भारत की ‘कूटनीति’ हुई सफल, बुरी तरह फंसा पाकिस्तान
Thursday - March 7, 2019 12:38 pm ,
Category : WTN HINDI
एफएटीएफ लगा सकता है पाकिस्तान पर ‘पाबंदी’
आतंकी संगठनों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर ‘अंकुश’ लगाने पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव
MAR 07 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले और उसके बाद बालाकोट में भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पूरी दुनिया में पाकिस्तान सरकार की पोल खुल गई है। मोदी सरकार की कूटनीति का ही नतीजा है कि पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ता जा रहा है और यह दबाव इतना है कि यदि पाकिस्तान सरकार ने आतंकी संगठनों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर लगाम लगाने की कार्रवाई नहीं की तो एफएटीएफ यानि कि वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध तक लगा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एफएटीएफ की प्रतिबंध की कार्रवाई से बचने के लिए पाकिस्तान को मई तक अपने यहां पर मौजूद आतंकी संगठनों पर किसी भी हालत में कार्रवाई करना ही होगी। यदि पाकिस्तान ऐसा करने में असफल रहता है तो भारत के दवाब के बाद एफएटीएफ पाकिस्तान पर पाबंदी लगाने जैसी कठोर कार्रवाई भी कर सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पेरिस स्थित एफएटीएफ, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठनों के वित्त पोषण पर नजर रखने वाला एक संगठन है। पिछले साल यानि कि 2018 में संगठन ने पाकिस्तान को संदिग्ध देशों की सूची (ग्रे लिस्ट) से बाहर निकलने के लिये 40 सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया था। आतंकवादियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर अंकुश लगाने में विफल रहने के बाद, एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था।
जहां तक पाकिस्तान की बात है तो यह पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान की जमीन पर आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद के अलावा हथियारों की मदद मिलना आम बात है। ऐसे में पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव है कि वो एफएटीएफ की सिफारिशों के मुताबिक प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ निर्धारित समय में कार्रवाई करे नहीं तो प्रतिबंध के लिए तैयार रहे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान की कार्य योजना की हाल की बैठकों में समीक्षा करने वाला एफएटीएफ केा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह (आईसीआरजी) जनवरी 2019 के लिये निर्धारित लक्ष्यों के मामले में पाकिस्तान के काम से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं था। जानकारी के मुताबिक मनी लांड्रिंग निरोधक तथा आतंकवादियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर लगाम लगाने के मामले में पाकिस्तान द्वारा किये गये सुधार के बावजूद समूह ने असंतोष जताया था।
पाकिस्तान की कार्य योजना पर असंतोष जाहिर करते हुए एफएटीएफ ने पाकिस्तान से अपनी कार्य योजना पर अमल करने को कहा है। अब जून के महीने में एफएटीएफ पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों के वित्त पोषण को रोकने के कार्यों के मामले की समीक्षा करेगा। अब देखना होगा कि कर्ज में बुरी तरह से डूबा पाकिस्तान आतंकी संगठनों के वित्त पोषण पर पर क्या और कब तक कठोर कार्रवाई करता है।
MAR 07 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले और उसके बाद बालाकोट में भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पूरी दुनिया में पाकिस्तान सरकार की पोल खुल गई है। मोदी सरकार की कूटनीति का ही नतीजा है कि पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ता जा रहा है और यह दबाव इतना है कि यदि पाकिस्तान सरकार ने आतंकी संगठनों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर लगाम लगाने की कार्रवाई नहीं की तो एफएटीएफ यानि कि वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध तक लगा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एफएटीएफ की प्रतिबंध की कार्रवाई से बचने के लिए पाकिस्तान को मई तक अपने यहां पर मौजूद आतंकी संगठनों पर किसी भी हालत में कार्रवाई करना ही होगी। यदि पाकिस्तान ऐसा करने में असफल रहता है तो भारत के दवाब के बाद एफएटीएफ पाकिस्तान पर पाबंदी लगाने जैसी कठोर कार्रवाई भी कर सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पेरिस स्थित एफएटीएफ, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठनों के वित्त पोषण पर नजर रखने वाला एक संगठन है। पिछले साल यानि कि 2018 में संगठन ने पाकिस्तान को संदिग्ध देशों की सूची (ग्रे लिस्ट) से बाहर निकलने के लिये 40 सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया था। आतंकवादियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर अंकुश लगाने में विफल रहने के बाद, एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था।
जहां तक पाकिस्तान की बात है तो यह पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान की जमीन पर आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद के अलावा हथियारों की मदद मिलना आम बात है। ऐसे में पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव है कि वो एफएटीएफ की सिफारिशों के मुताबिक प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ निर्धारित समय में कार्रवाई करे नहीं तो प्रतिबंध के लिए तैयार रहे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान की कार्य योजना की हाल की बैठकों में समीक्षा करने वाला एफएटीएफ केा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह (आईसीआरजी) जनवरी 2019 के लिये निर्धारित लक्ष्यों के मामले में पाकिस्तान के काम से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं था। जानकारी के मुताबिक मनी लांड्रिंग निरोधक तथा आतंकवादियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर लगाम लगाने के मामले में पाकिस्तान द्वारा किये गये सुधार के बावजूद समूह ने असंतोष जताया था।
पाकिस्तान की कार्य योजना पर असंतोष जाहिर करते हुए एफएटीएफ ने पाकिस्तान से अपनी कार्य योजना पर अमल करने को कहा है। अब जून के महीने में एफएटीएफ पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों के वित्त पोषण को रोकने के कार्यों के मामले की समीक्षा करेगा। अब देखना होगा कि कर्ज में बुरी तरह से डूबा पाकिस्तान आतंकी संगठनों के वित्त पोषण पर पर क्या और कब तक कठोर कार्रवाई करता है।