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मध्य प्रदेश में चुनावी मैदान में उतर सकती हैं भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की पत्नियां!

Tuesday - February 12, 2019 10:34 am , Category : WTN HINDI
परम्परागत सीटों को जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस का ‘नया दांव’
परम्परागत सीटों को जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस का ‘नया दांव’

साधना सिंह, अमृता सिंह और प्रियदर्शनी राजे सिंधिया लड़ सकती हैं लोकसभा चुनाव

FEB 12 (WTN) – भारतीय राजनीति में परिवारवाद कोई नयी बात नहीं है, देश की लगभग हर राजनीतिक पार्टी में वंशवाद और परिवारवाद आपको देखने मिल जाएगा। बात करें मध्य प्रदेश की, तो यहां पर भी परिवारवाद की परम्परा काफ़ी पुरानी है। अब जबकि लोकसभा चुनाव के लिए कुछ ही समय शेष बचा है, ऐसे में सभी राजनीतिक दलों के नेता इस कोशिश में हैं कि उन्हें नहीं तो उनके किसी परिजन को टिकट मिल जाए। जैसा कि आप जानते हैं कि अभी हाल में हुए विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर अपनी बहू कृष्णा गौर को टिकट दिलाने में सफ़ल रहे। वहीं अब कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में प्रदेश के कई दिग्गजों की पत्नियां चुनाव लड़ सकती हैं।

जानकारी के मुताबिक़, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह विदिशा सीट से, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह राजगढ़ या इन्दौर सीट से, तो वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया गुना से चुनाव लड़ सकती हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में जीत के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों अपनी-अपनी रणनीति के तहत काम कर रही हैं। दिल्ली में सरकार बनाने के लिए मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटें काफ़ी मायने रखती हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 29 में से 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ऐसे उम्म्दीवार को टिकट देना चाहती हैं जो जीत दिला सके। ऐसे में चर्चा है कि मध्य प्रदेश की राजनीति के इन तीनों ही दिग्गजों की पत्नियां चुनाव लड़ सकती हैं।
 
राजनीति के जानकारों के कहना है कि विदिशा शिवराज सिंह चौहान का, राजगढ़ दिग्विजय सिंह का और गुना ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीतिक गढ़ रहा है। ऐसे में इन नेताओं की पत्नियों को यदि टिकट मिलता है, तो इन्हें जीतने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
 

कहा जा रहा है कि विदिशा संसदीय सीट से केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से चुनाव लड़ने से इनकार किए जाने के बाद, इस सीट से कई बार चुनाव जीत चुके शिवराज सिंह चौहान या उनकी पत्नी साधना सिंह के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है। लेकिन शिवराज सिंह चौहान भाजपा के स्टार प्रचारक हैं, ऐसे में पार्टी उन्हें विदिशा सीट से चुनाव लड़ाकर विदिशा तक ही सीमित नहीं रखना चाहती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विदिशा लोकसभा सीट पर 1989 से भाजपा का कब्जा है। ऐसे में इस सुरक्षित सीट पर भाजपा शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह को टिकट दे सकती है।



वहीं दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह के भी चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों पर हैं। कहा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह परिवार की परम्परागत सीट राजगढ़ से अमृता सिंह चुनाव लड़ सकती हैं। अभी हाल में सम्पन्न हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस संसदीय क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटें जीती हैं, इसलिए कहा जा रहा है कि कांग्रेस के लिए यह सीट सुरक्षित है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमृता सिंह अपने पति दिग्विजय सिंह के साथ धार्मिक और सामाजिक कार्यों में काफ़ी समय से सक्रिय हैं, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अमृता सिंह राजगढ़ या फ़िर इन्दौर सीट से चुनाव लड़ सकती हैं और अपने पति की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा सकती हैं।
 

गुना संसदीय सीट से पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया के चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी हो रही हैं। गुना के कांग्रेस कार्यकर्ता प्रियदर्शिनी राजे को गुना सीट से चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव दिल्ली भेज चुके हैं, वहीं इन दिनों प्रियदर्शिनी राजे की सक्रियता भी क्षेत्र में देखी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इन दिनों कयास लगाए जा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिम यूपी की कमान मिलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया चूंकि यूपी में ही व्यस्त रहेंगे, ऐसे में सिंधिया परिवार की परम्परागत सीट गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे चुनाव लड़ सकती हैं।
 
अब यह तो कांग्रेस और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ही तय करेगा कि कद्दावर नेताओं की पत्नियों को लोकसभा चुनाव का टिकट दिया जाए कि नहीं। लेकिन यदि शिवराज सिंह चौहान, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नियों को टिकट मिलता है, तो यह भारतीय राजनीति में वंशवाद का एक और उदाहरण होगा। इन तीनों ही दिग्गज नेताओं की राजनीति और उनके संसदीय क्षेत्र में उनकी पकड़ को देखकर कहा जा सकता है कि टिकट मिलने के बाद इन तीनों ही नेताओं की पत्नियों को जीत हासिल करने में किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन भारतीय मतदाता कब क्या फ़ैसला कर दे, कोई नहीं जानता।