लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का मध्य प्रदेश के लिए ‘मिशन-26’!
Friday - January 4, 2019 2:27 pm ,
Category : WTN HINDI
आम चुनाव में मध्य प्रदेश की 29 में से ‘26’ सीटें जीतने का 'लक्ष्य'
विधानसभा चुनाव में हार के बाद मध्य प्रदेश में ‘सतर्क’ हुई भाजपा; लोकसभा चुनाव के लिए ‘रणनीति’ बनाने जुटी
JAN 04 (WTN) – इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लोकसभा चुनाव के लिए रणनीतियां बनाने में लगे हुए हैं। मध्य प्रदेश समेत तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा अब लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह की कोई भी ग़लती नहीं करना चाहती है इसलिए भाजपा ने हर राज्य के अलग-अलग चुनावी समीकरण देखते हुए सम्बन्धित राज्य के हिसाब के हिसाब से रणनीति बनाना शुरू कर दिया है।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का नारा था; ‘अबकी बार, 200 पार’, लेकिन 200 सीटें तो छोड़िए, भाजपा मध्य प्रदेश में 109 सीटों पर ही सिमट गई। लेकिन फ़िर भी कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश जैसे मजबूत गढ़ पर भाजपा को अभी भी काफ़ी विश्वास है और राज्य की 29 में से 26 सीटों पर जीत का टारगेट भाजपा बना सकती है।
मध्य प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 29 में से 27 सीटों पर जीत का परचम लहराया था। भाजपा को सिर्फ़ दो सीटों, छिन्दवाड़ा और गुना में हार का सामना करना पड़ा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि छिन्दवाड़ा सीट कद्दावर कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का गढ़ है, तो वहीं गुना सीट ज्योतिरादित्य सिंधिया का लोकसभा क्षेत्र है।
लोकसभा चुनाव 2014 के बाद रतलाम-झाबुआ सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने इस सीट पर जीत हासिल की थी, इसके बाद भाजपा की सीटें 27 से घटकर 26 रह गईं थीं। लेकिन इसके बाद भी भाजपा को पूरा विश्वास है कि विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद जनता लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार पर भरोसा करेगी और राज्य की 29 में से 26 सीटों पर वो जीत हासिल कर सकती है।
भाजपा मानकर चल रही है कि कमलनाथ के गढ़ छिन्दवाड़ा और ज्योतिरादित्य सिंधिया के इलाके गुना से जीत हासिल करना मुश्किल है। साथ ही आदिवासी बाहुल्य वाली रतलाम-झाबुआ सीट पर भी जीत हासिल करने के लिए भाजपा को परेशानी हो सकती है। इसलिए कहा जा रहा है कि भाजपा ने मध्य प्रदेश की 29 में से बाकी बचीं 26 सीटों पर जीत का टारगेट बनाया है। जिन 26 सीटों पर भाजपा लोकसभा चुनाव 2019 में जीत का सपना देख रही है, उन सीटों पर भाजपा पूरी रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरना चाहेगी।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की हार भाजपा को बहुत से सीख देकर गई है। भाजपा ने 200 से ज़्यादा सीटों को जीतने का लक्ष्य रखा था लेकिन भाजपा उसके आसपास भी नहीं रही। अब लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को देखना होगा कि आख़िर वो कौन-कौन से ग़लतियां हैं जिसके कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में मिशन-26 यानि कि 29 में से 26 लोकसभा सीटें जीतने के लिए भाजपा राज्य के कुछ सांसदों के टिकट काट सकती है।
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ था जिसमें मध्य प्रदेश की 27 सीटों का महत्वपूर्ण योगदाना शामिल था। यदि भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत हासिल करना चाहती है, तो उसे मध्य प्रदेश की 29 में से कम से कम 25 सीटों पर जीत हासिल करनी ही होगी। मध्य प्रदेश शुरू से ही भाजपा का गढ़ रहा है और इसी कारण भाजपा को यहां पर ज़्यादा से ज़्यादा सीटों पर जीत का विश्वास हो।
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए राज्य की 26 सीटें जीतने का लक्ष्य यदि भाजपा तय करती है, तो देखना होगा कि उसके लिए क्या प्लान भाजपा बनाती है यह देखना दिलचस्प होगा। कहा जा रहा है कि राज्य की जनता का जो गुस्सा राज्य की शिवराज सरकार और केन्द्र की मोदी सरकार के ख़िलाफ़ था वो विधानसभा चुनाव में उतर चुका है, अब इसके बाद मध्य प्रदेश की जनता शांत दिमाग से लोकसभा चुनाव में सोच समझकर वोटिंग करेगी। ऐसे में राज्य की 26 सीटों जीतने के लिए भाजपा को काफ़ी मेहनत करने के साथ-साथ चुनावी रणनीति पर भी ध्यान देना होगा।
JAN 04 (WTN) – इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लोकसभा चुनाव के लिए रणनीतियां बनाने में लगे हुए हैं। मध्य प्रदेश समेत तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा अब लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह की कोई भी ग़लती नहीं करना चाहती है इसलिए भाजपा ने हर राज्य के अलग-अलग चुनावी समीकरण देखते हुए सम्बन्धित राज्य के हिसाब के हिसाब से रणनीति बनाना शुरू कर दिया है।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का नारा था; ‘अबकी बार, 200 पार’, लेकिन 200 सीटें तो छोड़िए, भाजपा मध्य प्रदेश में 109 सीटों पर ही सिमट गई। लेकिन फ़िर भी कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश जैसे मजबूत गढ़ पर भाजपा को अभी भी काफ़ी विश्वास है और राज्य की 29 में से 26 सीटों पर जीत का टारगेट भाजपा बना सकती है।
मध्य प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 29 में से 27 सीटों पर जीत का परचम लहराया था। भाजपा को सिर्फ़ दो सीटों, छिन्दवाड़ा और गुना में हार का सामना करना पड़ा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि छिन्दवाड़ा सीट कद्दावर कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का गढ़ है, तो वहीं गुना सीट ज्योतिरादित्य सिंधिया का लोकसभा क्षेत्र है।
लोकसभा चुनाव 2014 के बाद रतलाम-झाबुआ सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने इस सीट पर जीत हासिल की थी, इसके बाद भाजपा की सीटें 27 से घटकर 26 रह गईं थीं। लेकिन इसके बाद भी भाजपा को पूरा विश्वास है कि विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद जनता लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार पर भरोसा करेगी और राज्य की 29 में से 26 सीटों पर वो जीत हासिल कर सकती है।
भाजपा मानकर चल रही है कि कमलनाथ के गढ़ छिन्दवाड़ा और ज्योतिरादित्य सिंधिया के इलाके गुना से जीत हासिल करना मुश्किल है। साथ ही आदिवासी बाहुल्य वाली रतलाम-झाबुआ सीट पर भी जीत हासिल करने के लिए भाजपा को परेशानी हो सकती है। इसलिए कहा जा रहा है कि भाजपा ने मध्य प्रदेश की 29 में से बाकी बचीं 26 सीटों पर जीत का टारगेट बनाया है। जिन 26 सीटों पर भाजपा लोकसभा चुनाव 2019 में जीत का सपना देख रही है, उन सीटों पर भाजपा पूरी रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरना चाहेगी।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की हार भाजपा को बहुत से सीख देकर गई है। भाजपा ने 200 से ज़्यादा सीटों को जीतने का लक्ष्य रखा था लेकिन भाजपा उसके आसपास भी नहीं रही। अब लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को देखना होगा कि आख़िर वो कौन-कौन से ग़लतियां हैं जिसके कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में मिशन-26 यानि कि 29 में से 26 लोकसभा सीटें जीतने के लिए भाजपा राज्य के कुछ सांसदों के टिकट काट सकती है।
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ था जिसमें मध्य प्रदेश की 27 सीटों का महत्वपूर्ण योगदाना शामिल था। यदि भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत हासिल करना चाहती है, तो उसे मध्य प्रदेश की 29 में से कम से कम 25 सीटों पर जीत हासिल करनी ही होगी। मध्य प्रदेश शुरू से ही भाजपा का गढ़ रहा है और इसी कारण भाजपा को यहां पर ज़्यादा से ज़्यादा सीटों पर जीत का विश्वास हो।
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए राज्य की 26 सीटें जीतने का लक्ष्य यदि भाजपा तय करती है, तो देखना होगा कि उसके लिए क्या प्लान भाजपा बनाती है यह देखना दिलचस्प होगा। कहा जा रहा है कि राज्य की जनता का जो गुस्सा राज्य की शिवराज सरकार और केन्द्र की मोदी सरकार के ख़िलाफ़ था वो विधानसभा चुनाव में उतर चुका है, अब इसके बाद मध्य प्रदेश की जनता शांत दिमाग से लोकसभा चुनाव में सोच समझकर वोटिंग करेगी। ऐसे में राज्य की 26 सीटों जीतने के लिए भाजपा को काफ़ी मेहनत करने के साथ-साथ चुनावी रणनीति पर भी ध्यान देना होगा।