भोपाल गैसकाण्ड की सुधारात्मक याचिका पर अब अप्रैल में होगी सुनवाई
Tuesday - January 29, 2019 11:49 am ,
Category : WTN HINDI
डॉव केमिकल्स से मांगी गई है अतिरिक्त सहायता राशि
उचित मुआवजे और बेहतर इलाज के लिए अभी भी जारी है भोपाल गैस पीड़ितों का संघर्ष
JAN 29 (WTN) – विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी यानि कि 1984 में हुए भोपाल गैस कांड के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए यूनियन कार्बाइड की उत्तराधिकारी कम्पनी से 7,844 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मांगने सम्बन्धित केन्द्र की याचिका पर अब अप्रैल में सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि वह पीड़ितों की मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार की सुधारात्मक याचिका पर अप्रैल के महीने में सुनवाई करेगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र सरकार ने भोपाल गैस काण्ड के पीड़ितों को अधिक मुआवजा देने के लिए पहले से प्राप्त 47 करोड़ अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त, 7,844 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग अब अमेरिकी कम्पनी डॉव कैमिकल्स से की है। कम्पनी ने पहले पीडि़तों के लिए मुआवजा के तौर पर 715 करोड़ रुपये दिए थे। इधर केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मुआवजे के लिए अतिरिक्त धन के लिए कम्पनियों को निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
इधर भोपाल गैसकाण्ड से पीडि़त उचित मुआवजे और बेहतर इलाज के लिए सालों से संघर्ष कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार ने कम्पनी से अधिक मुआवजे के लिए साल 2010 में सुधारात्मक याचिका दायर की थी। वहीं इधर पीडि़त भी सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को अपने हस्ताक्षर के साथ याचिका भेजने की तैयारी में थे।

जैसा कि आप जानते हैं कि साल 1984 में हुए भोपाल गैसकाण्ड में मिथाइल आइसोसायनेट गैस के रिसाव के कारण क़रीब 3,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। वहीं हवा में फैली इस जहरीली गैस के कारण कई लोगों को आज तक शारीरिक और मानसिक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। एक जांच के मुताबिक जहरीली गैस का असर इतना खतरनाक था कि यूनियन कार्बाइड कम्पनी के पास स्थित जमीन का पानी तक पीने योग्य नहीं बचा है।
साल 2006 में तत्कालीन प्रदेश सरकार के एक शपथ पत्र में यह कबूल किया था कि भोपाल शहर के लगभग 5 लाख 20 हजार लोग इस जहरीली गैस से सीधे रूप से प्रभावित हुए थे। समय-समय पर गैस पीड़ितों को और अधिक मुआवजे की मांग होती रही है, लेकिन ना तो पीड़ितों को उचित मुआवजा मिला और ना ही सही इलाज।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2010 में भोपाल की एक अदालत ने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के सात अधिकारियों को दो-दो साल कैद की सुनाई थी। वैसे इस मामले में यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन का चेयरमैन वारेन एंडरसन मुख्य आरोपी था, लेकिन वह कभी पकड़ा नहीं जा सका। फरवरी, 1992 में भोपाल की सीजेएम कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित किया था और अदालत से उसके ख़िलाफ़ दो बार गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था, लेकिन सितम्बर, 2014 में उसकी मौत हो गई।
JAN 29 (WTN) – विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी यानि कि 1984 में हुए भोपाल गैस कांड के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए यूनियन कार्बाइड की उत्तराधिकारी कम्पनी से 7,844 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मांगने सम्बन्धित केन्द्र की याचिका पर अब अप्रैल में सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि वह पीड़ितों की मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार की सुधारात्मक याचिका पर अप्रैल के महीने में सुनवाई करेगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र सरकार ने भोपाल गैस काण्ड के पीड़ितों को अधिक मुआवजा देने के लिए पहले से प्राप्त 47 करोड़ अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त, 7,844 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग अब अमेरिकी कम्पनी डॉव कैमिकल्स से की है। कम्पनी ने पहले पीडि़तों के लिए मुआवजा के तौर पर 715 करोड़ रुपये दिए थे। इधर केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मुआवजे के लिए अतिरिक्त धन के लिए कम्पनियों को निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
इधर भोपाल गैसकाण्ड से पीडि़त उचित मुआवजे और बेहतर इलाज के लिए सालों से संघर्ष कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार ने कम्पनी से अधिक मुआवजे के लिए साल 2010 में सुधारात्मक याचिका दायर की थी। वहीं इधर पीडि़त भी सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को अपने हस्ताक्षर के साथ याचिका भेजने की तैयारी में थे।

जैसा कि आप जानते हैं कि साल 1984 में हुए भोपाल गैसकाण्ड में मिथाइल आइसोसायनेट गैस के रिसाव के कारण क़रीब 3,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। वहीं हवा में फैली इस जहरीली गैस के कारण कई लोगों को आज तक शारीरिक और मानसिक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। एक जांच के मुताबिक जहरीली गैस का असर इतना खतरनाक था कि यूनियन कार्बाइड कम्पनी के पास स्थित जमीन का पानी तक पीने योग्य नहीं बचा है।
साल 2006 में तत्कालीन प्रदेश सरकार के एक शपथ पत्र में यह कबूल किया था कि भोपाल शहर के लगभग 5 लाख 20 हजार लोग इस जहरीली गैस से सीधे रूप से प्रभावित हुए थे। समय-समय पर गैस पीड़ितों को और अधिक मुआवजे की मांग होती रही है, लेकिन ना तो पीड़ितों को उचित मुआवजा मिला और ना ही सही इलाज।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2010 में भोपाल की एक अदालत ने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के सात अधिकारियों को दो-दो साल कैद की सुनाई थी। वैसे इस मामले में यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन का चेयरमैन वारेन एंडरसन मुख्य आरोपी था, लेकिन वह कभी पकड़ा नहीं जा सका। फरवरी, 1992 में भोपाल की सीजेएम कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित किया था और अदालत से उसके ख़िलाफ़ दो बार गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था, लेकिन सितम्बर, 2014 में उसकी मौत हो गई।