्मी समाज की नाराज़गी से उठाने पड़ेगा, क्योंकि रामलखन कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।
एक समय बसपा की मध्य प्रदेश के मतदाताओं में बढ़िया पकड़ थी और साल 2008 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने सात सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन धीरे-धीरे बसपा का जनाधार मध्य प्रदेश में कम होता चला गया। आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बसपा अब जातीय संतुलन पर ध्यान देने की कोशिश में है। जिस तरह से यूपी में बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत सवर्णों और ओबीसी समाज को साथ लेकर चलने की नीति बनाई थी और साल 2007 में जीत भी हासिल की थी, वैसी ही कुछ योजना बसपा मध्य प्रदेश में अपना जनाधार वापस पाने के लिए कर सकती है।