व्यभिचार पर सुप्रीम कोर्ट के ‘फैसले’ के बाद भारत में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में ‘इजाफा’!
Monday - February 25, 2019 2:03 pm ,
Category : WTN HINDI
विवाहेत्तर सम्बन्धों में बढ़ी भारतीय महिलाओं की ‘रूचि’
बड़ा सवाल: क्या आधुनिकता की आड़ में उन्मुक्तता की ओर बढ़ रहा है भारतीय समाज?
FEB 25 (WTN) – अपने उच्च आदर्शवादी संस्कारों के लिए पहचाना जाने वाला भारतीय समाज धीरे-धीरे आधुनिकता की तरफ बढ़ता जा रहा है और इसका असर यह हो रहा है कि आए दिन विवाहेत्तर सम्बन्धों के और तलाक के मामले सामने आ रहे हैं जिसके कारण परिवार टूट रहे हैं। यह साफ है कि आधुनिकता के कारण भारत में उन्मुक्तता बढ़ रही है और जिसके कारण शादी के बाद जीवनसाथी के अलावा अन्य किसी से शारीरिक सम्बन्धों के प्रति अब लोगों में डर या झिझक नहीं रही।
ऐसा नहीं है कि विवाहेत्तर सम्बन्ध पहले नहीं थे, लेकिन पहले यह सब पर्दे के पीछे होता था यानि कि समाज का भय और बदनामी का डर लोगों में था। पर भारतीय समाज में बदलाव इस कदर आ गये हैं कि अब विवाहेत्तर सम्बन्धों को स्थापित करने में मदद करने के लिए भी बाकायदा वेबसाइट और मोबाइल ऐप लॉन्च हो गये हैं, और जिसका भरपूर इस्तेमाल भारतीय लोग कर रहे हैं जिसके इस्तेमाल में भारतीय महिलाएं भी पीछे नहीं हैं।
विवाहोत्तर सम्बन्धों पर आधारित वेबसाइट ग्लीडेन डॉट कॉम आजकल धीरे-धीरे भारत में काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है। महिलाओं द्वारा संचालित की जाने वाली इस वेबसाइट को साल 2009 में फ्रांस में शुरू किया गया था और साल 2017 में यह भारत में लॉन्च हुआ। पूरी दुनिया के बाद इस डेटिंग वेबसाइट पर भारतीय लोगों ने भी काफ़ी दिलचस्पी दिखाई और जानकारी के मुताबिक इस डेटिंग वेबसाइट पर क़रीब पांच लाख भारतीय लोग इस समय रजिस्टर्ड हैं। आपको जानकर शायद आश्चर्य होगा कि इसमें करीब 30 प्रतिशत महिलाएं हैं। वहीं बात करें पूरी दुनिया की तो पूरी दुनिया में इसके क़रीब 49 लाख रजिस्टर्ड यूजर्स हैं।
वैसे वेबसाइट के मुताबिक इस ऐप को उन्होंने महिलाओं के लिए ही बनाया है लेकिन इसमें पुरुष भी सदस्य बन सकते हैं। यह ऐप महिलाओं के लिए तो पूरी तरह से फ्री है, लेकिन पुरुषों के लिए इस ऐप में फ्री में रिजस्ट्रेशन के बाद अन्य जानकारियों के लिए 750 रुपये से लेकर 9500 रुपये तक चुकाने होते हैं। एक अनुमान के अनुसार 34 साल से लेकर 49 साल तक के लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।
वेबसाइट के मुताबिक भारतीय महिलाओं के बीच इस डेटिंग वेबसाइट की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों की मुताबिक कुल रिजस्टर्ड भारतीय लोगों में से पिछले साल 25 प्रतिशत महिलाएं इस वेबसाइट का इस्तेमाल करती थीं, तो अब यह संख्या बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई है यानि कि साफ है कि धीरे-धीरे भारतीय महिलाएं इस वेबसाइट के जरिये विवाहेत्तर सम्बन्धों की और बढ़ रही हैं।
वैसे इस वेबसाइट का दावा है कि वो अपने सदस्यों की पूरी पहचान छिपाता है। इस प्लेटफार्म पर आने के लिए सदस्य को अपनी वैवाहिक स्थिति, बच्चों की संख्या, व्यवसाय, आय, अपना फिगर, बालों का रंग और लम्बाई, आंखों का रंग और अपनी आदतों समेत कई अन्य जानकारियां देनी पड़ती हैं। इस वेबसाइट के सदस्य नियमानुसार आपस में एक दूसरे से सम्पर्क स्थापित कर सकते हैं।
इधर, समाजशास्त्रियों का इस बारे में कहना है कि भारत में व्यभिचार को अपराध न मानने के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद से भारत में इस ऐप के प्रति लोगों का रुझान काफ़ी देखा गया है और लोग खुलकर इस ऐप में रजिस्टर्ड हो रहे हैं। पश्चिमी देशों में विवाहेत्तर सम्बन्ध और तलाक आम बात है, लेकिन भारतीय समाज में अभी इन सब बातों को सहजता से स्वीकार नहीं किया जाता है। कहा जाता है कि अपने जीवनसाथी से शारीरिक संतुष्टि नहीं मिलने, जीवन साथी के बाहर रहने या फिर सिर्फ़ फन के लिए भारतीय समाज में इस तरह के ऐप के प्रति लोगों में रूचि देखी जा रही है।
FEB 25 (WTN) – अपने उच्च आदर्शवादी संस्कारों के लिए पहचाना जाने वाला भारतीय समाज धीरे-धीरे आधुनिकता की तरफ बढ़ता जा रहा है और इसका असर यह हो रहा है कि आए दिन विवाहेत्तर सम्बन्धों के और तलाक के मामले सामने आ रहे हैं जिसके कारण परिवार टूट रहे हैं। यह साफ है कि आधुनिकता के कारण भारत में उन्मुक्तता बढ़ रही है और जिसके कारण शादी के बाद जीवनसाथी के अलावा अन्य किसी से शारीरिक सम्बन्धों के प्रति अब लोगों में डर या झिझक नहीं रही।
ऐसा नहीं है कि विवाहेत्तर सम्बन्ध पहले नहीं थे, लेकिन पहले यह सब पर्दे के पीछे होता था यानि कि समाज का भय और बदनामी का डर लोगों में था। पर भारतीय समाज में बदलाव इस कदर आ गये हैं कि अब विवाहेत्तर सम्बन्धों को स्थापित करने में मदद करने के लिए भी बाकायदा वेबसाइट और मोबाइल ऐप लॉन्च हो गये हैं, और जिसका भरपूर इस्तेमाल भारतीय लोग कर रहे हैं जिसके इस्तेमाल में भारतीय महिलाएं भी पीछे नहीं हैं।
विवाहोत्तर सम्बन्धों पर आधारित वेबसाइट ग्लीडेन डॉट कॉम आजकल धीरे-धीरे भारत में काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है। महिलाओं द्वारा संचालित की जाने वाली इस वेबसाइट को साल 2009 में फ्रांस में शुरू किया गया था और साल 2017 में यह भारत में लॉन्च हुआ। पूरी दुनिया के बाद इस डेटिंग वेबसाइट पर भारतीय लोगों ने भी काफ़ी दिलचस्पी दिखाई और जानकारी के मुताबिक इस डेटिंग वेबसाइट पर क़रीब पांच लाख भारतीय लोग इस समय रजिस्टर्ड हैं। आपको जानकर शायद आश्चर्य होगा कि इसमें करीब 30 प्रतिशत महिलाएं हैं। वहीं बात करें पूरी दुनिया की तो पूरी दुनिया में इसके क़रीब 49 लाख रजिस्टर्ड यूजर्स हैं।
वैसे वेबसाइट के मुताबिक इस ऐप को उन्होंने महिलाओं के लिए ही बनाया है लेकिन इसमें पुरुष भी सदस्य बन सकते हैं। यह ऐप महिलाओं के लिए तो पूरी तरह से फ्री है, लेकिन पुरुषों के लिए इस ऐप में फ्री में रिजस्ट्रेशन के बाद अन्य जानकारियों के लिए 750 रुपये से लेकर 9500 रुपये तक चुकाने होते हैं। एक अनुमान के अनुसार 34 साल से लेकर 49 साल तक के लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।
वेबसाइट के मुताबिक भारतीय महिलाओं के बीच इस डेटिंग वेबसाइट की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों की मुताबिक कुल रिजस्टर्ड भारतीय लोगों में से पिछले साल 25 प्रतिशत महिलाएं इस वेबसाइट का इस्तेमाल करती थीं, तो अब यह संख्या बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई है यानि कि साफ है कि धीरे-धीरे भारतीय महिलाएं इस वेबसाइट के जरिये विवाहेत्तर सम्बन्धों की और बढ़ रही हैं।
वैसे इस वेबसाइट का दावा है कि वो अपने सदस्यों की पूरी पहचान छिपाता है। इस प्लेटफार्म पर आने के लिए सदस्य को अपनी वैवाहिक स्थिति, बच्चों की संख्या, व्यवसाय, आय, अपना फिगर, बालों का रंग और लम्बाई, आंखों का रंग और अपनी आदतों समेत कई अन्य जानकारियां देनी पड़ती हैं। इस वेबसाइट के सदस्य नियमानुसार आपस में एक दूसरे से सम्पर्क स्थापित कर सकते हैं।
इधर, समाजशास्त्रियों का इस बारे में कहना है कि भारत में व्यभिचार को अपराध न मानने के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद से भारत में इस ऐप के प्रति लोगों का रुझान काफ़ी देखा गया है और लोग खुलकर इस ऐप में रजिस्टर्ड हो रहे हैं। पश्चिमी देशों में विवाहेत्तर सम्बन्ध और तलाक आम बात है, लेकिन भारतीय समाज में अभी इन सब बातों को सहजता से स्वीकार नहीं किया जाता है। कहा जाता है कि अपने जीवनसाथी से शारीरिक संतुष्टि नहीं मिलने, जीवन साथी के बाहर रहने या फिर सिर्फ़ फन के लिए भारतीय समाज में इस तरह के ऐप के प्रति लोगों में रूचि देखी जा रही है।