वचन पत्र के ‘वादों’ को पूरा करने में जुटी कमलनाथ सरकार
Wednesday - January 16, 2019 11:36 am ,
Category : WTN HINDI
मध्य प्रदेश में जल्द बन सकता है प्रशासनिक सुधार आयोग
प्रशासन में ‘कसावट’ लाने मुख्यमंत्री कमलनाथ की कोशिश; प्रशासनिक सुधार आयोग को दे सकते हैं मंजूरी
JAN 16 (WTN) – मध्य प्रदेश में काफ़ी समय से प्रशासनिक सुधार की बातें की जा रही हैं, लेकिन 15 सालों तक भाजपा की सरकार के समय इस पर कोई ठोस काम ना हो सका। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते नवम्बर, 2016 में प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन को बाक़ायदा मंजूरी मिली थी और इसके नियम और कायदे भी तय हो गये थे, लेकिन किसी कारण से यह आयोग गठित नहीं हो सका था।
राज्य में 15 सालों के बाद सत्ता में वापस आई कांग्रेस अब प्रशासनिक सुधार आयोग बनाने जा रही है। जानकारी के मुताबिक़ कांग्रेस के वचन पत्र में शामिल इस मुद्दे का बाक़ायदा एक प्रस्ताव बनाकर सामान्य प्रशासन विभाग ने इसे मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास अन्तिम फ़ैसले के लिए भेज दिया है।
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने वचन पत्र में कई वादे किया थे, जिसमें से एक वादा था जनता को साफ़ सुथरा प्रशासन देना। कहा जा रहा है कि राज्य की कमलनाथ सरकार लोकसभा चुनाव से पहले अपने वचन पत्र में किये गये वादों को पूरा करने की कोशिश में है।
माना जा रहा है कि वचन पत्र में दिये गये वादों पर काम जल्द से जल्द शुरू करने के पीछे कांग्रेस का मक़सद लोकसभा चुनाव में इसका लाभ उठाना है। इसी कड़ी में कमलनाथ सरकार प्रशासनिक सुधार आयोग को मंजूरी देकर जनता को यह सन्देश देना चाहती है कि वो साफ़-सुथरा प्रशासन देने के लिए संजीदगी से क़दम उठा रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन के बारे में शिवराज सरकार के समय काफ़ी सुगबुगाहट थी। शिवराज सिंह चौहान चाहते थे कि प्रशासन में कसावट हो और इसमें सुधार लाने के लिए विभागों के कामकाज की समीक्षा की जाए जिससे विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके। लेकिन शिवराज सरकार के दौरान प्रशसानिक सुधार आयोग के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अब राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद प्रशासनिक सुधार आयोग की मंजूरी के प्रस्ताव को सामान्य प्रशासन विभाग ने नये मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास अन्तिम फ़ैसले के लिए आगे बढ़ा दिया है। कहा जा रहा है कि कमलनाथ जल्द ही इस पर कोई फ़ैसला ले सकते हैं। क्योंकि कमलनाथ का खुद का मानना है कि राज्य से ग़ैर ज़रूरी विभाग और निगम-मण्डलों को खत्म किये जाने की ज़रूरत है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, प्रशासनिक सुधार आयोग का जो मसौदा तैयार किया गया है कि उसके अनुसार इसमें एक अध्यक्ष और दो सदस्य रहेंगे। अध्यक्ष मुख्य सचिव या अपर मुख्य सचिव स्तर का अधिकारी होगा, जिसे कम से कम 20 सालों का लोक सेवा का अनुभव होना ज़रूरी रहेगा जिसकी नियुक्ति खुद मुख्यमंत्री करेंगे। जबकि कहा जा रहा है कि दो सदस्यों में से एक सदस्य वित्तीय और न्यायिक मामलों का जानकार होगा और दूसरा प्रशासनिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा।
अब देखना होगा कि कितने जल्दी मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन को मंजूरी देते हैं और कब तक इसका गठन हो पाता है। यदि कमलनाथ प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन में कामयाब रहते हैं, तो कहा जा सकता है कि राज्य में प्रशासनिक सुधार के क्षेत्र में यह एक बहुत बड़ा कदम होगा।
क़ाग़ज से बदलकर जबकि काम अब कम्प्यूटर में हो रहे हैं, तो ऐसे में कहा जा रहा है कि संचार के इस युग में जब काम के तरीक़ों में बदलाव हो रहा है तो ऐसे में प्रदेश में प्रशासनिक सुधार की काफ़ी ज़रूरत महसूस की जा रही है ताक़ि जनता को जवाबदेही, पारदर्शी और आधुनिक प्रशासन मिल सके।
JAN 16 (WTN) – मध्य प्रदेश में काफ़ी समय से प्रशासनिक सुधार की बातें की जा रही हैं, लेकिन 15 सालों तक भाजपा की सरकार के समय इस पर कोई ठोस काम ना हो सका। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते नवम्बर, 2016 में प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन को बाक़ायदा मंजूरी मिली थी और इसके नियम और कायदे भी तय हो गये थे, लेकिन किसी कारण से यह आयोग गठित नहीं हो सका था।
राज्य में 15 सालों के बाद सत्ता में वापस आई कांग्रेस अब प्रशासनिक सुधार आयोग बनाने जा रही है। जानकारी के मुताबिक़ कांग्रेस के वचन पत्र में शामिल इस मुद्दे का बाक़ायदा एक प्रस्ताव बनाकर सामान्य प्रशासन विभाग ने इसे मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास अन्तिम फ़ैसले के लिए भेज दिया है।
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने वचन पत्र में कई वादे किया थे, जिसमें से एक वादा था जनता को साफ़ सुथरा प्रशासन देना। कहा जा रहा है कि राज्य की कमलनाथ सरकार लोकसभा चुनाव से पहले अपने वचन पत्र में किये गये वादों को पूरा करने की कोशिश में है।
माना जा रहा है कि वचन पत्र में दिये गये वादों पर काम जल्द से जल्द शुरू करने के पीछे कांग्रेस का मक़सद लोकसभा चुनाव में इसका लाभ उठाना है। इसी कड़ी में कमलनाथ सरकार प्रशासनिक सुधार आयोग को मंजूरी देकर जनता को यह सन्देश देना चाहती है कि वो साफ़-सुथरा प्रशासन देने के लिए संजीदगी से क़दम उठा रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन के बारे में शिवराज सरकार के समय काफ़ी सुगबुगाहट थी। शिवराज सिंह चौहान चाहते थे कि प्रशासन में कसावट हो और इसमें सुधार लाने के लिए विभागों के कामकाज की समीक्षा की जाए जिससे विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके। लेकिन शिवराज सरकार के दौरान प्रशसानिक सुधार आयोग के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अब राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद प्रशासनिक सुधार आयोग की मंजूरी के प्रस्ताव को सामान्य प्रशासन विभाग ने नये मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास अन्तिम फ़ैसले के लिए आगे बढ़ा दिया है। कहा जा रहा है कि कमलनाथ जल्द ही इस पर कोई फ़ैसला ले सकते हैं। क्योंकि कमलनाथ का खुद का मानना है कि राज्य से ग़ैर ज़रूरी विभाग और निगम-मण्डलों को खत्म किये जाने की ज़रूरत है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, प्रशासनिक सुधार आयोग का जो मसौदा तैयार किया गया है कि उसके अनुसार इसमें एक अध्यक्ष और दो सदस्य रहेंगे। अध्यक्ष मुख्य सचिव या अपर मुख्य सचिव स्तर का अधिकारी होगा, जिसे कम से कम 20 सालों का लोक सेवा का अनुभव होना ज़रूरी रहेगा जिसकी नियुक्ति खुद मुख्यमंत्री करेंगे। जबकि कहा जा रहा है कि दो सदस्यों में से एक सदस्य वित्तीय और न्यायिक मामलों का जानकार होगा और दूसरा प्रशासनिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा।
अब देखना होगा कि कितने जल्दी मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन को मंजूरी देते हैं और कब तक इसका गठन हो पाता है। यदि कमलनाथ प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन में कामयाब रहते हैं, तो कहा जा सकता है कि राज्य में प्रशासनिक सुधार के क्षेत्र में यह एक बहुत बड़ा कदम होगा।
क़ाग़ज से बदलकर जबकि काम अब कम्प्यूटर में हो रहे हैं, तो ऐसे में कहा जा रहा है कि संचार के इस युग में जब काम के तरीक़ों में बदलाव हो रहा है तो ऐसे में प्रदेश में प्रशासनिक सुधार की काफ़ी ज़रूरत महसूस की जा रही है ताक़ि जनता को जवाबदेही, पारदर्शी और आधुनिक प्रशासन मिल सके।