शून्य से 32 डिग्री कम तापमान में भी रहते हैं लोग, चलती है दिनचर्या!
Saturday - December 1, 2018 4:27 pm ,
Category : WTN HINDI
ओयमायकोन क्षेत्र में हमेशा जमा रहता है दूध
ओयमायकोन: ऐसा क्षेत्र जहां पर पानी को हवा में उछालते ही पानी बन जाता है बर्फ
JAN 01 (WTN) – भारत में इन दिनों ठण्ड का मौसम जोरों पर है, कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में के जगहों पर तापमान शून्य से नीचे जा चुका है। आप हर दिन समाचार में सुनते और पढ़ते होंगे कि कहीं कहीं पर तापमान शून्य से नीचे रहा, लेकिन वहां पर साल भर नहीं बल्कि ठण्डों के कुछ दिनों में ही तापमान शून्य से नीचे जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां पर कि साल में 11 महीने से भी ज़्यादा समय तक तापमान शून्य सेे नीचे ही रहता हैै। यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं
दुनिया के सात महाद्वीपों में एक है अंटार्कटिका जहां पर साल भर बर्फ जमी रहती है। जानकारी के मुताबिक़ यहां पर जमी बर्फ की औसत मोटाई करीब 1.6 किलोमीटर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस महाद्वीप में सिर्फ़ 2,000 वर्ग किलोमीटर ही खुली ज़मीन है। यहां पर इनती ठण्ड पड़ती है कि साल में सिर्फ़ 20 ही दिन तापमान शून्य से ऊपर रहता है।
जब से मानव ने तापमान को मापने का तरीक़ा सीखा है उसके बाद से अभी तक पृथ्वी की सतह पर सबसे कम तापमान अंटार्कटिका में ही मापा गया है। सोवियत रूस द्वारा स्थापित वोस्टोक नामक शोधशाला में 24 अगस्त 1960 को तापमान शून्य से 88.3 डिग्री सेल्सियस कम मापा गया था। यह वह जगह है जहां पर मानव बस्ती नहीं है और यहां पर मानव रह नहीं सकता है।
अब बात करते हैं उस स्थान की जहां पर की मानव रहता है और वहां पर शून्य से काफ़ी कम तापमान है और यह स्थान है रूस के साइबेरिया का ओयमायकोन क्षेत्र। यहां पर एक नदी है, लेकिन शायद ही किसी ने इसे देखा हो क्योंकि नदी के ऊपर हमेशा बर्फ जमी रहती है। यदि इसकी ड्रिलिंग की जाएगी तो बर्फ के नीचे नदी ज़रूर नज़र आ जाएगी। इस जगह का औसत तापमाना माइनस 32°C से माइनस 49.2°C के बीच रहता है। साल 1926 में यहां का तापमान माइनस 71.2°C रिकॉर्ड किया गया था।
इस इलाके में कोई फ्रिज़ नहीं है और हर मौसम में यहां दूध जमा हुआ मिलता है वो भी लीटर में नहीं मीटर से वो भी नापकर तोड़कर दिया जाता है। यदि इस इलाके में आपको चाय बनाना है तो एक छोटा-सा टुकड़ा दूध का डालना पड़ेगा। यहां पर साफ़ पानी भी टुकड़ों में हिफ़ाजत के साथ रखा जाता है। नहाने के पानी का टुकड़ा अलग और पीने का पानी का टुकड़ा अलग। यहां पर इतनी ठण्ड है कि इसका अनुमान आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां पर यदि पानी को हवा में उछाला दिया जाए तो वह बर्फ के टुकड़े बनकर नीचे गिरता है।
समय से साथ धीरे-धीरे यहां की मूल जाति विलुप्ति की ओर है। लेकिन आधुनिकता के साथ यहां पर बाहर से कुछ लोग ज़रूर आकर बस गए हैं। इन लोगों ने यहां के मूल निवासियों को गर्म रहने का तरीक़ा सीखा दिया है जिसके बाद यहां की मूल जाति के कुछ लोग बचे हुए हैं। इस इलाके में कुछ दुर्लभ मछलियां पाई जाती हैं जो कि माइस 32 डिग्री के तापमान में भी जिंदा रहती हैं,लेकिन धीरे-धीरे अब इनकी प्रजाति पर भी संकट छाने लगा है।
JAN 01 (WTN) – भारत में इन दिनों ठण्ड का मौसम जोरों पर है, कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में के जगहों पर तापमान शून्य से नीचे जा चुका है। आप हर दिन समाचार में सुनते और पढ़ते होंगे कि कहीं कहीं पर तापमान शून्य से नीचे रहा, लेकिन वहां पर साल भर नहीं बल्कि ठण्डों के कुछ दिनों में ही तापमान शून्य से नीचे जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां पर कि साल में 11 महीने से भी ज़्यादा समय तक तापमान शून्य सेे नीचे ही रहता हैै। यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं
दुनिया के सात महाद्वीपों में एक है अंटार्कटिका जहां पर साल भर बर्फ जमी रहती है। जानकारी के मुताबिक़ यहां पर जमी बर्फ की औसत मोटाई करीब 1.6 किलोमीटर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस महाद्वीप में सिर्फ़ 2,000 वर्ग किलोमीटर ही खुली ज़मीन है। यहां पर इनती ठण्ड पड़ती है कि साल में सिर्फ़ 20 ही दिन तापमान शून्य से ऊपर रहता है।
जब से मानव ने तापमान को मापने का तरीक़ा सीखा है उसके बाद से अभी तक पृथ्वी की सतह पर सबसे कम तापमान अंटार्कटिका में ही मापा गया है। सोवियत रूस द्वारा स्थापित वोस्टोक नामक शोधशाला में 24 अगस्त 1960 को तापमान शून्य से 88.3 डिग्री सेल्सियस कम मापा गया था। यह वह जगह है जहां पर मानव बस्ती नहीं है और यहां पर मानव रह नहीं सकता है।
अब बात करते हैं उस स्थान की जहां पर की मानव रहता है और वहां पर शून्य से काफ़ी कम तापमान है और यह स्थान है रूस के साइबेरिया का ओयमायकोन क्षेत्र। यहां पर एक नदी है, लेकिन शायद ही किसी ने इसे देखा हो क्योंकि नदी के ऊपर हमेशा बर्फ जमी रहती है। यदि इसकी ड्रिलिंग की जाएगी तो बर्फ के नीचे नदी ज़रूर नज़र आ जाएगी। इस जगह का औसत तापमाना माइनस 32°C से माइनस 49.2°C के बीच रहता है। साल 1926 में यहां का तापमान माइनस 71.2°C रिकॉर्ड किया गया था।
इस इलाके में कोई फ्रिज़ नहीं है और हर मौसम में यहां दूध जमा हुआ मिलता है वो भी लीटर में नहीं मीटर से वो भी नापकर तोड़कर दिया जाता है। यदि इस इलाके में आपको चाय बनाना है तो एक छोटा-सा टुकड़ा दूध का डालना पड़ेगा। यहां पर साफ़ पानी भी टुकड़ों में हिफ़ाजत के साथ रखा जाता है। नहाने के पानी का टुकड़ा अलग और पीने का पानी का टुकड़ा अलग। यहां पर इतनी ठण्ड है कि इसका अनुमान आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां पर यदि पानी को हवा में उछाला दिया जाए तो वह बर्फ के टुकड़े बनकर नीचे गिरता है।
समय से साथ धीरे-धीरे यहां की मूल जाति विलुप्ति की ओर है। लेकिन आधुनिकता के साथ यहां पर बाहर से कुछ लोग ज़रूर आकर बस गए हैं। इन लोगों ने यहां के मूल निवासियों को गर्म रहने का तरीक़ा सीखा दिया है जिसके बाद यहां की मूल जाति के कुछ लोग बचे हुए हैं। इस इलाके में कुछ दुर्लभ मछलियां पाई जाती हैं जो कि माइस 32 डिग्री के तापमान में भी जिंदा रहती हैं,लेकिन धीरे-धीरे अब इनकी प्रजाति पर भी संकट छाने लगा है।