इनकम टैक्स छूट की सीमा दोगुनी कर प्रधानमंत्री मोदी चल सकते हैं ‘मास्टर स्ट्रोक’
Tuesday - January 15, 2019 12:57 pm ,
Category : WTN HINDI
मोदी दे सकते हैं चुनाव के पहले गिफ्ट, 2.5 लाख से 5 लाख रुपये हो सकते है इनकम टैक्स छूट की सीमा!
लोकसभा चुनाव के लिए मोदी सरकार की ‘रणनीति’ से ‘पस्त’ हो सकता है विपक्ष
JAN 15 (WTN) – लोकसभा चुनाव के पहले मोदी सरकार हर वर्ग को खुश करने के तैयारी में है। जीएसटी में कई बदलाव करके जहां मोदी सरकार ने व्यापारियों को खुश करने की कोशिश की है वहीं कहा जा रहा है कि चुनाव की घोषणा से पहले मोदी सरकार किसानों के लिए भी एक बड़ा तोहफ़ा दे सकती है। व्यापारियों और किसानों के बाद अब बचा नौकरीपेशा करने वाला मध्यम वर्ग, तो हो सकता है कि इस बड़े वोट बैंक को खुश करने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली अपने अंतरिम बजट में आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर दोगुना कर सकते हैं।
आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण देकर मोदी सरकार ने जो मास्टर स्ट्रोक खेला था, उसके बाद कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर एक बार फ़िर से विपक्ष को पस्त करने की रणनीति बना रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी फ़िलहाल आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये है। लेकिन हो सकता है कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए और वेतनभोगी मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए आयकर छूट की सीमा को 2.5 लाख रुपए से बढ़कर 5 लाख रुपए किया जा सकता है, साथ ही मेडिकल खर्चों और परिवहन भत्ते को भी फ़िर से बहाल किया जा सकता है।
वर्तमान मोदी सरकार अपने चार पूर्ण बजट पेश कर चुकी है अब जबकि कुछ ही महीनों के बाद चुनाव है इसलिए मोदी सरकार इस बार अंतरिम बजट पेश करेगी, जिसे 1 फरवरी 2019 को वित्त मंत्री अरुण जेटली प्रस्तुत करेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतरिम बजट में हालांकि बहुत ज़्यादा मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता है, लेकिन तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव में हार के बाद कहा जा रहा है कि भाजपा मध्य वर्ग को खुश करने की पूरी कोशिश करेगी।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ सरकारी सूत्रों से उन्हें पता चला है कि इस अंतरिम बजट में करों के स्लैब को सुव्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है, और जो किसी भी स्थिति में आगामी प्रत्यक्ष कर संहिता के अनुसार ही होगी। नई प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड) के दायरे में ज़्यादा से ज़्यादा कर निर्धारती को टैक्स लिमिट में लाने की कोशिश की जाएगी, जिससे अलग-अलग वर्गो के करदाताओं के लिए अधिक न्यायसंगत प्रणाली बनाई जा सके। इसके लिए हो सकता कि कॉर्पोरेट कर में कमी की जाए और व्यवसायों को प्रतिस्पर्धी बनाया जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय 2.5 लाख रुपए तक की वार्षिक आय को निजी आयकर से छूट प्राप्त है, जबकि 2.5 से 5 लाख रुपए के बीच की सालाना इनकम पर 5 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स लगता है। वहीं 5 से 10 लाख रुपये की सालाना आय पर 20 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स लगता है। 10 लाख रुपए से ज़्यादा की सालाना आय पर 30 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स लगता है। वहीं 80 साल से अधिक उम्र के नागरिकों को 5 लाख रुपए तक की सालाना आय पर इनकम टैक्स छूट हासिल है।
वहीं पिछले साल 5 लाख रुपए की वार्षिक आय वालों के लिए सालाना 15,000 रुपए तक के मेडिकल खर्चों और 19,200 रुपए तक के परिवहन भत्तों को हटाकर उसकी जगह 20,000 रुपए की मानक कटौती को लाया गया था। कहा जा रहा है मेडिकल खर्चों औऱ परिवहन भत्तों को फ़िर से बहाल किया जा सकता है।
लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार व्यापारियों और किसानों के साथ-साथ मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोगों को भी खुश करने की पूरी कोशिश में है। कहा जाता है कि मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा वर्ग ही भाजपा का परम्परागत वोट बैंक रहा है, ऐसे में आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद मोदी सरकार यदि इनकम टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करती है, तो लोकसभा चुनाव के पहले इसे मोदी सरकार का बहुत बड़ा मास्टर स्ट्रोक कहा जा सकता है। और यदि ऐसा होता है कि इसका कोई भी जवाब विपक्ष के पास फ़िलहाल नज़र नहीं आ रहा है।
JAN 15 (WTN) – लोकसभा चुनाव के पहले मोदी सरकार हर वर्ग को खुश करने के तैयारी में है। जीएसटी में कई बदलाव करके जहां मोदी सरकार ने व्यापारियों को खुश करने की कोशिश की है वहीं कहा जा रहा है कि चुनाव की घोषणा से पहले मोदी सरकार किसानों के लिए भी एक बड़ा तोहफ़ा दे सकती है। व्यापारियों और किसानों के बाद अब बचा नौकरीपेशा करने वाला मध्यम वर्ग, तो हो सकता है कि इस बड़े वोट बैंक को खुश करने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली अपने अंतरिम बजट में आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर दोगुना कर सकते हैं।
आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण देकर मोदी सरकार ने जो मास्टर स्ट्रोक खेला था, उसके बाद कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर एक बार फ़िर से विपक्ष को पस्त करने की रणनीति बना रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी फ़िलहाल आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये है। लेकिन हो सकता है कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए और वेतनभोगी मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए आयकर छूट की सीमा को 2.5 लाख रुपए से बढ़कर 5 लाख रुपए किया जा सकता है, साथ ही मेडिकल खर्चों और परिवहन भत्ते को भी फ़िर से बहाल किया जा सकता है।
वर्तमान मोदी सरकार अपने चार पूर्ण बजट पेश कर चुकी है अब जबकि कुछ ही महीनों के बाद चुनाव है इसलिए मोदी सरकार इस बार अंतरिम बजट पेश करेगी, जिसे 1 फरवरी 2019 को वित्त मंत्री अरुण जेटली प्रस्तुत करेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतरिम बजट में हालांकि बहुत ज़्यादा मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता है, लेकिन तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव में हार के बाद कहा जा रहा है कि भाजपा मध्य वर्ग को खुश करने की पूरी कोशिश करेगी।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ सरकारी सूत्रों से उन्हें पता चला है कि इस अंतरिम बजट में करों के स्लैब को सुव्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है, और जो किसी भी स्थिति में आगामी प्रत्यक्ष कर संहिता के अनुसार ही होगी। नई प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड) के दायरे में ज़्यादा से ज़्यादा कर निर्धारती को टैक्स लिमिट में लाने की कोशिश की जाएगी, जिससे अलग-अलग वर्गो के करदाताओं के लिए अधिक न्यायसंगत प्रणाली बनाई जा सके। इसके लिए हो सकता कि कॉर्पोरेट कर में कमी की जाए और व्यवसायों को प्रतिस्पर्धी बनाया जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय 2.5 लाख रुपए तक की वार्षिक आय को निजी आयकर से छूट प्राप्त है, जबकि 2.5 से 5 लाख रुपए के बीच की सालाना इनकम पर 5 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स लगता है। वहीं 5 से 10 लाख रुपये की सालाना आय पर 20 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स लगता है। 10 लाख रुपए से ज़्यादा की सालाना आय पर 30 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स लगता है। वहीं 80 साल से अधिक उम्र के नागरिकों को 5 लाख रुपए तक की सालाना आय पर इनकम टैक्स छूट हासिल है।
वहीं पिछले साल 5 लाख रुपए की वार्षिक आय वालों के लिए सालाना 15,000 रुपए तक के मेडिकल खर्चों और 19,200 रुपए तक के परिवहन भत्तों को हटाकर उसकी जगह 20,000 रुपए की मानक कटौती को लाया गया था। कहा जा रहा है मेडिकल खर्चों औऱ परिवहन भत्तों को फ़िर से बहाल किया जा सकता है।
लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार व्यापारियों और किसानों के साथ-साथ मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोगों को भी खुश करने की पूरी कोशिश में है। कहा जाता है कि मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा वर्ग ही भाजपा का परम्परागत वोट बैंक रहा है, ऐसे में आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद मोदी सरकार यदि इनकम टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करती है, तो लोकसभा चुनाव के पहले इसे मोदी सरकार का बहुत बड़ा मास्टर स्ट्रोक कहा जा सकता है। और यदि ऐसा होता है कि इसका कोई भी जवाब विपक्ष के पास फ़िलहाल नज़र नहीं आ रहा है।