सावधान! कहीं एप के जरिये आपका निजी डेटा तो नहीं हो रहा चोरी?
Thursday - March 7, 2019 10:46 am ,
Category : WTN HINDI
फेसबुक को यूजर्स का निजी डेटा ‘साझा’ कर रहे हैं कुछ एप
किसी भी एप का उपयोग करने से पहले रहें ‘सतर्क’, डाउनलोड करने से पहले लें उसके बारे में पूरी जानकारी
MAR 07 (WTN) – यदि आपके पास स्मार्ट फ़ोन है तो आप फेसबुक का उपयोग तो जरूर करते ही होंगे। लेकिन फेसबुक का उपयोग करते समय जरा सावधान रहें क्योंकि कहीं ऐसा ना हो कि कोई एप आपका निजी डेटा चोरी करके उसे बेच रहा हो। जी हां जैसा कि आप जानते हैं कि समय-समय पर फेसबुक पर आरोप लगता रहता है कि उसके प्लेटफार्म पर यूजर्स के डेटा को चोरी किया जाता है। वहीं अब आरोप है कि सर्च सर्विस येल्प और भाषा सिखाने वाले एप डुओलिंगो जैसे प्रमुख एंड्राएड एप्स अभी भी यूजर्स के पर्सनल डेटा को उनकी बगैर अनुमति के फेसबुक विज्ञापन ट्रैकिंग से साझा कर रहे हैं।
लंदन स्थित निगरानी संस्था पीआई यानि कि प्राइवेसी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मुस्लिम प्रार्थना के दो एप्स, बाइबिल के एक एप के अलावा जॉब सर्चिग एप इनडीड पर भी एडवर्टिजमेंट के मकसद से फेसबुक के डेटा तो साझा करने का आरोप लग चुका है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फेसबुक कॉल हिस्ट्री, रियल टाइम लोकेशन, विज्ञापन निगरानी, एसएमएस डेटा और फेसबुक कंटेंट लॉग्स जैसी जानकारियां अपने प्लेटफॉर्म पर फ्रेंड सजेशंस जैसे अन्य फ़ीचर्स को सुधारने के लिए एकत्रित करता रहता है। वहीं तरह-तरह के आईओएस एप-निर्माता संवेदनशील वित्तीय, फिटेनस और स्वास्थ्य सम्बन्धित जानकारियां सोशल नेटवर्क पर साझा करने के लिए कस्टम एप इवेंट्स नामक फेसबुक एनालिटिक्स का उपयोग करते हैं।
वहीं पीआई के मुताबिक फेसबुक डुओलिंग के सम्पर्क में है और कम्पनी इस तरह की कार्रवाई को बंद करने के लिए राजी हो गई है। पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह अभी साफ़ नहीं हो सका है कि एंड्राएड या आईओएस ईकोसिस्टम में और ऐसे कितने एप हैं, जो गूगल और एप्पल के संग्रहित डेटा को चुरा रहे हैं।
इधर इस बारे में फेसबुक का कहना है कि उसके पास जो भी जानकारियां पहुंच रही हैं, वह नियमानुसार ही पहुंच रही है। लगातार आलोचनाओं का सामना करे रहे फेसबुक ने दो दिन पहले मंगलवार को अपना नया फ़ीचर टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन जारी किया है, जिसके तहत यूजर्स से नए डिवाइस पर लॉगिन के लिए उसका मोबाइल नम्बर मांगा जा रहा है।
तो हमारी आपको सलाह है कि किसी भी एप का यूज करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी जुटा लें कि वो कहीं आपका निजी डेटा किसी के साथ शेयर तो नहीं कर रहा है। क्योंकि देखा गया है कि कई बार एप को डाउनलोड करने के बाद यूजर्स उसे एक्सेस देते जाते हैं लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं देते हैं कि डाउनलोड किया गया एप कहीं आपका निजी डेटा तो चोरी या साझा तो नहीं कर रहा है।
MAR 07 (WTN) – यदि आपके पास स्मार्ट फ़ोन है तो आप फेसबुक का उपयोग तो जरूर करते ही होंगे। लेकिन फेसबुक का उपयोग करते समय जरा सावधान रहें क्योंकि कहीं ऐसा ना हो कि कोई एप आपका निजी डेटा चोरी करके उसे बेच रहा हो। जी हां जैसा कि आप जानते हैं कि समय-समय पर फेसबुक पर आरोप लगता रहता है कि उसके प्लेटफार्म पर यूजर्स के डेटा को चोरी किया जाता है। वहीं अब आरोप है कि सर्च सर्विस येल्प और भाषा सिखाने वाले एप डुओलिंगो जैसे प्रमुख एंड्राएड एप्स अभी भी यूजर्स के पर्सनल डेटा को उनकी बगैर अनुमति के फेसबुक विज्ञापन ट्रैकिंग से साझा कर रहे हैं।
लंदन स्थित निगरानी संस्था पीआई यानि कि प्राइवेसी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मुस्लिम प्रार्थना के दो एप्स, बाइबिल के एक एप के अलावा जॉब सर्चिग एप इनडीड पर भी एडवर्टिजमेंट के मकसद से फेसबुक के डेटा तो साझा करने का आरोप लग चुका है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फेसबुक कॉल हिस्ट्री, रियल टाइम लोकेशन, विज्ञापन निगरानी, एसएमएस डेटा और फेसबुक कंटेंट लॉग्स जैसी जानकारियां अपने प्लेटफॉर्म पर फ्रेंड सजेशंस जैसे अन्य फ़ीचर्स को सुधारने के लिए एकत्रित करता रहता है। वहीं तरह-तरह के आईओएस एप-निर्माता संवेदनशील वित्तीय, फिटेनस और स्वास्थ्य सम्बन्धित जानकारियां सोशल नेटवर्क पर साझा करने के लिए कस्टम एप इवेंट्स नामक फेसबुक एनालिटिक्स का उपयोग करते हैं।
वहीं पीआई के मुताबिक फेसबुक डुओलिंग के सम्पर्क में है और कम्पनी इस तरह की कार्रवाई को बंद करने के लिए राजी हो गई है। पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह अभी साफ़ नहीं हो सका है कि एंड्राएड या आईओएस ईकोसिस्टम में और ऐसे कितने एप हैं, जो गूगल और एप्पल के संग्रहित डेटा को चुरा रहे हैं।
इधर इस बारे में फेसबुक का कहना है कि उसके पास जो भी जानकारियां पहुंच रही हैं, वह नियमानुसार ही पहुंच रही है। लगातार आलोचनाओं का सामना करे रहे फेसबुक ने दो दिन पहले मंगलवार को अपना नया फ़ीचर टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन जारी किया है, जिसके तहत यूजर्स से नए डिवाइस पर लॉगिन के लिए उसका मोबाइल नम्बर मांगा जा रहा है।
तो हमारी आपको सलाह है कि किसी भी एप का यूज करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी जुटा लें कि वो कहीं आपका निजी डेटा किसी के साथ शेयर तो नहीं कर रहा है। क्योंकि देखा गया है कि कई बार एप को डाउनलोड करने के बाद यूजर्स उसे एक्सेस देते जाते हैं लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं देते हैं कि डाउनलोड किया गया एप कहीं आपका निजी डेटा तो चोरी या साझा तो नहीं कर रहा है।