जानिए कि आख़िर क्यों नियम बना दिन में दोपहिया वाहनों की हेडलाइट जलाने का?
Friday - December 28, 2018 2:58 pm ,
Category : WTN HINDI
बीएस-4 ईंधन वाले दोपहिया वाहनों में ‘हमेशा’ जलती है हेडलाइट
सड़क दुर्घटनाओं में ‘कमी’ लाने के उद्देश्य से बना दिन में भी दो पहिया वाहन की हेडलाइट जलाने का नियम
DEC 28 (WTN) – सड़क दुर्घटनाओं के मामले में भारत पूरी दुनिया में बदनाम है। यदि वाहनों के हिसाब से देखा जाये तो सबसे अधिक 33.8 प्रतिशत दुर्घटनाएं बाइक या दुपहिया वाहन चालकों की होती हैं और सभी सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज़्यादा मरने वालों की संख्या भी बाइक सवारों की ही होती है। दिनों दिन बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए सरकार ने इनकी संख्या में कमी करने के लिए सभी मुमकिन उपाय उठाने शुरू कर दिए हैं और इन्हीं उपायों में एक उपाय है दिन में दो पहिया वाहनों की हेडलाइट जली रहना।
जैसा कि आप जानते हैं कि साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बीएस-3 (Bharat stage emission standards) वाहनों की बिक्री पर रोक लगा दी है क्योंकि ये वाहन ज़्यादा प्रदूषण फैलाते थे। इस रोक के बाद अब 1 अप्रैल 2017 से ऑटो कम्पनियों द्वारा बीएस-3 ईंधन से चलने वाले वाहनों का ना तो उत्पादन किया जायेगा और ना बिक्री। यानि कि अब देश में ऑटो कम्पनियां केवल बीएस-4 ईंधन से चलने वाले वाहनों का उत्पादन ही कर सकेंगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीएस-4 ईंधन से चलने वाले इंजन का नया फ़ीचर ऐसा होता है कि इसमें वाहन के इंजन को स्टार्ट करते ही वाहन की हेडलाइट भी जल जाएगी। जब तक दोपहिया वाहन का इंजन स्टार्ट रहेगा, तब तक हेडलाइट ऑन रहेगी। हेडलाइट को वाहन चालक चाहकर भी बंद नहीं कर पाएंगे। अब हेडलाइट ऑन-ऑफ स्विच की जगह अब सभी दोपहिया वाहनों में आटोमैटिक हेडलाइट सिस्टम (ओएचओ) होगा।
आप सोच रहे होंगे कि दिन में लाइट जलाने से सड़क दुर्घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है, तो आपकी जानकारी के लिए सबसे पहले बता दें कि गाड़ियों में दिन में हेडलाइट जलाने का नियम यूरोपीय देशों में पहले से ही लागू है जिसके कारण वहां पर वाहन दुर्घटनाएं कम होती हैं।
दिन में दो पहिया वाहन की लाइट जली रहने का सबसे बड़ा फायदा उस समय होगा जब धूल, बरसात, घने कोहरे और भारी ट्रैफिक में वाहन चालक दूसरे वाहनों को देख पाएंगे। इसके अलावा सामान्य मौसम में भी जब सामने से आ रहे वाहन की लाइट चमकेगी, तो उसके विपरित दिशा से आ रहा ड्राइवर सावधान रहेगा और दुर्घटना की आशंका कम हो जाएगी। काफ़ी लोगों को लगता है कि दिन में दो पहिया वाहन की लाइट जलाने से वाहन पर कोई प्रभाव पड़ेगा, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसा नहीं है।
दो पहिया वाहन में दिन में लाइट जलने का नियम 1 अप्रैल 2017 से भारत में लागू कर दिया गया है जिसके बाद से ऑटोमोबाइल कम्पनियों द्वारा ऐसे दोपहिया वाहनों को ही मार्केट में उतारा जा रहा है जिसमें बीएस-4 इंजन हो यानी कि गाड़ी शुरू करते ही हेडलाइट जल जाए। इस नियम को ऑटोमोबाइल कम्पनियों के लिए ज़रूरी कर दिया गया है लेकिन आम जनता के लिए ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। क्योंकि मार्केट में बड़ी तादात में पुराने मॉडल की गाड़ियां हैं।
कई यूरोपीय देशों में साल 2003 से ही डे टाइम रनिंग लाइट्स (DRL) का नियम लागू है। यूरोप के अलावा यह नियम कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन में भी लागू है। भारत से काफ़ी पहले दुनिया के बहुत से देशों में डे टाइम रनिंग लाइट्स नियम बहुत पॉपुलर है और इसके कारण वहां पर सड़क दुर्घटनाओं में काफ़ी कमी आई है।यही कारण है कि विदेशों से भारत आने वाली कारों में भी यह सिस्टम इनबिल्ट होता है। तो अब आप समझ गये होंगे कि आख़िर क्यों अब मार्केट में ऑटोमोबाइल कम्पनियों द्वारा ऐसे दोपहिया वाहन बेंचे जा रहे हैं जिनकी हेडलाइट गाड़ी स्टार्ट करने पर हमेशा जलती रहती है।
DEC 28 (WTN) – सड़क दुर्घटनाओं के मामले में भारत पूरी दुनिया में बदनाम है। यदि वाहनों के हिसाब से देखा जाये तो सबसे अधिक 33.8 प्रतिशत दुर्घटनाएं बाइक या दुपहिया वाहन चालकों की होती हैं और सभी सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज़्यादा मरने वालों की संख्या भी बाइक सवारों की ही होती है। दिनों दिन बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए सरकार ने इनकी संख्या में कमी करने के लिए सभी मुमकिन उपाय उठाने शुरू कर दिए हैं और इन्हीं उपायों में एक उपाय है दिन में दो पहिया वाहनों की हेडलाइट जली रहना।
जैसा कि आप जानते हैं कि साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बीएस-3 (Bharat stage emission standards) वाहनों की बिक्री पर रोक लगा दी है क्योंकि ये वाहन ज़्यादा प्रदूषण फैलाते थे। इस रोक के बाद अब 1 अप्रैल 2017 से ऑटो कम्पनियों द्वारा बीएस-3 ईंधन से चलने वाले वाहनों का ना तो उत्पादन किया जायेगा और ना बिक्री। यानि कि अब देश में ऑटो कम्पनियां केवल बीएस-4 ईंधन से चलने वाले वाहनों का उत्पादन ही कर सकेंगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीएस-4 ईंधन से चलने वाले इंजन का नया फ़ीचर ऐसा होता है कि इसमें वाहन के इंजन को स्टार्ट करते ही वाहन की हेडलाइट भी जल जाएगी। जब तक दोपहिया वाहन का इंजन स्टार्ट रहेगा, तब तक हेडलाइट ऑन रहेगी। हेडलाइट को वाहन चालक चाहकर भी बंद नहीं कर पाएंगे। अब हेडलाइट ऑन-ऑफ स्विच की जगह अब सभी दोपहिया वाहनों में आटोमैटिक हेडलाइट सिस्टम (ओएचओ) होगा।
आप सोच रहे होंगे कि दिन में लाइट जलाने से सड़क दुर्घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है, तो आपकी जानकारी के लिए सबसे पहले बता दें कि गाड़ियों में दिन में हेडलाइट जलाने का नियम यूरोपीय देशों में पहले से ही लागू है जिसके कारण वहां पर वाहन दुर्घटनाएं कम होती हैं।
दिन में दो पहिया वाहन की लाइट जली रहने का सबसे बड़ा फायदा उस समय होगा जब धूल, बरसात, घने कोहरे और भारी ट्रैफिक में वाहन चालक दूसरे वाहनों को देख पाएंगे। इसके अलावा सामान्य मौसम में भी जब सामने से आ रहे वाहन की लाइट चमकेगी, तो उसके विपरित दिशा से आ रहा ड्राइवर सावधान रहेगा और दुर्घटना की आशंका कम हो जाएगी। काफ़ी लोगों को लगता है कि दिन में दो पहिया वाहन की लाइट जलाने से वाहन पर कोई प्रभाव पड़ेगा, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसा नहीं है।
दो पहिया वाहन में दिन में लाइट जलने का नियम 1 अप्रैल 2017 से भारत में लागू कर दिया गया है जिसके बाद से ऑटोमोबाइल कम्पनियों द्वारा ऐसे दोपहिया वाहनों को ही मार्केट में उतारा जा रहा है जिसमें बीएस-4 इंजन हो यानी कि गाड़ी शुरू करते ही हेडलाइट जल जाए। इस नियम को ऑटोमोबाइल कम्पनियों के लिए ज़रूरी कर दिया गया है लेकिन आम जनता के लिए ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। क्योंकि मार्केट में बड़ी तादात में पुराने मॉडल की गाड़ियां हैं।
कई यूरोपीय देशों में साल 2003 से ही डे टाइम रनिंग लाइट्स (DRL) का नियम लागू है। यूरोप के अलावा यह नियम कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन में भी लागू है। भारत से काफ़ी पहले दुनिया के बहुत से देशों में डे टाइम रनिंग लाइट्स नियम बहुत पॉपुलर है और इसके कारण वहां पर सड़क दुर्घटनाओं में काफ़ी कमी आई है।यही कारण है कि विदेशों से भारत आने वाली कारों में भी यह सिस्टम इनबिल्ट होता है। तो अब आप समझ गये होंगे कि आख़िर क्यों अब मार्केट में ऑटोमोबाइल कम्पनियों द्वारा ऐसे दोपहिया वाहन बेंचे जा रहे हैं जिनकी हेडलाइट गाड़ी स्टार्ट करने पर हमेशा जलती रहती है।