सस्ते हो सकते हैं निर्माणाधीन घरों के दाम; कम हो सकता है जीएसटी
Saturday - February 9, 2019 11:51 am ,
Category : WTN HINDI
लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रियल एस्टेट सेक्टर के लिए लिए ‘रणनीति’
रियल एस्टेट सेक्टर में ‘ऐतिहासिक परिवर्तन’ की तैयारी में मोदी सरकार
FEB 09 (WTN) – हर किसी की तमन्ना होती है कि उसका एक प्यारा सा घर हो, लेकिन शहरों में अपना घर होना एक सपने के पूरा होने जैसा है। महंगाई के जमाने में मध्यम वर्ग को अपना घर बनाने के लिए काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी मध्यम वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए उन्हें खुद के घर की सौगात देने की तैयारी मोदी सरकार कर रही है। मोदी सरकार की कोशिश है कि घरों पर लगने वाले जीएसटी को कम किया जाए जिससे मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना सस्ता हो सके।
यदि सभी कुछ योजना के अनुसार चलता रहा, तो निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं के मकानों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत हो सकती है। वहीं समूह किफ़ायती आवास की परियोजनाओं के निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी की दर 8 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत की जा सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि जीएसटी काउंसिल द्वारा गठित मंत्रियों का समूह जीएसटी दरों को कम करने की सिफारिश कर सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीएसटी काउंसिल ने रियल एस्टेट सेक्टर की दिक्कतों और चुनौतियों का पता लगाने और उन पर लगने वाले करों के दर की समीक्षा के लिए गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल की अध्यक्षता में मंत्रीस्तरीय समूह का गठन किया था। जानकारी के मुताबिक़ इस समूह ने अपनी पहली बैठक में किफायती आवास पर जीएसटी की दर को 8 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत करने की सिफारिश की है।
कहा जा रहा है कि मंत्रियों के समूह द्वारा एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट को अन्तिम रूप दिया जाएगा और जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इस रिपोर्ट को पेश किया जाएगा। मध्यम वर्ग को राहत देते हुए समूह आवासीय घरों पर जीएसटी की दरों को बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट को कम किये बिना 5 प्रतिशत करने और किफायती आवास पर जीएसटी की दर को घटाकर 3 प्रतिशत करने के पक्ष में सहमति बनी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल निर्माणाधीन सम्पत्तियों और ऐसे तैयार फ्लैट जहां उन्हें बेचने के समय कार्य पूरा होने का प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है, उनके भुगतान के समय 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। जीएसटी लागू होने से पहले इस तरह की सम्पत्तियों पर 15 से 18 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता था। वहीं ऐसी रियल एस्टेट सम्पत्ति जिसका काम पूरा होने का प्रमाणपत्र जारी हो चुका है उनके खरीददारों पर जीएसटी नहीं लगता है।
कहा जा रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद सम्पत्ति के दामों में कमी आई है लेकिन इसका फायदा बिल्डर सम्पत्तियों के दाम में कमी लाकर ग्राहकों को इनपुट टैक्स क्रेडिट के लाभ के रूप में नहीं दे रहे हैं। हो सकता है कि जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग में इस पर कोई ठोस फैसला लिया जाए। यदि ऐसा होता है तो मध्यम वर्ग के लिए यह बहुत बड़ी राहत होगी और उसका लाभ मोदी सरकार को लोकसभा चुनाव में मिलना तय है।
FEB 09 (WTN) – हर किसी की तमन्ना होती है कि उसका एक प्यारा सा घर हो, लेकिन शहरों में अपना घर होना एक सपने के पूरा होने जैसा है। महंगाई के जमाने में मध्यम वर्ग को अपना घर बनाने के लिए काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी मध्यम वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए उन्हें खुद के घर की सौगात देने की तैयारी मोदी सरकार कर रही है। मोदी सरकार की कोशिश है कि घरों पर लगने वाले जीएसटी को कम किया जाए जिससे मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना सस्ता हो सके।
यदि सभी कुछ योजना के अनुसार चलता रहा, तो निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं के मकानों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत हो सकती है। वहीं समूह किफ़ायती आवास की परियोजनाओं के निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी की दर 8 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत की जा सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि जीएसटी काउंसिल द्वारा गठित मंत्रियों का समूह जीएसटी दरों को कम करने की सिफारिश कर सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीएसटी काउंसिल ने रियल एस्टेट सेक्टर की दिक्कतों और चुनौतियों का पता लगाने और उन पर लगने वाले करों के दर की समीक्षा के लिए गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल की अध्यक्षता में मंत्रीस्तरीय समूह का गठन किया था। जानकारी के मुताबिक़ इस समूह ने अपनी पहली बैठक में किफायती आवास पर जीएसटी की दर को 8 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत करने की सिफारिश की है।
कहा जा रहा है कि मंत्रियों के समूह द्वारा एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट को अन्तिम रूप दिया जाएगा और जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इस रिपोर्ट को पेश किया जाएगा। मध्यम वर्ग को राहत देते हुए समूह आवासीय घरों पर जीएसटी की दरों को बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट को कम किये बिना 5 प्रतिशत करने और किफायती आवास पर जीएसटी की दर को घटाकर 3 प्रतिशत करने के पक्ष में सहमति बनी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल निर्माणाधीन सम्पत्तियों और ऐसे तैयार फ्लैट जहां उन्हें बेचने के समय कार्य पूरा होने का प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है, उनके भुगतान के समय 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। जीएसटी लागू होने से पहले इस तरह की सम्पत्तियों पर 15 से 18 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता था। वहीं ऐसी रियल एस्टेट सम्पत्ति जिसका काम पूरा होने का प्रमाणपत्र जारी हो चुका है उनके खरीददारों पर जीएसटी नहीं लगता है।
कहा जा रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद सम्पत्ति के दामों में कमी आई है लेकिन इसका फायदा बिल्डर सम्पत्तियों के दाम में कमी लाकर ग्राहकों को इनपुट टैक्स क्रेडिट के लाभ के रूप में नहीं दे रहे हैं। हो सकता है कि जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग में इस पर कोई ठोस फैसला लिया जाए। यदि ऐसा होता है तो मध्यम वर्ग के लिए यह बहुत बड़ी राहत होगी और उसका लाभ मोदी सरकार को लोकसभा चुनाव में मिलना तय है।