नहीं थम रहा दीपक बावरिया और कांग्रेसियों के बीच ‘विवाद’
Tuesday - January 22, 2019 10:35 am ,
Category : WTN HINDI
लोकसभा चुनाव के लिए दीपक बावरिया के फॉर्मूले का ‘विरोध’
दीपक बावरिया के काम करने के तरीक़े के ख़िलाफ़ बढ़ता जा रहा है ‘असंतोष’
JAN 22 (WTN) – कांग्रेस महासचिव और मध्य प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के ख़िलाफ़ राज्य में धीरे-धीरे असंतोष बढ़ता ही जा रहा है। राहुल गांधी के क़रीबी बावरिया समय-समय पर अपने बयानों और राजनीतिक रणनीति को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। ताज़ा विवाद उनके उस बयान के बाद छिड़ा है जिसमें उसमें साफ़ कह दिया है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी उन चेहरों को टिकट नहीं देगी जो 2018 के विधानसभा चुनाव में हार गये हैं।
यह पहली बार नहीं है जब दीपक बावरिया अपने बयानों के कारण चर्चाओं में आए हैं। इससे पहले विधानसभा चुनाव के समय भी उनके कई बयानों और फ़ैसलों के कारण उनकी पार्टी के अन्दर ही उनका काफ़ी विरोध हुआ। सीधी और विदिशा में तो विरोध इतना बढ़ गया था कि दीपक बावरिया के सामने ही मारापीट की नौबत तक आ गई थी।
दरअसल दीपक बावरिया विदेश में थे और राहुल गांधी की सलाह पर भारत आए और कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की, लेकिन हक़ीकत है कि बावरिया की मध्य प्रदेश की धरातल की राजनीति तक पहुंच दूर-दूर तक नहीं है। विधानसभा चुनाव के समय उनके कई फ़ैसलों पर कांग्रेसियों ने जमकर आपत्ति जताई थी, जैसे चुनाव में वृद्ध नेताओं को टिकट नहीं मांगने की सलाह, पदाधिकारियों को पद छोड़ने के बाद टिकट मिलना, सोशन मीडिया ख़ासकर फ़ेसबुक और ट्विटर पर सक्रियता और टिकट के लिए दावेदारों से 50 पचास हज़ार रुपए का आवेदन शुल्क लेना।
अपने ताज़ा बयान, जिस पर जमकर विवाद हो रहा है, उसमें बावरिया ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी उन प्रत्याशियों को टिकट देने से परहेज करेगी जो कि विधानसभा चुनाव 2018 में हार चुके हैं। दरअसल बावरिया का तर्क है कि हारे प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारने से पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अब यदि बावरिया की बात पर कांग्रेस पार्टी अमल करती है, तो विधानसभा चुनाव में हारे कांग्रेस के दिग्गज नेताओं अजय सिंह, अरुण यादव, सुरेश पचौरी और निशंक जैन का चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाएगा।
वैसे बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए जिस फॉर्मूले की बात दीपक बावरिया कर रहे हैं उसका समर्थन प्रदेश के कांग्रेस नेता कतई नहीं करने वाले हैं। वैसे भी लोकसभा चुनाव के लिए किसे टिकट मिलेगा और किसे नहीं, इसका फ़ैसला तो केन्द्रीय स्तर पर ही होगा।
इस सबके बीच, विदिशा ज़िले के एकमात्र कांग्रेस विधायक शशांक भार्गव ने भी सीधे तौर पर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया को आड़े हाथों लिया और कांग्रेसियों की सभा में बावरिया पर जमकर निशाना साधा। शशांक भार्गव ने विदिशा लोकसभा प्रभारी प्रभु सिंह ठाकुर की उपस्थिति में कांग्रेस महासचिव दीपक बावरिया का जमकर विरोध किया। इस दौरान शशांक भार्गव ने कहा कि दीपक बावरिया के कारण ही ज़िले की चार विधानसभा सीटों, बासौदा, सिरोंज, कुरवाई और शमशाबाद में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
भार्गव ने कहा कि बावरिया के प्रत्याशी चयन का फॉर्मूला ही ग़लत था साथ ही ऐन वक़्त पर ज़िला अध्यक्ष बदलने से भी कांग्रेस को नुकसान हुआ और चार सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। दीपक बावरिया के विरोध में विदिशा विधायक शशांक भार्गव यह तक कह गये कि मेहरबानी करके दीपक बावरिया गुजरात वापस चले जाएं, क्योंकि लोकसभा चुनाव में उनका फॉर्मूला नहीं चलेगा।
लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह से कांग्रेस में प्रदेश प्रभारी के ख़िलाफ़ नाराज़गी देखी जा रही है, उससे साफ़ है कि दीपक बावरिया के काम करने के तरीक़ों से कांग्रेसी नाराज़ हैं। पर देखना होगा कि राहुल गांधी के ख़ास बावरिया का विरोध कहीं कांग्रेसियों पर भी भारी ना पड़ जाए। लेकिन हक़ीकत यह है कि जो बातें दीपक बावरिया के विरोध में कांग्रेसी नेता कर रहे हैं उनमें कहीं ना कहीं सच्चाई तो है। खैर देखना होगा कि दीपक बावरिया और अन्य कांग्रेसी नेताओं के बीच चल रहा विवाद ख़त्म होने का नाम लेता है कि नहीं।
JAN 22 (WTN) – कांग्रेस महासचिव और मध्य प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के ख़िलाफ़ राज्य में धीरे-धीरे असंतोष बढ़ता ही जा रहा है। राहुल गांधी के क़रीबी बावरिया समय-समय पर अपने बयानों और राजनीतिक रणनीति को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। ताज़ा विवाद उनके उस बयान के बाद छिड़ा है जिसमें उसमें साफ़ कह दिया है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी उन चेहरों को टिकट नहीं देगी जो 2018 के विधानसभा चुनाव में हार गये हैं।
यह पहली बार नहीं है जब दीपक बावरिया अपने बयानों के कारण चर्चाओं में आए हैं। इससे पहले विधानसभा चुनाव के समय भी उनके कई बयानों और फ़ैसलों के कारण उनकी पार्टी के अन्दर ही उनका काफ़ी विरोध हुआ। सीधी और विदिशा में तो विरोध इतना बढ़ गया था कि दीपक बावरिया के सामने ही मारापीट की नौबत तक आ गई थी।
दरअसल दीपक बावरिया विदेश में थे और राहुल गांधी की सलाह पर भारत आए और कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की, लेकिन हक़ीकत है कि बावरिया की मध्य प्रदेश की धरातल की राजनीति तक पहुंच दूर-दूर तक नहीं है। विधानसभा चुनाव के समय उनके कई फ़ैसलों पर कांग्रेसियों ने जमकर आपत्ति जताई थी, जैसे चुनाव में वृद्ध नेताओं को टिकट नहीं मांगने की सलाह, पदाधिकारियों को पद छोड़ने के बाद टिकट मिलना, सोशन मीडिया ख़ासकर फ़ेसबुक और ट्विटर पर सक्रियता और टिकट के लिए दावेदारों से 50 पचास हज़ार रुपए का आवेदन शुल्क लेना।
अपने ताज़ा बयान, जिस पर जमकर विवाद हो रहा है, उसमें बावरिया ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी उन प्रत्याशियों को टिकट देने से परहेज करेगी जो कि विधानसभा चुनाव 2018 में हार चुके हैं। दरअसल बावरिया का तर्क है कि हारे प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारने से पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अब यदि बावरिया की बात पर कांग्रेस पार्टी अमल करती है, तो विधानसभा चुनाव में हारे कांग्रेस के दिग्गज नेताओं अजय सिंह, अरुण यादव, सुरेश पचौरी और निशंक जैन का चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाएगा।
वैसे बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए जिस फॉर्मूले की बात दीपक बावरिया कर रहे हैं उसका समर्थन प्रदेश के कांग्रेस नेता कतई नहीं करने वाले हैं। वैसे भी लोकसभा चुनाव के लिए किसे टिकट मिलेगा और किसे नहीं, इसका फ़ैसला तो केन्द्रीय स्तर पर ही होगा।
इस सबके बीच, विदिशा ज़िले के एकमात्र कांग्रेस विधायक शशांक भार्गव ने भी सीधे तौर पर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया को आड़े हाथों लिया और कांग्रेसियों की सभा में बावरिया पर जमकर निशाना साधा। शशांक भार्गव ने विदिशा लोकसभा प्रभारी प्रभु सिंह ठाकुर की उपस्थिति में कांग्रेस महासचिव दीपक बावरिया का जमकर विरोध किया। इस दौरान शशांक भार्गव ने कहा कि दीपक बावरिया के कारण ही ज़िले की चार विधानसभा सीटों, बासौदा, सिरोंज, कुरवाई और शमशाबाद में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
भार्गव ने कहा कि बावरिया के प्रत्याशी चयन का फॉर्मूला ही ग़लत था साथ ही ऐन वक़्त पर ज़िला अध्यक्ष बदलने से भी कांग्रेस को नुकसान हुआ और चार सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। दीपक बावरिया के विरोध में विदिशा विधायक शशांक भार्गव यह तक कह गये कि मेहरबानी करके दीपक बावरिया गुजरात वापस चले जाएं, क्योंकि लोकसभा चुनाव में उनका फॉर्मूला नहीं चलेगा।
लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह से कांग्रेस में प्रदेश प्रभारी के ख़िलाफ़ नाराज़गी देखी जा रही है, उससे साफ़ है कि दीपक बावरिया के काम करने के तरीक़ों से कांग्रेसी नाराज़ हैं। पर देखना होगा कि राहुल गांधी के ख़ास बावरिया का विरोध कहीं कांग्रेसियों पर भी भारी ना पड़ जाए। लेकिन हक़ीकत यह है कि जो बातें दीपक बावरिया के विरोध में कांग्रेसी नेता कर रहे हैं उनमें कहीं ना कहीं सच्चाई तो है। खैर देखना होगा कि दीपक बावरिया और अन्य कांग्रेसी नेताओं के बीच चल रहा विवाद ख़त्म होने का नाम लेता है कि नहीं।