जानिए कौन हैं आईपीएस राजीव कुमार जिनको लेकर मचा है बवाल?
Monday - February 4, 2019 12:04 pm ,
Category : WTN HINDI
सीबीआई और केन्द्र सरकार के ‘ख़िलाफ़’ आईं ममता बनर्जी
अपने ‘चहेते’ आईपीएस अधिकारी को 'बचाने' ममता बनर्जी ने ली केन्द्र सरकार और सीबीआई से ‘टक्कर’!
FEB 04 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि सारदा चिटफंड और रोज वैली मामले को लेकर सीबीआई और पश्चिम बंगाल की ममला बनर्जी सरकार आमने-सामने हैं। सीबीआई सारदा चिटफंड मामले को लेकर कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने कोलकाता गई थी, लेकिन सीबीआई टीम के अधिकारियों को कोलकाता पुलिस ने अरेस्ट कर लिया थी। सीबीआई अधिकारियों के अरेस्ट होने के बाद एकाएक देश का राजनीतिक माहौल काफ़ी गरमा गया था जिसके बाद विवाद बढ़ता देख कोलकाता पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को छोड़ दिया था।
कल रात से सीबीआई और ममता बनर्जी सरकार के बीच वर्चस्व की लड़ाई का खेल जारी है। इस सबके बीच कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी ने अपने एक पुलिस अधिकारी को बचाने के लिए सीधे-सीधे सीबीआई या फ़िर कहें कि केन्द्र सरकार से टक्कर ली है। आख़िर आप भी जानने चाहेंगे कि वो पुलिस अधिकारी राजीव कुमार कौन हैं जिनके साथ ममता बनर्जी खड़ीं हैं और उन्होंने जिसके लिए केन्द्र सरकार से सीधे टक्कर ले ली?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार 1989 बैच के बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफ़ी नजदीकी माना जाता है। आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार यूपी के चंदौसी के रहने वाले हैं और पहले उन्हें यूपी कैडर आवंटित हुआ था, लेकिन बाद में राजीव कुमार पश्चिम बंगाल कैडर में चले गये।
आरोप है कि सारदा चिट फंड घोटाला पश्चिम बंगाल का एक बड़ा घोटाला है। कहा जाता है कि इस घोटाले में कई बड़े-बड़े नाम शामिल हैं। आप जानना चाहेंगे कि आख़िर सारदा चिटफंड घोटाला क्या है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आरोप है कि सारदा चिटफंड कम्पनी ने पश्चिम बंगाल में आम लोगों को कई लुभावने ऑफ़र दिए थे लेकिन उनके साथ ठगी कर ली। कहा जाता है कि इस कम्पनी ने लोगों से कहा था कि इसमें निवेश करने पर उन्हें कम्पनी की तरफ़ से 34 गुना रकम दी जाएगी। लेकिन लोगों का आरोप है कि उनके साथ कम्पनी ने धोखा किया और उन्हें कोई फ़ायदा नहीं हुआ। कथित तौर पर यह घोटाला 3,000 करोड़ रुपयों का कहा जाता है और इस घोटाले का खुलासा अप्रैल, 2013 में हुआ था।
इसी सारदा चिटफंड घोटाल में आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार पर जांच चल रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस अधिकारी राजीव कुमार के नेतृत्व में ही सारदा चिटफंड घोटाले की जांच एसआईटी की टीम ने की थी। आरोप है कि इसी जांच के दौरान भी घोटाला हुआ था और घोटाले की जांच से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फ़ाइलें और दस्तावेज ग़ायब हो गये थे।
जानकारी के अनुसार एसआईटी के अध्यक्ष के रूप में आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार ने जम्मू-कश्मीर में सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और उनके एक सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था। कहा जाता है कि उनके पास से एक डायरी मिली थी, लेकिन आरोप है कि उस डायरी को राजीव कुमार ने ग़ायब कर दिया। बताया जाता है कि उस डायरी में उन सभी नेताओं के नाम थे जिन्होंने सारदा चिटफं कम्पनी से रूपये लिये थे।
जब यह मामला सुर्खियों में आया तो कोर्ट के आदेश के बाद ही सीबीआई ने आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार को आरोपी बनाया था। जिसके बाद सीबीआई सारदा चिटफंड में गुम हुईं फ़ाइलों और दस्तावेजों के बारे में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करना चाहती है। लेकिन ममता बनर्जी राजीव कुमार के समर्थन में सामने आ गईं और सीधे तौर पर उन्होंने सीबीआई और केन्द्र सरकार से टक्कर ले ली।
FEB 04 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि सारदा चिटफंड और रोज वैली मामले को लेकर सीबीआई और पश्चिम बंगाल की ममला बनर्जी सरकार आमने-सामने हैं। सीबीआई सारदा चिटफंड मामले को लेकर कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने कोलकाता गई थी, लेकिन सीबीआई टीम के अधिकारियों को कोलकाता पुलिस ने अरेस्ट कर लिया थी। सीबीआई अधिकारियों के अरेस्ट होने के बाद एकाएक देश का राजनीतिक माहौल काफ़ी गरमा गया था जिसके बाद विवाद बढ़ता देख कोलकाता पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को छोड़ दिया था।
कल रात से सीबीआई और ममता बनर्जी सरकार के बीच वर्चस्व की लड़ाई का खेल जारी है। इस सबके बीच कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी ने अपने एक पुलिस अधिकारी को बचाने के लिए सीधे-सीधे सीबीआई या फ़िर कहें कि केन्द्र सरकार से टक्कर ली है। आख़िर आप भी जानने चाहेंगे कि वो पुलिस अधिकारी राजीव कुमार कौन हैं जिनके साथ ममता बनर्जी खड़ीं हैं और उन्होंने जिसके लिए केन्द्र सरकार से सीधे टक्कर ले ली?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार 1989 बैच के बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफ़ी नजदीकी माना जाता है। आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार यूपी के चंदौसी के रहने वाले हैं और पहले उन्हें यूपी कैडर आवंटित हुआ था, लेकिन बाद में राजीव कुमार पश्चिम बंगाल कैडर में चले गये।
आरोप है कि सारदा चिट फंड घोटाला पश्चिम बंगाल का एक बड़ा घोटाला है। कहा जाता है कि इस घोटाले में कई बड़े-बड़े नाम शामिल हैं। आप जानना चाहेंगे कि आख़िर सारदा चिटफंड घोटाला क्या है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आरोप है कि सारदा चिटफंड कम्पनी ने पश्चिम बंगाल में आम लोगों को कई लुभावने ऑफ़र दिए थे लेकिन उनके साथ ठगी कर ली। कहा जाता है कि इस कम्पनी ने लोगों से कहा था कि इसमें निवेश करने पर उन्हें कम्पनी की तरफ़ से 34 गुना रकम दी जाएगी। लेकिन लोगों का आरोप है कि उनके साथ कम्पनी ने धोखा किया और उन्हें कोई फ़ायदा नहीं हुआ। कथित तौर पर यह घोटाला 3,000 करोड़ रुपयों का कहा जाता है और इस घोटाले का खुलासा अप्रैल, 2013 में हुआ था।
इसी सारदा चिटफंड घोटाल में आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार पर जांच चल रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस अधिकारी राजीव कुमार के नेतृत्व में ही सारदा चिटफंड घोटाले की जांच एसआईटी की टीम ने की थी। आरोप है कि इसी जांच के दौरान भी घोटाला हुआ था और घोटाले की जांच से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फ़ाइलें और दस्तावेज ग़ायब हो गये थे।
जानकारी के अनुसार एसआईटी के अध्यक्ष के रूप में आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार ने जम्मू-कश्मीर में सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और उनके एक सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था। कहा जाता है कि उनके पास से एक डायरी मिली थी, लेकिन आरोप है कि उस डायरी को राजीव कुमार ने ग़ायब कर दिया। बताया जाता है कि उस डायरी में उन सभी नेताओं के नाम थे जिन्होंने सारदा चिटफं कम्पनी से रूपये लिये थे।
जब यह मामला सुर्खियों में आया तो कोर्ट के आदेश के बाद ही सीबीआई ने आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार को आरोपी बनाया था। जिसके बाद सीबीआई सारदा चिटफंड में गुम हुईं फ़ाइलों और दस्तावेजों के बारे में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करना चाहती है। लेकिन ममता बनर्जी राजीव कुमार के समर्थन में सामने आ गईं और सीधे तौर पर उन्होंने सीबीआई और केन्द्र सरकार से टक्कर ले ली।