आख़िर बसपा क्यों दे रही है मध्य प्रदेश में कर्नाटक की राजनीति का उदाहरण?
Wednesday - January 23, 2019 11:54 am ,
Category : WTN HINDI
बसपा विधायक रमाबाई ने की मंत्री बनाने की मांग
मध्य प्रदेश में अब गठबंधन की राजनीति का ‘गुणा-भाग’
JAN 23 (WTN) – भारतीय राजनीति में सत्ताधारी पार्टी को समर्थन देने का बड़ा महत्व है, और यह महत्व और भी बढ़ जाता है जबकि समर्थन देने वाली पार्टी का एक-एक विधायक मायने रखता हो। कुछ ऐसा ही इन दिनों मध्य प्रदेश में हो रहा है। 15 सालों के बाद राज्य में सत्ता में आई कांग्रेस पार्टी के लिए बसपा के दो विधायकों का समर्थन काफ़ी मायने रखता है। ऐसे में अपने महत्व को जानते हुए दमोह ज़िले की पथरिया सीट से बसपा विधायक रमाबाई ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिये हैं।
मंत्री ना बनाए जाने से नाराज़ बसपा विधायक रामबाई ने कमलनाथ सरकार पर निशाने साधते हुए चेतावनी दी है कि उन्हें और बसपा के एक अन्य विधायक को मंत्रिपरिषद में जल्द शामिल किया जाए। तेजर्रार बसपा विधायक रमा बाई का कहना है कि कांग्रेस ने बसपा सुप्रीमो मायावती की मदद से मध्य प्रदेश में सरकार बनाई है, इसलिए कांग्रेस पार्टी को बसपा के दोनों विधायकों को मंत्री बनाना चाहिए।
बसपा विधायक रमाबाई ने साफ़ किया कि कर्नाटक में गठबंधन की सरकार का हाल सभी देख रहे हैं और वे नहीं चाहती कि वहां जैसी स्थिति यहां पर भी हो, इसलिए यदि बसपा के दोनों विधायकों को मंत्री नहीं बनाया गया तो वो इसका जोरदार तरीक़े से विरोध करेंगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश में विधानसभा की 230 सीटें हैं। हाल में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटों पर जीत दर्ज की लेकिन वो बहुमत के आंकड़े (116) से 2 सीट दूर रह गई। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 109 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए बसपा के 2, सपा के 1 और 4 निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस पार्टी को समर्थन दिया है।
समय-समय पर बसपा विधायक रमाबाई कर्नाटक की राजनीति का उदाहरण मुख्यमंत्री कमलनाथ को दे रही हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि कर्नाटक में भी किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो सका है और वहां पर भी कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन की सरकार चल रही है। सूत्रों के अनुसार कहा जाता है कि समय-समय पर कर्नाटक में भाजपा सत्ता परिवर्तन की पूरी कोशिश में रहती है, ऐसे में मध्य प्रदेश में गठबंधन की सरकार चला रही कांग्रेस सरकार पर भी हर समय संकट छाया रहता है कि कहीं असंतुष्ट विधायकों के दम पर भाजपा सत्ता परिवर्तन करने में कामयाब ना हो जाए इसलिए बसपा विधायक रमाबाई का कहना है कि जल्द से जल्द मुख्यमंत्री कमलनाथ को बसपा विधायकों को मंत्रीपरिषद में शामिल करना चाहिए नहीं तो हो सकता है कि भाजपा यहां पर भी सत्ता परिवर्तन के लिए की कोशिश करे।
वैसे बसपा विधायक रमाबाई की मुख्यमंत्री कमलनाथ को दी गई चेतावनी एक सोची समझी रणनीति भी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि मायावती ने कुछ दिनों पहले राज्य की कमलनाथ सककार से मांग की थी कि 2 अप्रैल को हुए एससी-एसटी एक्ट संशोधन के विरोध में जो आंदोलन हुए थे, उसमें बसपा कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ दर्ज झूठे मुकदमों को वापस लिया जाए। अब अपनी मांग को मंगवाने के लिए हो सकता है कि मायावती के कहने पर ही विधायक रमाबाई समय-समय पर मुख्यमंत्री कमलनाथ को समर्थन वापसी की धमकी देती रहती हैं।
JAN 23 (WTN) – भारतीय राजनीति में सत्ताधारी पार्टी को समर्थन देने का बड़ा महत्व है, और यह महत्व और भी बढ़ जाता है जबकि समर्थन देने वाली पार्टी का एक-एक विधायक मायने रखता हो। कुछ ऐसा ही इन दिनों मध्य प्रदेश में हो रहा है। 15 सालों के बाद राज्य में सत्ता में आई कांग्रेस पार्टी के लिए बसपा के दो विधायकों का समर्थन काफ़ी मायने रखता है। ऐसे में अपने महत्व को जानते हुए दमोह ज़िले की पथरिया सीट से बसपा विधायक रमाबाई ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिये हैं।
मंत्री ना बनाए जाने से नाराज़ बसपा विधायक रामबाई ने कमलनाथ सरकार पर निशाने साधते हुए चेतावनी दी है कि उन्हें और बसपा के एक अन्य विधायक को मंत्रिपरिषद में जल्द शामिल किया जाए। तेजर्रार बसपा विधायक रमा बाई का कहना है कि कांग्रेस ने बसपा सुप्रीमो मायावती की मदद से मध्य प्रदेश में सरकार बनाई है, इसलिए कांग्रेस पार्टी को बसपा के दोनों विधायकों को मंत्री बनाना चाहिए।
बसपा विधायक रमाबाई ने साफ़ किया कि कर्नाटक में गठबंधन की सरकार का हाल सभी देख रहे हैं और वे नहीं चाहती कि वहां जैसी स्थिति यहां पर भी हो, इसलिए यदि बसपा के दोनों विधायकों को मंत्री नहीं बनाया गया तो वो इसका जोरदार तरीक़े से विरोध करेंगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश में विधानसभा की 230 सीटें हैं। हाल में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटों पर जीत दर्ज की लेकिन वो बहुमत के आंकड़े (116) से 2 सीट दूर रह गई। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 109 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए बसपा के 2, सपा के 1 और 4 निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस पार्टी को समर्थन दिया है।
समय-समय पर बसपा विधायक रमाबाई कर्नाटक की राजनीति का उदाहरण मुख्यमंत्री कमलनाथ को दे रही हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि कर्नाटक में भी किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो सका है और वहां पर भी कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन की सरकार चल रही है। सूत्रों के अनुसार कहा जाता है कि समय-समय पर कर्नाटक में भाजपा सत्ता परिवर्तन की पूरी कोशिश में रहती है, ऐसे में मध्य प्रदेश में गठबंधन की सरकार चला रही कांग्रेस सरकार पर भी हर समय संकट छाया रहता है कि कहीं असंतुष्ट विधायकों के दम पर भाजपा सत्ता परिवर्तन करने में कामयाब ना हो जाए इसलिए बसपा विधायक रमाबाई का कहना है कि जल्द से जल्द मुख्यमंत्री कमलनाथ को बसपा विधायकों को मंत्रीपरिषद में शामिल करना चाहिए नहीं तो हो सकता है कि भाजपा यहां पर भी सत्ता परिवर्तन के लिए की कोशिश करे।
वैसे बसपा विधायक रमाबाई की मुख्यमंत्री कमलनाथ को दी गई चेतावनी एक सोची समझी रणनीति भी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि मायावती ने कुछ दिनों पहले राज्य की कमलनाथ सककार से मांग की थी कि 2 अप्रैल को हुए एससी-एसटी एक्ट संशोधन के विरोध में जो आंदोलन हुए थे, उसमें बसपा कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ दर्ज झूठे मुकदमों को वापस लिया जाए। अब अपनी मांग को मंगवाने के लिए हो सकता है कि मायावती के कहने पर ही विधायक रमाबाई समय-समय पर मुख्यमंत्री कमलनाथ को समर्थन वापसी की धमकी देती रहती हैं।