मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन दोनों के ‘मुखिया’ रहेंगे कमलनाथ
Tuesday - January 15, 2019 10:25 am ,
Category : WTN HINDI
कमलनाथ पर सत्ता और संगठन की ‘दोहरी’ ज़िम्मेदारी
लोकसभा चुनाव में कमलनाथ से राहुल गांधी को काफ़ी ‘उम्मीदें’
JAN 15 (WTN) – मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद से ही चर्चाओं का दौर जारी था कि अब राज्य में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की कमान किसके हाथों में रहेगी। कई नाम चर्चाओं में थे जिसमें पूर्व मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का नाम सबसे ज़्यादा सुर्खियों में था। कहा जा रहा था कि चुरहट सीट से विधानसभा चुनाव हार चुके अजय सिंह को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
लेकिन खुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने राज्य में अध्यक्ष बदलने की अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। कमलनाथ ने साफ़ कहा है कि अभी राज्य में कांग्रेस का अध्यक्ष बदलने पर कोई विचार नहीं हो रहा है। मीडिया से चर्चा में कमलनाथ ने कहा, “लोकसभा चुनाव के लिए अब बहुत कम वक़्त बचा है, इसलिए संगठन में फिलहाल कोई फेरबदल नहीं किया जा रहा है। अगर ज़रूरी हुआ तो कुछ नयी व्यवस्था की जा सकती है यानि कि काम और ज़िम्मेदारियां बांटी जा सकती हैं, ताकि सब कुछ आसनी से पूरा हो जाए।“
यानि कि साफ़ हो गया है कि लोकसभा चुनाव तक मध्य प्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदलने की कोई भी सम्भावना फ़िलहाल नहीं है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी नहीं चाहेंगे कि लोकसभा चुनाव तक मध्य प्रदेश में पार्टी के अन्दर दो ध्रुव काम करें। क्योंकि यदि ऐसा होता है तो इसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है।
कमलनाथ इस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं, ऐसे में सत्ता और संगठन दोनों की कमान उनके हाथों में है। वैसे भी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मध्य प्रदेश में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो सका है और कांग्रेस के सिर्फ़ 114 विधायक ही जीत हासिल कर सके हैं। कांग्रेस मध्य प्रदेश में बसपा-सपा के साथ निर्दलीय विधायकों की सहायता से सरकार चला रही है।
इस समय कांग्रेस के लिए एक-एक विधायक मायने रखता है, ऐसे में कांग्रेस के केन्द्रीय स्तर के शीर्ष नेता नहीं चाहेंगे कि सत्ता और संगठन के रूप में दो ध्रुव राज्य में काम करें, क्योंकि यदि ऐसा होता है तो इससे लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस चाहेगी कि लोकसभा चुनाव तक कमलनाथ ही सत्ता और संगठन की कमान सम्भालें ताकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को मज़बूत नेतृत्व मिल सके।
कमलनाथ काफ़ी वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में उनसे ज़्यादा अनुभवी कांग्रेस नेता राज्य में नहीं है। कमलनाथ गांधी परिवार के काफ़ी क़रीबी भी हैं, ऐसे में कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने उन पर विश्वास जताते हुए मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन दोनों की कमान उन्हें लोकसभा चुनाव तक सौंपने का फ़ैसला इसलिए लिया हो ताकि राज्य की 29 में से कम से कम 15 सीटों पर जीत हासिल की जा सके।
यदि पिछले लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस को राज्य की 29 में से सिर्फ़ 2 सीटों पर ही जीत हासिल हो सकी थी। ऐसे में राहुल गांधी ने काफ़ी सोच समझकर फ़ैसला लिया है कि लोकसभा चुनाव तक मध्य प्रदेश में कमलनाथ को फ्री हैण्ड दिया जाए जिससे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन कर सके। अब देखना होगा कि कमलनाथ सत्ता और संगठन दोनों के मुखिया होकर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कितना फ़ायदा दिला सकते हैं।
JAN 15 (WTN) – मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद से ही चर्चाओं का दौर जारी था कि अब राज्य में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की कमान किसके हाथों में रहेगी। कई नाम चर्चाओं में थे जिसमें पूर्व मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का नाम सबसे ज़्यादा सुर्खियों में था। कहा जा रहा था कि चुरहट सीट से विधानसभा चुनाव हार चुके अजय सिंह को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
लेकिन खुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने राज्य में अध्यक्ष बदलने की अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। कमलनाथ ने साफ़ कहा है कि अभी राज्य में कांग्रेस का अध्यक्ष बदलने पर कोई विचार नहीं हो रहा है। मीडिया से चर्चा में कमलनाथ ने कहा, “लोकसभा चुनाव के लिए अब बहुत कम वक़्त बचा है, इसलिए संगठन में फिलहाल कोई फेरबदल नहीं किया जा रहा है। अगर ज़रूरी हुआ तो कुछ नयी व्यवस्था की जा सकती है यानि कि काम और ज़िम्मेदारियां बांटी जा सकती हैं, ताकि सब कुछ आसनी से पूरा हो जाए।“
यानि कि साफ़ हो गया है कि लोकसभा चुनाव तक मध्य प्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदलने की कोई भी सम्भावना फ़िलहाल नहीं है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी नहीं चाहेंगे कि लोकसभा चुनाव तक मध्य प्रदेश में पार्टी के अन्दर दो ध्रुव काम करें। क्योंकि यदि ऐसा होता है तो इसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है।
कमलनाथ इस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं, ऐसे में सत्ता और संगठन दोनों की कमान उनके हाथों में है। वैसे भी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मध्य प्रदेश में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो सका है और कांग्रेस के सिर्फ़ 114 विधायक ही जीत हासिल कर सके हैं। कांग्रेस मध्य प्रदेश में बसपा-सपा के साथ निर्दलीय विधायकों की सहायता से सरकार चला रही है।
इस समय कांग्रेस के लिए एक-एक विधायक मायने रखता है, ऐसे में कांग्रेस के केन्द्रीय स्तर के शीर्ष नेता नहीं चाहेंगे कि सत्ता और संगठन के रूप में दो ध्रुव राज्य में काम करें, क्योंकि यदि ऐसा होता है तो इससे लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस चाहेगी कि लोकसभा चुनाव तक कमलनाथ ही सत्ता और संगठन की कमान सम्भालें ताकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को मज़बूत नेतृत्व मिल सके।
कमलनाथ काफ़ी वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में उनसे ज़्यादा अनुभवी कांग्रेस नेता राज्य में नहीं है। कमलनाथ गांधी परिवार के काफ़ी क़रीबी भी हैं, ऐसे में कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने उन पर विश्वास जताते हुए मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन दोनों की कमान उन्हें लोकसभा चुनाव तक सौंपने का फ़ैसला इसलिए लिया हो ताकि राज्य की 29 में से कम से कम 15 सीटों पर जीत हासिल की जा सके।
यदि पिछले लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस को राज्य की 29 में से सिर्फ़ 2 सीटों पर ही जीत हासिल हो सकी थी। ऐसे में राहुल गांधी ने काफ़ी सोच समझकर फ़ैसला लिया है कि लोकसभा चुनाव तक मध्य प्रदेश में कमलनाथ को फ्री हैण्ड दिया जाए जिससे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन कर सके। अब देखना होगा कि कमलनाथ सत्ता और संगठन दोनों के मुखिया होकर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कितना फ़ायदा दिला सकते हैं।