BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

जानिए पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीनने के बाद किसे ‘फायदा’ किसे ‘नुकसान’?

Saturday - February 16, 2019 11:55 am , Category : WTN HINDI
1996 में भारत ने दिया था पाकिस्तान को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा
1996 में भारत ने दिया था पाकिस्तान को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा

मोस्ट फेवर्ड नेशन: कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान को पूरी दुनिया में अलग-थलग करने की ‘रणनीति’
 
FEB 16 (WTN) -
कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ़ जवानों पर हुए आतंकी हमले के बाद पूरे भारत में गुस्से का माहौल है। पाकिस्तान की शह पर आतंकियों की इस नापाक हरकत के बाद हर भारतीय की मांग है कि भारत सरकार पाकिस्तान को जोरदार तरीक़े से सबक सिखाए। इधर भारतीय जनता के गुस्से को देखते हुए मोदी सरकार ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लिया है।

आइये आपको बताते हैं कि पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छिन जाने के बाद उस पर और भारत पर क्या असर होगा? पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लेने के बाद अब भारत कूटनीति के तहत पाकिस्तान के साथ व्यापारिक गतिविधियों पर लगाम लगा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच क़रीब 18 हज़ार करोड़ रुपए का वार्षिक कारोबार होता है। पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लेने के बाद अब भारत,पाकिस्तान पर सख्ती दिखाते हुए उसके लिए अपने बाज़ार बंद कर सकता है।
 
अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार मोस्ट फेवर्ड नेशन के दर्जे से सम्बन्धित दोनों देशों के बीच निर्बाध रूप से बिना भेदभाव के व्यापार होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोस्ट फेवर्ड नेशन का मतलब यह नहीं था कि भारत ने पाकिस्तान को कोई विशेष दर्जा दिया था, बल्कि इसका अर्थ यह था कि दोनों देशों के बीच बिना किसी भेदभाव के व्यापार होगा और GATT (General Agreement on Tariffs and Trade) समझौते के समय यह पहला क्लॉज था। वहीं WTO (World Trade Organization) के नियमों के अनुसार भी उसके सदस्य देश अपने व्यापारिक साझीदारों के साथ भेदभाव नहीं कर सकते हैं।
 
मोस्ट फेवर्ड नेशन के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच बिना किसी रुकावट के व्यापार होता था, वहीं इसकी ख़ास बात यह थी कि इसमें टैरिफ भी कम रहता था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा साल 1996 में दिया था, लेकिन पाकिस्तान ने कभी भी भारत को यह दर्जा नहीं दिया। मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा मिलने के बाद पाकिस्तान, भारत के साथ बिना किसी रूकावट के व्यापार कर रहा था।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच कई वस्तुओं का व्यापार होता है जैसे शक्कर, फल, सब्जी, सीमेन्ट, नमक, कपास, ड्राय फ्रूट्स और स्टील आदि। पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लेने के बाद भारत अब पाकिस्तान से आने वाले सामान पर लगने वाले सीमा शुल्क को कितना भी बढ़ा सकता है जिससे पाकिस्तान से होने वाले निर्यात पर असर पड़ेगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2016-17 में 16 हज़ार करोड़ रुपए का व्यापार हुआ था, जो कि साल 2017-18 में बढ़कर 17 हज़ार करोड़ रुपए हो गया था और यह व्यापार भारत के कुल व्यापार का सिर्फ़ 0.5 प्रतिशत है। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान को 1.9 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया जो कि भारत के कुल निर्यात के एक प्रतिशत से भी कम है। वहीं इस दौरान भारत ने पाकिस्तान से 48.8 करोड़ डॉलर का सामान आयात किया जो कि भारत के कुल आयात के 0.2 प्रतिशत से भी कम है।
 
वैसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के जानकारों के कहना है कि भारत के इस कदम से भारत को ही ज़्यादा आर्थिक नुकसान होगा क्योंकि भारत, पाकिस्तान को निर्यात ज़्यादा करता है जबकि पाकिस्तान से आयात कम करता है। भारत के इस कड़े कदम के बाद पाकिस्तान के पास अब विरोधस्वरूप करने के लिए वैसे कुछ भी नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान ने भारत को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया ही नहीं है और पाकिस्तान ने 1,209 सामानों के भारत से आयात पर पहले से ही रोक लगा रखी है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छिन जाने के बाद उसे कोई ज़्यादा आर्थिक नुकसान नहीं होगा, लेकिन भारत ने पाकिस्तान से यह दर्जा छीनकर उसे एक सन्देश देने की कोशिश की है कि आतंकी गतिविधियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वित्तमंत्री अरुण जेटली के मुताबिक़ भारत सरकार का यह फ़ैसला वैश्विकस्तर पर पाकिस्तान को पूरी तरह से अलग-थलग करने की सुनिश्चित रणनीति के तहत भारतीय कूटनीति का एक अहम हिस्सा है।