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स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में ‘परिवर्तन’

Monday - February 25, 2019 10:37 am , Category : WTN HINDI
केन्द्र सरकार ने स्टार्टअप की ‘परिभाषा’ में किया ‘बदलाव’
केन्द्र सरकार ने स्टार्टअप की ‘परिभाषा’ में किया ‘बदलाव’

स्टार्टअप पर ‘फोकस’: केन्द्र सरकार ने बढ़ाई आयकर छूट निवेश की सीमा; मध्य प्रदेश में सरकारी खरीदी में स्टार्टअप को मिलेगी प्राथमिकता

FEB 25 (WTN) –प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा से ही स्टार्टअप पर ‘जोर’ देते रहे हैं, जिसके कारण प्रधानमंत्री मोदी लगातार युवाओं को स्टार्टअप के लिए प्रेरित करते रहते हैं ताकि नौकरी की तलाश में भटकने से बेहतर है कि युवा ‘खुद का व्यवसाय’ शुरू करें। केन्द्र की भाजपा सरकार ही नहीं, बल्कि अब मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार भी स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अपनी ‘नीतियों में बदलाव’ कर रही है।
 
सबसे पहले बात करें केन्द्र सरकार की तो उसने स्टार्टअप कम्पनियों को बड़ी ‘राहत’ देते हुए एंजल कर के नियमों में ढील देने का निर्णय लिया है। इसके तहत केन्द्र सरकार ने स्टार्टअप को आयकर छूट के लिए निवेश सीमा को बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए कर दिया है। यानि कि अब 25 करोड़ रुपए तक के निवेश पर स्टार्टअप कम्पनियों को इनकम टैक्स में छूट मिलेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक स्टार्टअप को 10 करोड़ रुपए तक के निवेश पर आयकर से छूट का प्रावधान है।
 
वहीं केन्द्र सरकार ने स्टार्टअप की ‘परिभाषा’ में भी ‘बदलाव’ किया है। अब उन इकाइयों को स्टार्टअप माना जाएगा जो अपने पंजीकरण या स्थापना के बाद 10 साल तक परिचालन कर रही हैं। इससे पहले यह समय सीमा सात साल की थी। वहीं किसी भी इकाई को स्टार्टअप तभी माना जाएगा जब उसका कारोबार पंजीकरण से लेकर अब तक किसी भी वित्त वर्ष में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं हो।
 
वहीं जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश सरकार अब स्टार्टअप और एमएसएमई की नीतियों में भी ‘बदलाव’ करने जा रही है। इसके तहत अब सरकारी खरीदी में स्टार्टअप को ‘प्राथमिकता’ दी जाएगी। कहा जा रहा है कि स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए कमलनाथ सरकार सरकारी खरीदी की नीतियों में बदलाव करने जा रही है ताकि स्टार्टअप के प्रति युवाओं में ‘रुझान’ बड़े।
 
नई पॉलिसी में यह प्रावधान हो सकते हैं कि यदि सरकारी खरीदी के लिए बने पोर्टल GEM के मुकाबले ‘सस्ता’ उत्पाद स्टार्टअप द्वारा मुहैया कराया जाएगा तो सरकार स्टार्टअप से ही सामान खरीदेगी। इतना ही नहीं, सरकार अपनी पॉलिसी में एक और प्रावधान जोड़ सकती है जिससे स्टार्टअप को वित्तीय सहायता मिल सके। जिसके तहत हो सकता है कि सरकार 10 करोड़ रुपये का फण्ड चुनिन्दा इंक्यूबेटर के लिए सुरक्षित रखे ताकि इस फण्ड की सहायता से शुरू होने वाले स्टार्टअप को आवश्यक वित्तीय मदद दी जा सके।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य सरकार ने स्टार्टअप की फण्डिंग के लिए 100 करोड़ रुपए का वेंचर फण्ड बनाया है, लेकिन सिर्फ़ पांच करोड़ रुपये का प्रावधान ही उसके लिए अभी किया गया है। कहा जाता है कि शर्तों के ज्यादा कठिन होने के कारण स्टार्टअप को इस फण्ड से बहुत ज्यादा मदद नहीं मिल सकी है।
 
कहा जा सकता है कि केन्द्र और राज्य सरकार की इन नीतियों के कारण स्टार्टअप को काफ़ी सहारा मिलेगा। कम होती नौकरियों के बीच स्टार्टअप ही नये रोजगार मुहैया करा सकता है। ऐसे में केन्द और राज्य सरकारें, स्टार्टअप को ‘प्रोत्साहन’ देने के लिए अपनी नीतियों में परिवर्तन कर रही हैं ताकि इसकी तरफ़ ज्यादा से ज्यादा लोगों को झुकाव हो और नौकरी के ‘नये’ अवसर मुहैया हो सकें।