‘बदले-बदले’ से नज़र आए बाबूलाल गौर!
Thursday - January 31, 2019 11:01 am ,
Category : WTN HINDI
बाबूलाल गौर ने भाजपा के प्रति जताई अपनी ‘आस्था’
नाराज़ चल रहे बाबूलाल गौर को ‘फिलहाल’ मनाने में ‘सफ़ल’ रही भाजपा
JAN 31 (WTN) – पिछले काफ़ी समय से भाजपा के प्रति बगावती तेवर दिखाने वाले बाबूलाल गौर अब बदले-बदले से नज़र आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से पहले नाराज़गी दिखाने और अभी हाल ही में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की बात कहने वाले गौर के भाजपा के प्रति बगावती सुर अब बदल गये हैं। सालों तक भोपाल की गोविन्दपुरा सीट से विधायक रहे गौर का अब कहना है कि वे भाजपा के हैं और भाजपा के ही रहेंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काफ़ी समय से बाबूलाल गौर भाजपा से बगावती तेवर अपनाए हुए हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके गौर तभी से भाजपा से नाराज़ बताए जाते हैं जब से उन्हें शिवराज मंत्रिमण्डल से यह कहकर बाहर कर दिया गया था कि उनकी उम्र 75 के पार हो चुकी है। शिवराज मंत्रिमण्डल से हटाए जाने के बाद से लगातार बाबूलाल गौर शिवराज सरकार की नीतियों और कामकाज के तरीकों पर प्रहार करते रहे थे।
हाल ही में विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय गौर ने साफ़-साफ़ कह दिया था कि यदि उन्हें या फ़िर उनकी बहू को विधानसभा का टिकट नहीं मिला, तो वे या तो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे या फ़िर कांग्रेस के टिकट पर। गौर के बगावती तेवरों को देखते हुए भाजपा ने विधानसभा चुनाव में उनकी बहू कृष्णा गौर को टिकट देकर उस समय तो गौर के तेवरों को शांत कर दिया था, लेकिन पिछले सप्ताह अचानक गौर के सुर बदले और उन्होंने भाजपा पर खुद की अनदेखी का आरोप लगा दिया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गौर से मिलने उनके घर गये थे और उन्हें कांग्रेस के टिकट पर भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऑफ़र तक दे दिया था। इसके बाद गौर ने मीडिया से चर्चा के दौरान भाजपा संगठन पर जमकर निशाना साधा था और आरोप लगाया था कि वे ही नहीं बल्कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी ने दरकिनार कर दिया जिसका नतीजा भाजपा को विधानसभा चुनाव में हार के रूप में देखना पड़ा।
उम्र के इस पड़ाव में भी राजनीति में सक्रिय गौर से मिलने भाजपा के कई असंतुष्ट नेता पहुंचे थे जिसके बाद भाजपा संगठन ने गौर को सीरियस लेना शुरू कर दिया। विधानसभा चुनाव में खुद की असफल रणनीति और ग़लत टिकट वितरण के कारण हार का सामना करने वाली भाजपा ने अब गौर को मनाना शुरू कर दिया है।
इसी कड़ी में बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल और बाबूलाल गौर के बीच मुलाक़ात हुई। इस मुलाक़ात का यह असर रहा है कि बाबूलला गौर के बगावती तेवर कुछ नरम पड़े और उन्होंने कहा कि वे भाजपा में हैं और भाजपा के सिवा कहीं और नहीं जाएंगे। साथ ही गौर ने कहा कि उनकी भाजपा से किसी भी तरह की कोई भी नाराज़गी नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बाबूलाल गौर और रामलाल के बीच क़रीब एक घण्टे तक बंद कमरे में बातचीत हुई जिसके बाद गौर के सुर बदले-बदले से नज़र आए। कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा इस नतीजे पर पहुंची होगी कि यदि लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना है तो पार्टी को वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना ही होगा, नहीं तो जो रणनीतिक भूल विधानसभा चुनाव में हुई है यदि वही भूल लोकसभा चुनाव में दोहराई गई, तो भाजपा को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
JAN 31 (WTN) – पिछले काफ़ी समय से भाजपा के प्रति बगावती तेवर दिखाने वाले बाबूलाल गौर अब बदले-बदले से नज़र आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से पहले नाराज़गी दिखाने और अभी हाल ही में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की बात कहने वाले गौर के भाजपा के प्रति बगावती सुर अब बदल गये हैं। सालों तक भोपाल की गोविन्दपुरा सीट से विधायक रहे गौर का अब कहना है कि वे भाजपा के हैं और भाजपा के ही रहेंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काफ़ी समय से बाबूलाल गौर भाजपा से बगावती तेवर अपनाए हुए हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके गौर तभी से भाजपा से नाराज़ बताए जाते हैं जब से उन्हें शिवराज मंत्रिमण्डल से यह कहकर बाहर कर दिया गया था कि उनकी उम्र 75 के पार हो चुकी है। शिवराज मंत्रिमण्डल से हटाए जाने के बाद से लगातार बाबूलाल गौर शिवराज सरकार की नीतियों और कामकाज के तरीकों पर प्रहार करते रहे थे।
हाल ही में विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय गौर ने साफ़-साफ़ कह दिया था कि यदि उन्हें या फ़िर उनकी बहू को विधानसभा का टिकट नहीं मिला, तो वे या तो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे या फ़िर कांग्रेस के टिकट पर। गौर के बगावती तेवरों को देखते हुए भाजपा ने विधानसभा चुनाव में उनकी बहू कृष्णा गौर को टिकट देकर उस समय तो गौर के तेवरों को शांत कर दिया था, लेकिन पिछले सप्ताह अचानक गौर के सुर बदले और उन्होंने भाजपा पर खुद की अनदेखी का आरोप लगा दिया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गौर से मिलने उनके घर गये थे और उन्हें कांग्रेस के टिकट पर भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऑफ़र तक दे दिया था। इसके बाद गौर ने मीडिया से चर्चा के दौरान भाजपा संगठन पर जमकर निशाना साधा था और आरोप लगाया था कि वे ही नहीं बल्कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी ने दरकिनार कर दिया जिसका नतीजा भाजपा को विधानसभा चुनाव में हार के रूप में देखना पड़ा।
उम्र के इस पड़ाव में भी राजनीति में सक्रिय गौर से मिलने भाजपा के कई असंतुष्ट नेता पहुंचे थे जिसके बाद भाजपा संगठन ने गौर को सीरियस लेना शुरू कर दिया। विधानसभा चुनाव में खुद की असफल रणनीति और ग़लत टिकट वितरण के कारण हार का सामना करने वाली भाजपा ने अब गौर को मनाना शुरू कर दिया है।
इसी कड़ी में बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल और बाबूलाल गौर के बीच मुलाक़ात हुई। इस मुलाक़ात का यह असर रहा है कि बाबूलला गौर के बगावती तेवर कुछ नरम पड़े और उन्होंने कहा कि वे भाजपा में हैं और भाजपा के सिवा कहीं और नहीं जाएंगे। साथ ही गौर ने कहा कि उनकी भाजपा से किसी भी तरह की कोई भी नाराज़गी नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बाबूलाल गौर और रामलाल के बीच क़रीब एक घण्टे तक बंद कमरे में बातचीत हुई जिसके बाद गौर के सुर बदले-बदले से नज़र आए। कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा इस नतीजे पर पहुंची होगी कि यदि लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना है तो पार्टी को वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना ही होगा, नहीं तो जो रणनीतिक भूल विधानसभा चुनाव में हुई है यदि वही भूल लोकसभा चुनाव में दोहराई गई, तो भाजपा को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ सकता है।