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भानपुर खंती: बीमार होते लोग, खराब होते खेत लेकिन ‘बेफिक्र’ प्रशासन!

Thursday - January 24, 2019 10:32 am , Category : WTN HINDI
‘भयावह’ साबित हो रही है भानपुर खंती; आसपास रहने वाला लगभग हर व्यक्ति ‘बीमार’
‘भयावह’ साबित हो रही है भानपुर खंती; आसपास रहने वाला लगभग हर व्यक्ति ‘बीमार’

बड़ा सवाल: आख़िर कब निजात मिलेगी भानपुर खंती के गंदगी से?
 
JAN 24 (WTN) – किसी भी शहर की खूबसूरती वहां की साफ सफाई से पता चल जाती है। लेकिन भोपाल शहर का दुर्भाग्य तो देखिए कि बीना-विदिशा से ट्रेन और सड़क रूट से भोपाल आते समय सबसे पहले नज़र आते हैं तो कचरे के बड़े-बड़े पहाड़। कचरे के इन पहाड़ों के पास से जो भी निकलता है, बदबू के कारण उसका बुरा हाल होना स्वाभाविक है। लेकिन कल्पना कीजिए उन लोगों कि जो कि सालों से इन कचरा पहाड़ों के बीच में जिन्दगी जीने को मजबूर हैं।

भोपाल में जिस जगह पर ये कचरा पहाड़ हैं उसे भानपुर खंती कहा जाता। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अकेले भोपाल शहर से हर दिन क़रीब 750 टन कचरा निकलता है और इस कचरे में से अधिकांश को 35 एकड़ में फैली इसी भानपुर खंती में डम्प किया जाता है। लेकिन यही कचरा वहां आसपास रहने वाले लोगों के लिए बहुत बड़ा खतरा है।

एक सर्वे के मुताबिक़ भानपुर खंती के पास रहने वाल लोग इस खंती के कारण किसी ना किसी बीमारी का शिकार हैं। खंती के कारण आसपास रहने वाले लोगों को सांस की बीमारी, शारीरिक कमजोरी, आंखों की कमजोरी, हड्डी के गलने जैसी परेशानी और महिलाओं को प्रसव सम्बन्धित दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं खंती के आसपास से गुजरने वाले हज़ारों लोगों को रोज बदबू का सामना करना पड़ता है।
 
वहीं खंती से उठने वाले धुएं से पशु पक्षियों के साथ-साथ आसपास के खेतों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। भानपुर खंती के पास स्थित खेतों के किसानों का कहना है कि खंती में डम्प होने वाली प्लास्टिक की पन्नियो के कारण उनके खेत बर्बाद हो गये हैं। खंती का कचरा उड़कर उनके खेतों में आता है जिसके कारण अब जमीन बंजर सी हो गई है।
 
इधर वैज्ञानिकों के मुताबिक़ 35 एकड़ में फैली भानुपर खंती के नीचे लाखों टन कचरा दबा पड़ा है जिसके कारण यहां पर भारी तादात में मीथेन गैस का भण्डार हो गया है। जैसा कि आप जानते हैं कि मिथेन गैस ज्वलनशील होती है, अब यदि गर्मियों के दिनों में इस खंती में यदि आग गई तो इस आग के कारण काफ़ी नुकसान होने की आशंका है क्योंकि पास से ही भोपाल-दिल्ली रेल लाइन निकली हुई है। लेकिन इतना बड़ा खतरा होने के बाद भी शासन-प्रशासन जानकारी होने के बाद भी इस खंती को शिफ्ट करने के लिए वो प्रयास नहीं कर रहा है जो उसे करना चाहिए।
 
जब शासन-प्रशासन ने भानपुर खंती की कोई सुध नहीं ली तो शिकायतों को दौर चला जिसके बाद एनजीटी के निर्देश के बाद भानपुर खंती को शिफ्ट करने का फ़ैसला लिया गया। सालों से भानपुर खंती एक समस्या के रूप में सामने खड़ी है लेकिन इस समस्या के निराकरण के लिए प्रयास नाकाफी ही कहे जा सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भानपुर खंती में गार्डन बनाने की योजना भी फेल साबित होती दिख रही है।
 
लोगों का आरोप है कि भानपुर की क़रीब 34 एकड़ ज़मीन को विकसित करने में भोपाल नगर निगम असफल साबित हुआ है। जानकारी के मुताबिक़ केन्द्र के चौथे स्वच्छता सर्वे में शहर की किसी एक कचरा खंती को विकसित करके उसे गार्डन बनाना है, लेकिन ऐसा अभी तक हो ना सका। जहां भोपाल इस मामले में फिसड्डी रहा वहीं इन्दौर, जबलपुर और उज्जैन जैसे शहरों ने इस मामले में बाजी मार ली।
 
इन शहरों में स्वच्छता अभियान के चौथे सर्वे से पहले ही कचरा खंतियों का बेहतर तरीक़े से वैज्ञानिक निष्पादन कर यहां पर गार्डन बनाने का काम पूरा हो चुका है।अब इतना सब होने के बाद भोपाल नगर निगम भानपुर खंती के बारे कोई ठोस काम कर रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भोपाल नगर निगम ने 52.38 करोड़ रुपयों में सौराष्ट्र एनवॉयरो कम्पनी को भानपुर खंती का कचरा साफ़ करने का ठेका दिया है। यह कम्पनी भानपुर खंती की 34 एकड़ जम़ीन में से 21 एकड़ ज़मीन को पांच सालों में साफ़ करके देगी। वहीं बाकी बची 13 एकड़ ज़मीन पर ठोस अपशिष्ट कचरा प्रबंधन के तहत नष्ट ना किये जाने वाले कचरे के लिए केम्पिंग साइट बनाई जाएगी।  
 
इधर जानकारी के अनुसार भोपाल नगर निगम भानपुर खंती के कचरे को बेंचकर भी पैसा कमाने जा रहा है। इसके लिए बाकायदा बेचने वाले कचरे को अलग किया जाएगा और बाकी बचे कचरे से बिजली बनाई जाएगी। खैर इन सभी योजनाओं पर कितना अमल हो पाता है इसका पता तो आने पर समय में ही चलेगा, लेकिन यदि समय रहते भानपुर खंती के कचरे के निराकरण के लिए ठोस पहल नहीं की गई तो इसके आसपास रहने वाले लोगों को लिए यह खंती दिनों दिनों एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है।