क्या मोदी सरकार के आगे ‘बेबस’ हुई रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया?
Tuesday - February 19, 2019 10:48 am ,
Category : WTN HINDI
मोदी सरकार और आरबीआई के बीच स्वायत्ता की ‘लड़ाई’!
बैंकों की क्लास: बढ़ी हुई रेपो रेट का फ़ायदा आम लोगों तक पहुंचाने बैंकों को समझाइश देगी आरबीआई
FEB 19 (WTN) – क्या मोदी सरकार आरबीआई पर अपना दबाव बनाने में सफल हो चुकी है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आरबीआई द्वारा चुनाव के पहले रेपो रेट का 'फ़ायदा' आम लोगों को देने के लिए बैंकों को 'समझाइश' देना और वित्त वर्ष में रिकॉर्ड अन्तरिम लाभांश सरकार को देने के बाद यह चर्चाएं आम हैं। आरबीआई यानि कि भारतीय रिज़र्व बैंक 21 फरवरी को सभी बैंकों की 'क्लास' लेना जा रहा है, क्लास लेने से हमारा आशय है कि आरबीआई रेपो रेट में कटौती के बाद इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के बारे में सार्वजनिक औऱ निजी बैंक के प्रमुखों से 'चर्चा' करेगा। इस बारे में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का तर्क है कि मौद्रिक नीति निर्णय का फायदा कर्ज़ लेने वालों को मिलना महत्वपूर्ण है।
इस बारे में आरबीआई गवर्नर का कहना है, “रेपो रेट में कमी के बाद ब्याज दरों में कटौती का पूरा फायदा ग्रहाकों को देना काफ़ी महत्वपूर्ण है। खासकर केंद्रीय बैंक की नीतिगत दर में घोषणा के बाद यह और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है।” आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस महीने की शुरूआत में आरबीआई ने रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया था।
कहा जा रहा है कि आम चुनावों को 'ध्यान' में रखते हुए आरबीआई पर अप्रत्यक्ष दबाव है कि लोन की दरें कम हो जिससें कर्ज़ लेने वाले आम लोगों को फायदा मिले। रेपो रेट में कमी के बाद ईएमआई कम होगी साथ ही सरकार को उम्मीद है कि कर्ज़ सस्ता होगा जिसका लाभ सरकार को मिल सकता है।
इधर भारतीय रिजर्व बैंक ने अन्तरिम लाभांश के रूप में केन्द्र सरकार को 28,000 करोड़ रुपये देने का फ़ैसला लिया है। यह फैसला आरबीआई की केन्द्रीय निदेशक मंडल की बैठक में लिया गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह लगातार दूसरा साल है, जब भारतीय रिज़र्व बैंक ने अन्तरिम अधिशेष के रूप में सरकार को बड़ी रकम हस्तांतरित की है।
समय-समय पर केन्द्र सरकार द्वारा आरबीआई पर अन्तरिम लाभांश हस्तांतरित करने का 'दबाव' बनाए जाने की ख़बरें मीडिया में आ रही थीं। कहा जा रहा था कि वित्त मंत्रालय, आरबीआई से अन्तरिम लाभांश के तौर पर 28,000 करोड़ रुपये की मांग कर रहा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस वित्त वर्ष में आरबीआई अभी तक सरकार को 40,000 करोड़ रुपये का अन्तरिम लाभांश दे चुकी है। अब 28,000 करोड़ रुपये और अन्तरिम लाभांश देने के बाद चालू वित्त वर्ष में सरकार को आरबीआई से कुल 68,000 करोड़ रुपये मिल जाएंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी वित्त वर्ष में सरकार रिज़र्व बैंक ने सरकार को इतना ज़्यादा लाभांश नहीं दिया है। इससे पहले साल 2016 में आरबीआई ने सरकार को सबसे ज़्यादा 65,896 करोड़ रुपये का अन्तरिम लाभांश दिया था। सरकार ने इंटरिम सरप्लस के साथ रिज़र्व बैंक से पिछले दो साल में रिटेन किये गये सरप्लस की मांग की थी। पिछले आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच जिन मुद्दों को लेकर 'टकराव' हुआ था उसमें एक मुद्दा यह भी था।
कहा जा सकता है कि केन्द्र की मोदी सरकार अपनी बात आरबीआई से मनवाने में 'सफल' रही है। जिस तरह से आरबीआई की स्वायत्ता को लेकर केन्द्र सरकार और केन्द्रीय बैंक के बीच विवाद चल रहा था, कहा जाता है कि उसी से नाराज़ होकर उर्जित पटेल ने रिज़र्व बैंक के गवर्नर पद से इस्तीफा दिया था। अब आरबीआई का बैंकों को रेपो रेट का लाभ ग्राहकों को देने के लिए समझाइश देना और रिकॉर्ड अन्तरिम लाभांश केन्द्र सरकार को देने के बाद साफ़ कहा जा सकता है कि मोदी सरकार आरबीआई पर 'हावी' होती नज़र आ रही है।
FEB 19 (WTN) – क्या मोदी सरकार आरबीआई पर अपना दबाव बनाने में सफल हो चुकी है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आरबीआई द्वारा चुनाव के पहले रेपो रेट का 'फ़ायदा' आम लोगों को देने के लिए बैंकों को 'समझाइश' देना और वित्त वर्ष में रिकॉर्ड अन्तरिम लाभांश सरकार को देने के बाद यह चर्चाएं आम हैं। आरबीआई यानि कि भारतीय रिज़र्व बैंक 21 फरवरी को सभी बैंकों की 'क्लास' लेना जा रहा है, क्लास लेने से हमारा आशय है कि आरबीआई रेपो रेट में कटौती के बाद इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के बारे में सार्वजनिक औऱ निजी बैंक के प्रमुखों से 'चर्चा' करेगा। इस बारे में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का तर्क है कि मौद्रिक नीति निर्णय का फायदा कर्ज़ लेने वालों को मिलना महत्वपूर्ण है।
इस बारे में आरबीआई गवर्नर का कहना है, “रेपो रेट में कमी के बाद ब्याज दरों में कटौती का पूरा फायदा ग्रहाकों को देना काफ़ी महत्वपूर्ण है। खासकर केंद्रीय बैंक की नीतिगत दर में घोषणा के बाद यह और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है।” आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस महीने की शुरूआत में आरबीआई ने रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया था।
कहा जा रहा है कि आम चुनावों को 'ध्यान' में रखते हुए आरबीआई पर अप्रत्यक्ष दबाव है कि लोन की दरें कम हो जिससें कर्ज़ लेने वाले आम लोगों को फायदा मिले। रेपो रेट में कमी के बाद ईएमआई कम होगी साथ ही सरकार को उम्मीद है कि कर्ज़ सस्ता होगा जिसका लाभ सरकार को मिल सकता है।
इधर भारतीय रिजर्व बैंक ने अन्तरिम लाभांश के रूप में केन्द्र सरकार को 28,000 करोड़ रुपये देने का फ़ैसला लिया है। यह फैसला आरबीआई की केन्द्रीय निदेशक मंडल की बैठक में लिया गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह लगातार दूसरा साल है, जब भारतीय रिज़र्व बैंक ने अन्तरिम अधिशेष के रूप में सरकार को बड़ी रकम हस्तांतरित की है।
समय-समय पर केन्द्र सरकार द्वारा आरबीआई पर अन्तरिम लाभांश हस्तांतरित करने का 'दबाव' बनाए जाने की ख़बरें मीडिया में आ रही थीं। कहा जा रहा था कि वित्त मंत्रालय, आरबीआई से अन्तरिम लाभांश के तौर पर 28,000 करोड़ रुपये की मांग कर रहा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस वित्त वर्ष में आरबीआई अभी तक सरकार को 40,000 करोड़ रुपये का अन्तरिम लाभांश दे चुकी है। अब 28,000 करोड़ रुपये और अन्तरिम लाभांश देने के बाद चालू वित्त वर्ष में सरकार को आरबीआई से कुल 68,000 करोड़ रुपये मिल जाएंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी वित्त वर्ष में सरकार रिज़र्व बैंक ने सरकार को इतना ज़्यादा लाभांश नहीं दिया है। इससे पहले साल 2016 में आरबीआई ने सरकार को सबसे ज़्यादा 65,896 करोड़ रुपये का अन्तरिम लाभांश दिया था। सरकार ने इंटरिम सरप्लस के साथ रिज़र्व बैंक से पिछले दो साल में रिटेन किये गये सरप्लस की मांग की थी। पिछले आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच जिन मुद्दों को लेकर 'टकराव' हुआ था उसमें एक मुद्दा यह भी था।
कहा जा सकता है कि केन्द्र की मोदी सरकार अपनी बात आरबीआई से मनवाने में 'सफल' रही है। जिस तरह से आरबीआई की स्वायत्ता को लेकर केन्द्र सरकार और केन्द्रीय बैंक के बीच विवाद चल रहा था, कहा जाता है कि उसी से नाराज़ होकर उर्जित पटेल ने रिज़र्व बैंक के गवर्नर पद से इस्तीफा दिया था। अब आरबीआई का बैंकों को रेपो रेट का लाभ ग्राहकों को देने के लिए समझाइश देना और रिकॉर्ड अन्तरिम लाभांश केन्द्र सरकार को देने के बाद साफ़ कहा जा सकता है कि मोदी सरकार आरबीआई पर 'हावी' होती नज़र आ रही है।