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कमलनाथ सरकार का कर्मचारियों को ‘तोहफ़ा’

Thursday - January 24, 2019 12:18 pm , Category : WTN HINDI
लोकसभा चुनाव के लिए कमलनाथ की ‘रणनीति’
लोकसभा चुनाव के लिए कमलनाथ की ‘रणनीति’

पिछली सरकारों की ग़लतियों से मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लिया सबक; कर्मचारियों को ‘खुश’ करने की कवायद

JAN 24 (WTN) – लोकसभा चुनाव के पहले मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार हर वर्ग को खुश करने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि आम चुनाव में राज्य की ज़्यादा से ज़्यादा सीटों पर जीत हासिल की जा सके। किसानों की कर्ज़माफ़ी को कमलनाथ सरकार का एक बहुत बड़ा फ़ैसला कहा जा सकता है। किसानों को खुश करने के बाद कमलनाथ सरकार अब प्रदेश के कर्मचारियों को खुश करने की कवायद कर रही है।
 
इसी कड़ी में राज्य के गृहमंत्री बाला बच्चन ने कर्मचारियों को राहत देते हुए घोषणा की है कि कर्मचारियों पर दर्ज सारे मामले वापस लिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के तहत 90 प्रतिशत भत्ता दिया जाएगा और इसको लोकसभा चुनाव से पहले पूरा किया जाएगा।

राज्य की कांग्रेस सरकार इन दिनों कई ऐसे फ़ैसले ले रही है जिसे साफ़तौर पर राजनीति से प्रेरित माना जा सकता है। कमलनाथ सरकार ने भाजपा सरकार के दौरान कांग्रेस नेताओं पर राजनीति से प्रेरित दर्ज किए गए सारे केस वापस लेने की घोषणा की है। इतना ही नहीं कमलनाथ सरकार ने यह भी घोषणा की थी कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध के दौरान जितने भी राजनीतिक केस दर्ज हुए थे वे सभी निरस्त किए जाएंगे।
 
कमलनाथ सरकार जानती है कि लोकसभा चुनाव में यदि जीत हासिल करना है तो सभी वर्गों को खुश करना काफ़ी ज़रूरी है। ऐसे में किसानों को विधानसभा चुनाव के दौरान दिया गया वचन पूरा करने के बाद कमलनाथ सरकार अब कर्मचारियों को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है। कहा जाता है कि शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते आखिरी समय में कर्मचारी सरकार से नाराज़ हो गये थे और विधानसभा चुनाव में बैलेट मतपत्र में साफ़तौर पर दिखा था कि कर्मचारियों ने खुलकर भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ वोट डाले थे।
 
राजनीति के माहिर खिलाड़ी कमलनाथ जानते हैं कि कर्मचारियों को खुश करना काफ़ी ज़रूरी है तभी चुनावों में जीत हासिल की जा सकती है, इसलिए उन्होंने कर्मचारियों पर दर्ज सारे मामले वापस लेना का फ़ैसला लिया है। जैसा कि आप जानते हैं कि कर्मचारियों की नाराज़गी का परिणाम दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह चौहान दोनों को ही भुगतना पड़ा है। अब देखना होगा कि कर्मचारी वर्ग जिसे कि मध्यम वर्ग कहा जाता है और जो भाजपा का परम्परागत वोट बैंक माना गया है, वो मुख्यमंत्री कमलनाथ का साथ लोकसभा चुनाव में देता है कि नहीं।