लोकसभा चुनाव के लिए बस ‘मोदी मंत्र’ का ‘सहारा’, पर्दे के पीछे रहेगा स्थानीय नेतृत्व!
Tuesday - February 5, 2019 12:39 pm ,
Category : WTN HINDI
प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही आम चुनाव लड़ेगी भाजपा
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ‘साइड लाइन’ हो सकते हैं पूर्व मुख्यमंत्री
FEB 05 (WTN) – लोकसभा चुनाव के लिए बस कुछ ही समय शेष बचा है, ऐसे में सत्तारुढ़ भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने और उस पर अमल करने में जुट गई है। बात करें मध्य प्रदेश की तो यहां पर विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा अब लोकसभा चुनाव के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ मोदी मंत्र का सहारा लेने जा रही है।
जैसा कि आप जानते हैं कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया था, या फ़िर कहा जाए कि शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर चुनाव लड़ा था लेकिन शिवराज सिंह चौहान विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीत नहीं दिला सके। विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब भाजपा स्थानीय नेतृत्व को साइड लाइन कर सकती है और मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सहारे ही मैदान में उतरने वाली है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आरएसएस ने विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा को सतर्क किया था कि चुनाव प्रचार में व्यक्ति विशेष के प्रचार को ज्यादा महत्व देने से नुकसान उठाना पड़ सकता है। संघ की आशंका सही साबित हुई और शिवराज सिंह चौहान के चेहरे को प्रदेश की जनता ने नकार दिया। विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान का दांव फेल होने के बाद अब लोकसभा चुनाव के लिए मोदी ही सबसे बड़ा सहारा भाजपा के लिए साबित हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक़ भाजपा लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह की कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहेगी, इसलिए मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहां पर हाल ही में भाजपा की विधानसभा चुनावों में हार हुई है, भाजपा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम और काम पर ही चुनाव लड़ेगी और उसे ही ज्यादा फोकस करेगी। इन तीनों ही राज्यों में भाजपा की हार के बाद पार्टी शिवारज सिंह चौहान, वसुन्धरा राजे सिंधिया और डॉ रमन सिंह को ज्यादा तवोज्जो देने के मूड में नहीं दिख रही है और हो सकता है कि इन तीनों ही नेताओं को ‘साइड लाइन’ कर दिया जाए।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में हाल ही में भाजपा की हार के बाद पार्टी को लगता है कि जनता की नाराजगी स्थानीय नेतृत्व यानि कि वहां के भाजपा मुख्यमंत्रियों से थी। इसलिए जितना कम से कम इस्तेमाल स्थानीय नेतृत्व का चुनाव प्रचार में किया जाएगा उतना ही फायदा मिलेगा। इन तीनों ही राज्यों में लोकसभा की कुल 65 सीटें हैं और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 65 में से 62 सीटों पर जीत हासिल की थी।
यदि भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना है तो उसे इन 65 सीटों में से कम से कम 55 सीटों पर जीत हासिल करना ही होगा। इन तीनों राज्यों में हाल ही में विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा नहीं चाहेगी कि लोकसभा चुनाव में भी इन तीनों ही राज्यों में उसे कम सीटों मिले, इसलिए स्थानीय नेतृत्व को हो सकता है कि चुनाव प्रचार में ज्यादा महत्व भाजपा ना दे। यानि कि लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के नाम और काम पर चुनाव मैदान में उतरा जाएगा और स्थानीय नेतृत्व को पर्दे के पीछे ही काम करने की सलाह दी जाएगी।
FEB 05 (WTN) – लोकसभा चुनाव के लिए बस कुछ ही समय शेष बचा है, ऐसे में सत्तारुढ़ भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने और उस पर अमल करने में जुट गई है। बात करें मध्य प्रदेश की तो यहां पर विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा अब लोकसभा चुनाव के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ मोदी मंत्र का सहारा लेने जा रही है।
जैसा कि आप जानते हैं कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया था, या फ़िर कहा जाए कि शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर चुनाव लड़ा था लेकिन शिवराज सिंह चौहान विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीत नहीं दिला सके। विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब भाजपा स्थानीय नेतृत्व को साइड लाइन कर सकती है और मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सहारे ही मैदान में उतरने वाली है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आरएसएस ने विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा को सतर्क किया था कि चुनाव प्रचार में व्यक्ति विशेष के प्रचार को ज्यादा महत्व देने से नुकसान उठाना पड़ सकता है। संघ की आशंका सही साबित हुई और शिवराज सिंह चौहान के चेहरे को प्रदेश की जनता ने नकार दिया। विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान का दांव फेल होने के बाद अब लोकसभा चुनाव के लिए मोदी ही सबसे बड़ा सहारा भाजपा के लिए साबित हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक़ भाजपा लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह की कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहेगी, इसलिए मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहां पर हाल ही में भाजपा की विधानसभा चुनावों में हार हुई है, भाजपा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम और काम पर ही चुनाव लड़ेगी और उसे ही ज्यादा फोकस करेगी। इन तीनों ही राज्यों में भाजपा की हार के बाद पार्टी शिवारज सिंह चौहान, वसुन्धरा राजे सिंधिया और डॉ रमन सिंह को ज्यादा तवोज्जो देने के मूड में नहीं दिख रही है और हो सकता है कि इन तीनों ही नेताओं को ‘साइड लाइन’ कर दिया जाए।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में हाल ही में भाजपा की हार के बाद पार्टी को लगता है कि जनता की नाराजगी स्थानीय नेतृत्व यानि कि वहां के भाजपा मुख्यमंत्रियों से थी। इसलिए जितना कम से कम इस्तेमाल स्थानीय नेतृत्व का चुनाव प्रचार में किया जाएगा उतना ही फायदा मिलेगा। इन तीनों ही राज्यों में लोकसभा की कुल 65 सीटें हैं और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 65 में से 62 सीटों पर जीत हासिल की थी।
यदि भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना है तो उसे इन 65 सीटों में से कम से कम 55 सीटों पर जीत हासिल करना ही होगा। इन तीनों राज्यों में हाल ही में विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा नहीं चाहेगी कि लोकसभा चुनाव में भी इन तीनों ही राज्यों में उसे कम सीटों मिले, इसलिए स्थानीय नेतृत्व को हो सकता है कि चुनाव प्रचार में ज्यादा महत्व भाजपा ना दे। यानि कि लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के नाम और काम पर चुनाव मैदान में उतरा जाएगा और स्थानीय नेतृत्व को पर्दे के पीछे ही काम करने की सलाह दी जाएगी।