जानिए पीपीएफ़ की बारे में विस्तार से
Tuesday - February 5, 2019 3:52 pm ,
Category : WTN HINDI
काफ़ी ‘सुविधाजनक’ और ‘लाभदायक’ है पब्लिक प्रोविडेंट फंड
पीपीएफ़: भविष्य के लिए निवेश के साथ-साथ टैक्स बचत भी
FEB 05 (WTN) – हर कोई चाहता है कि भविष्य के लिए धन संग्रह के साथ-साथ किसी ना किसी तरह से वो टैक्स बचा सके ताकि होने वाली बचत का वो पैसा भविष्य में उसके काम आ सके। वैसे तो टैक्स सेविंग के कई तरीके हैं, लेकिन यदि टैक्स सेविंग के साथ-साथ आपका सेविंग का पैसा भविष्य में आपके काम आता है तो इससे बड़ी क्या बात होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी बैंक या फ़िर पोस्ट ऑफ़िस में पीपीएफ़ अकाउंट खोलकर कोई भी व्यक्ति पीपीएफ़ यानि कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड के जरिये टैक्स बचा सकता है।
बैंकिंग सेक्टर के जानकारों के मुताबिक पीपीएफ़ में निवेश करना अन्य निवेश विकल्पों की तुलना में काफ़ी सुरक्षित और लाभदायक है। जब भी आप इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं तो उस समय आप टैक्स राहत के लिए पीपीएफ़ अकाउंट में जमा राशि के आधार पर टैक्स राहत का दावा कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीपीएफ़ खाते में जमा राशि पर मिले ब्याज पर इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय टैक्स राहत मिलती है।
यदि आपकी नियमित इनकम है और आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो आपके लिए पीपीएफ़ अकाउंट में निवेश करना काफ़ी फायदेमंद रहेगा। भारत के किसी भी अनुसूचित बैंक में या फ़िर किसी भी पोस्ट ऑफ़िस में कोई भी व्यक्ति अपने नाम पर अपना पीपीएफ़ अकाउंट खोल सकता है, इतना ही नहीं बच्चों के नाम पर भी पीपीएफ़ अकाउंट खोला जा सकता है।
अलग-अलग बैंकों में और डाकघर में पीपीएफ़ अकाउंट में पैसा जमा करने के अलग-अलग नियम हैं। लेकिन फ़िर भी आप किसी भी पीपीएफ़ अकाउंट में कम से कम 500 रुपए से लेकर अधिकतम डेढ़ लाख रुपये प्रति वर्ष का निवेश कर सकते हैं। पीपीएफ़ अकाउंट होल्डर के खाते में वार्षिक डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा की राशि जमा नहीं हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि डेढ़ लाख रुपये से ज़्यादा की राशि पर ना तो ब्याज मिलता है और ना ही इनकम टैक्स में किसी भी तरह की छूट मिलती है। पीपीएफ़ अकाउंट में यह राशि हर साल अधिकतम 12 किस्तों में जमा की जा सकती है या फ़िर इसे एकमुश्त भी जमा किया जा सकता है।
पीपीएफ़ में निवेश को काफ़ी सुरक्षित माना गया है। जानकारों के मुताबिक़, पीपीएफ़ खाते में निवेश के बाद कोई भी व्यक्ति आयकर रिटर्न भरते समय इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 88 के तहत दावा कर सकता है और उसे नियमानुसार इनकम टैक्स में राहत मिल सकती है। पीपीएफ़ अकाउंट में खाताधारक को काफ़ी सुविधाएं दी गई हैं, जैसे खाताधारक के अनुरोध पर उसके पीपीएफ़ अकाउंट को पोस्ट ऑफ़िस की एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच में या फ़िर पोस्ट ऑफ़िस से बैंक में ट्रांसफर किया जा सकता है।
इतना ही नहीं, पीपीएफ़ अकाउंट को बैंक से पोस्ट ऑफ़िस में या फ़िर एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर किया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस सेवा के लिए किसी भी तरह का कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है। पीपीएफ़ की ब्याज दर को हर तिमाही पर केन्द्र सरकार द्वारा तय किया जाता है।
वैसे आमतौर पर पन्द्रह साल से पहले एक पीपीएफ़ अकाउंट को बंद नहीं किया जा सकता है, लेकिन कुछ जरूरतों के आधार पर पीपीएफ़ अकाउंट को समय से पहले बंद किया जा सकता है, जैसे हायर एजुकेशन या फ़िर मेडिकल इमरजेंसी के लिए धन की जरूरत होने पर पीपीएफ़ अकाउंट को बंद किया जा सकता है। लेकिन फ़िर भी खाते को अनिवार्यता के मामले में 5 साल से पहले बंद नहीं किया जा सकता है।
FEB 05 (WTN) – हर कोई चाहता है कि भविष्य के लिए धन संग्रह के साथ-साथ किसी ना किसी तरह से वो टैक्स बचा सके ताकि होने वाली बचत का वो पैसा भविष्य में उसके काम आ सके। वैसे तो टैक्स सेविंग के कई तरीके हैं, लेकिन यदि टैक्स सेविंग के साथ-साथ आपका सेविंग का पैसा भविष्य में आपके काम आता है तो इससे बड़ी क्या बात होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी बैंक या फ़िर पोस्ट ऑफ़िस में पीपीएफ़ अकाउंट खोलकर कोई भी व्यक्ति पीपीएफ़ यानि कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड के जरिये टैक्स बचा सकता है।
बैंकिंग सेक्टर के जानकारों के मुताबिक पीपीएफ़ में निवेश करना अन्य निवेश विकल्पों की तुलना में काफ़ी सुरक्षित और लाभदायक है। जब भी आप इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं तो उस समय आप टैक्स राहत के लिए पीपीएफ़ अकाउंट में जमा राशि के आधार पर टैक्स राहत का दावा कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीपीएफ़ खाते में जमा राशि पर मिले ब्याज पर इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय टैक्स राहत मिलती है।
यदि आपकी नियमित इनकम है और आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो आपके लिए पीपीएफ़ अकाउंट में निवेश करना काफ़ी फायदेमंद रहेगा। भारत के किसी भी अनुसूचित बैंक में या फ़िर किसी भी पोस्ट ऑफ़िस में कोई भी व्यक्ति अपने नाम पर अपना पीपीएफ़ अकाउंट खोल सकता है, इतना ही नहीं बच्चों के नाम पर भी पीपीएफ़ अकाउंट खोला जा सकता है।
अलग-अलग बैंकों में और डाकघर में पीपीएफ़ अकाउंट में पैसा जमा करने के अलग-अलग नियम हैं। लेकिन फ़िर भी आप किसी भी पीपीएफ़ अकाउंट में कम से कम 500 रुपए से लेकर अधिकतम डेढ़ लाख रुपये प्रति वर्ष का निवेश कर सकते हैं। पीपीएफ़ अकाउंट होल्डर के खाते में वार्षिक डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा की राशि जमा नहीं हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि डेढ़ लाख रुपये से ज़्यादा की राशि पर ना तो ब्याज मिलता है और ना ही इनकम टैक्स में किसी भी तरह की छूट मिलती है। पीपीएफ़ अकाउंट में यह राशि हर साल अधिकतम 12 किस्तों में जमा की जा सकती है या फ़िर इसे एकमुश्त भी जमा किया जा सकता है।
पीपीएफ़ में निवेश को काफ़ी सुरक्षित माना गया है। जानकारों के मुताबिक़, पीपीएफ़ खाते में निवेश के बाद कोई भी व्यक्ति आयकर रिटर्न भरते समय इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 88 के तहत दावा कर सकता है और उसे नियमानुसार इनकम टैक्स में राहत मिल सकती है। पीपीएफ़ अकाउंट में खाताधारक को काफ़ी सुविधाएं दी गई हैं, जैसे खाताधारक के अनुरोध पर उसके पीपीएफ़ अकाउंट को पोस्ट ऑफ़िस की एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच में या फ़िर पोस्ट ऑफ़िस से बैंक में ट्रांसफर किया जा सकता है।
इतना ही नहीं, पीपीएफ़ अकाउंट को बैंक से पोस्ट ऑफ़िस में या फ़िर एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर किया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस सेवा के लिए किसी भी तरह का कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है। पीपीएफ़ की ब्याज दर को हर तिमाही पर केन्द्र सरकार द्वारा तय किया जाता है।
वैसे आमतौर पर पन्द्रह साल से पहले एक पीपीएफ़ अकाउंट को बंद नहीं किया जा सकता है, लेकिन कुछ जरूरतों के आधार पर पीपीएफ़ अकाउंट को समय से पहले बंद किया जा सकता है, जैसे हायर एजुकेशन या फ़िर मेडिकल इमरजेंसी के लिए धन की जरूरत होने पर पीपीएफ़ अकाउंट को बंद किया जा सकता है। लेकिन फ़िर भी खाते को अनिवार्यता के मामले में 5 साल से पहले बंद नहीं किया जा सकता है।