अब मध्य प्रदेश में होगी कांग्रेस की ‘अग्निपरीक्षा’
Saturday - January 5, 2019 12:05 pm ,
Category : WTN HINDI
विधायकों की ‘ख़रीद फरोख़्त’ का कांग्रेस को सता रहा है ‘डर’
कांग्रेस के सामने ‘असंतुष्ट’ विधायकों को ‘एकजुट’ रखना सबसे बड़ी ‘चुनौती’!
JAN 05 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता ने ऐसा जनादेश दिया है कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका है। कांग्रेस 114 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन उसे बहुमत (116) से 2 सीटें कम मिलीं जिसके बाद उसे सरकार बनाने के लिए 4 निर्दलीय विधायकों समेत बसपा के दो और सपा के एक विधायक का सहारा लेना पड़ा। लेकिन मध्य प्रदेश में बहुमत से दूर कांग्रेस के लिए आने वाले समय में कई अग्नि परीक्षाओं से गुजरना पड़ सकता है।
कहने को तो कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में सरकार बना ली, लेकिन मंत्री ना बन पाने से नाराज़ पार्टी के विधायकों समेत निर्दलीय विधायकों और बसपा-सपा के विधायकों को एकजुट रखना कांग्रेस के लिए अब सबसे बड़ी परीक्षा है। कांग्रेस की सबसे पहली परीक्षा स्पीकर के चुनाव के वक़्त होगी। क्योंकि स्पीकर के चुनाव में भाजपा कांग्रेस को वॉक ओवर देने के पक्ष में नहीं हैं और कहा जा रहा है कि भाजपा स्पीकर के चुनाव में अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी।
स्पीकर के चुनाव से लेकर अनुपूरक बजट तक की अग्निपरीक्षाओं में कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखना चाहती है और इसके लिए उसने अपने विधायकों को भोपाल के होटलों में ठहरने के इंतज़ाम किये हैं। कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम से सतर्क कांग्रेस अपने विधायकों पर पैनी नजऱ रख रही है कि वे किससे मिल रहे हैं और किससे चर्चा कर रहे हैं।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस को डर सता रहा है कि भाजपा, कर्नाटक की तरह उनके विधायकों को सरकार के ख़िलाफ़ वोट देने के लिए प्रलोभन दे सकती है, ऐसे में कांग्रेस पूरी सतर्कता के साथ हर कदम उठा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मंत्रिमण्डल गठन के बाद कांग्रेस में साफतौर पर असंतोष फैला है। पार्टी के कई सीनियर विधायक मंत्री ना बनाए जाने से नाराज़ बताए जाते हैं और इसकी शिकायत वे राहुल गांधी से भी कर चुके हैं।
इधर, 2 अप्रैल को हुए भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के मामले में मायावती ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है, मायावती ने बसपा के कार्यकर्ताओं पर दर्ज झूठे मुकादमों को वापस लेने के लिए राज्य सरकार से कहा है और मांग ना माने जाने पर समर्थन वापसी की धमकी दी है। मायावती की चेतावनी के बाद कांग्रेस चिंता में है कि कहीं मायावती समर्थन वापस ना ले ले।
इधर मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा प्रदेश की कांग्रेस सरकार को गिराना चाहती है। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा के कुछ विधायक कांग्रेस विधायकों को खरीदने के लिए रुपए लेकर घूम रहे हैं। मगर कांग्रेस विधायक इतने कमजोर नहीं हैं कि वे बिक जाएं। दिग्विजय सिंह ने यह आरोप एक न्यूज़ चैनल के साथ बातचीत में लगाए हैं।
अब देखना होगा कि कांग्रेस किस तरह से असंतुष्ट चल रहे अपने पार्टी के विधायकों और निर्दलीय विधायकों को एकजुट रख पाती है। वहीं देखना होगा कि मायावती की चेतावनी का क्या उत्तर कांग्रेस देती है। यह तो तय है कि भाजपा कांग्रेस को वॉक ओवर देने के मूड़ में नहीं है और स्पीकर के चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक भाजपा कांग्रेस के सामने मुसीबतें खड़ी करती रहेगी। यानि कि कहा जा सकता है कि आने वाला समय कांग्रेस के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।
JAN 05 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता ने ऐसा जनादेश दिया है कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका है। कांग्रेस 114 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन उसे बहुमत (116) से 2 सीटें कम मिलीं जिसके बाद उसे सरकार बनाने के लिए 4 निर्दलीय विधायकों समेत बसपा के दो और सपा के एक विधायक का सहारा लेना पड़ा। लेकिन मध्य प्रदेश में बहुमत से दूर कांग्रेस के लिए आने वाले समय में कई अग्नि परीक्षाओं से गुजरना पड़ सकता है।
कहने को तो कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में सरकार बना ली, लेकिन मंत्री ना बन पाने से नाराज़ पार्टी के विधायकों समेत निर्दलीय विधायकों और बसपा-सपा के विधायकों को एकजुट रखना कांग्रेस के लिए अब सबसे बड़ी परीक्षा है। कांग्रेस की सबसे पहली परीक्षा स्पीकर के चुनाव के वक़्त होगी। क्योंकि स्पीकर के चुनाव में भाजपा कांग्रेस को वॉक ओवर देने के पक्ष में नहीं हैं और कहा जा रहा है कि भाजपा स्पीकर के चुनाव में अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी।
स्पीकर के चुनाव से लेकर अनुपूरक बजट तक की अग्निपरीक्षाओं में कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखना चाहती है और इसके लिए उसने अपने विधायकों को भोपाल के होटलों में ठहरने के इंतज़ाम किये हैं। कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम से सतर्क कांग्रेस अपने विधायकों पर पैनी नजऱ रख रही है कि वे किससे मिल रहे हैं और किससे चर्चा कर रहे हैं।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस को डर सता रहा है कि भाजपा, कर्नाटक की तरह उनके विधायकों को सरकार के ख़िलाफ़ वोट देने के लिए प्रलोभन दे सकती है, ऐसे में कांग्रेस पूरी सतर्कता के साथ हर कदम उठा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मंत्रिमण्डल गठन के बाद कांग्रेस में साफतौर पर असंतोष फैला है। पार्टी के कई सीनियर विधायक मंत्री ना बनाए जाने से नाराज़ बताए जाते हैं और इसकी शिकायत वे राहुल गांधी से भी कर चुके हैं।
इधर, 2 अप्रैल को हुए भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के मामले में मायावती ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है, मायावती ने बसपा के कार्यकर्ताओं पर दर्ज झूठे मुकादमों को वापस लेने के लिए राज्य सरकार से कहा है और मांग ना माने जाने पर समर्थन वापसी की धमकी दी है। मायावती की चेतावनी के बाद कांग्रेस चिंता में है कि कहीं मायावती समर्थन वापस ना ले ले।
इधर मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा प्रदेश की कांग्रेस सरकार को गिराना चाहती है। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा के कुछ विधायक कांग्रेस विधायकों को खरीदने के लिए रुपए लेकर घूम रहे हैं। मगर कांग्रेस विधायक इतने कमजोर नहीं हैं कि वे बिक जाएं। दिग्विजय सिंह ने यह आरोप एक न्यूज़ चैनल के साथ बातचीत में लगाए हैं।
अब देखना होगा कि कांग्रेस किस तरह से असंतुष्ट चल रहे अपने पार्टी के विधायकों और निर्दलीय विधायकों को एकजुट रख पाती है। वहीं देखना होगा कि मायावती की चेतावनी का क्या उत्तर कांग्रेस देती है। यह तो तय है कि भाजपा कांग्रेस को वॉक ओवर देने के मूड़ में नहीं है और स्पीकर के चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक भाजपा कांग्रेस के सामने मुसीबतें खड़ी करती रहेगी। यानि कि कहा जा सकता है कि आने वाला समय कांग्रेस के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।