लोकसभा चुनाव से पहले व्यापारियों को ‘खुश’ करने की मोदी सरकार की ‘कवायद’
Friday - March 8, 2019 12:36 pm ,
Category : WTN HINDI
छोटे कारोबारियों के ‘वोट बैंक’ के लिए मोदी सरकार की ‘रणनीति’
बड़ा सवाल: क्या व्यापारियों को ‘खुश’ करने में सफल हो पाएगी मोदी सरकार?
MAR 08 (WTN) – लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने छोटे और मझौले व्यापारियों को खुश करने कि लिए जो रणनीति बनाई थी उस पर अब सरकार ने अमल करना शुरू कर दिया है जिसके तहत मोदी सरकार ने जीएसटी में कई तरह की सुविधाएं व्यापारियों को देना शुरू कर दिया है। इसी के चलते छोटे व्यापारियों के जीएसटी में पंजीकरण से छूट के लिए वार्षिक कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 40 लाख रुपए किये जाने के फैसले को अधिसूचित कर दिया है जिसके बाद अब यह छूट एक अप्रैल से लागू होगी। सरकार का दावा है कि इससे छोटे और मझौले उद्यमों को लाभ मिलेगा। कहा जा रहा है कि सरकार के इस कदम से देश के लाखों व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण से छूट मिलेगी।
इतना ही नहीं, डेढ़ करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली इकाइयों की एक मुश्त कर (कंपोजीशन) की योजना भी एक अप्रैल से शुरू होने जा रही है। कहा जा रहा है इससे भी देश के लाखों व्यापारियों की बार-बार टैक्स भरने की दिक्कत खत्म हो जाएगी। इतना ही नहीं, सर्विस प्रोवाइडर और वस्तु और सर्विस प्रोवाइडर दोनों ही आपूर्तिकर्ता जीएसटी की एक मुश्त योजना का विकल्प अपनाने के लिये पात्र हैं और इसकी शुरूआत वे 6 प्रतिशत की दर से अगले वित्त वर्ष से कर सकते हैं पर इसके लिए एक शर्त है कि उन्हें ऐसा करने पर इनपुट कर का लाभ नहीं मिलेगा।
वहीं वस्तुओं के आपूर्तिकर्ताओं के लिये जीएसटी के तहत पंजीकरण और भुगतान से छूट के लिये दो सीमाएं रखी गई हैं। 40 लाख रुपये की एक सीमा और दूसरी सीमा 20 लाख रुपये की है, लेकिन राज्यों के पास एक सीमा अपनाने का विकल्प है।
वहीं सर्विस प्रोवाइडर के पंजीकरण के लिये सीमा 20 लाख रुपए और विशेष श्रेणी वाले राज्यों के मामले में यह सीमा 10 लाख रुपए है। साथ ही जीएसटी एक मुश्त योजना के तहत अब डेढ़ करोड़ रुपए वार्षिक कारोबार करने वाले आएंगे जबकि अभी तक यह सीमा एक करोड़ रुपये थी। इसके तहत व्यापारियों को एक प्रतिशत टैक्स देना होगा और यह नियम भी एक अप्रैल से लागू होगा।
राजनीति के जानकारों के मुताबिक यदि भाजपा को लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना है तो उसे देश के विशाल व्यापारी वर्ग को खुश करना ही होगा। नोटबंदी और जीएसटी के बाद से कहा जा रहा था कि व्यापारी वर्ग भाजपा से नाराज़ चल रहा है, ऐसे में भाजपा ने रणनीति के तहत काम किया और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले व्यापारियों को कई तरह से जीएसटी में राहत देने की कोशिश की है ताकि व्यापारियों को लोकसभा चुनाव से पहले अपने पक्ष में किया जा सके। अब देखना होगा कि मोदी सरकार की व्यापार सुलभ नीतियों और जीएसटी में व्यापारियों को राहत देने का कितना लाभ उसे लोकसभा चुनाव में मिलता है।
MAR 08 (WTN) – लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने छोटे और मझौले व्यापारियों को खुश करने कि लिए जो रणनीति बनाई थी उस पर अब सरकार ने अमल करना शुरू कर दिया है जिसके तहत मोदी सरकार ने जीएसटी में कई तरह की सुविधाएं व्यापारियों को देना शुरू कर दिया है। इसी के चलते छोटे व्यापारियों के जीएसटी में पंजीकरण से छूट के लिए वार्षिक कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 40 लाख रुपए किये जाने के फैसले को अधिसूचित कर दिया है जिसके बाद अब यह छूट एक अप्रैल से लागू होगी। सरकार का दावा है कि इससे छोटे और मझौले उद्यमों को लाभ मिलेगा। कहा जा रहा है कि सरकार के इस कदम से देश के लाखों व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण से छूट मिलेगी।
इतना ही नहीं, डेढ़ करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली इकाइयों की एक मुश्त कर (कंपोजीशन) की योजना भी एक अप्रैल से शुरू होने जा रही है। कहा जा रहा है इससे भी देश के लाखों व्यापारियों की बार-बार टैक्स भरने की दिक्कत खत्म हो जाएगी। इतना ही नहीं, सर्विस प्रोवाइडर और वस्तु और सर्विस प्रोवाइडर दोनों ही आपूर्तिकर्ता जीएसटी की एक मुश्त योजना का विकल्प अपनाने के लिये पात्र हैं और इसकी शुरूआत वे 6 प्रतिशत की दर से अगले वित्त वर्ष से कर सकते हैं पर इसके लिए एक शर्त है कि उन्हें ऐसा करने पर इनपुट कर का लाभ नहीं मिलेगा।
वहीं वस्तुओं के आपूर्तिकर्ताओं के लिये जीएसटी के तहत पंजीकरण और भुगतान से छूट के लिये दो सीमाएं रखी गई हैं। 40 लाख रुपये की एक सीमा और दूसरी सीमा 20 लाख रुपये की है, लेकिन राज्यों के पास एक सीमा अपनाने का विकल्प है।
वहीं सर्विस प्रोवाइडर के पंजीकरण के लिये सीमा 20 लाख रुपए और विशेष श्रेणी वाले राज्यों के मामले में यह सीमा 10 लाख रुपए है। साथ ही जीएसटी एक मुश्त योजना के तहत अब डेढ़ करोड़ रुपए वार्षिक कारोबार करने वाले आएंगे जबकि अभी तक यह सीमा एक करोड़ रुपये थी। इसके तहत व्यापारियों को एक प्रतिशत टैक्स देना होगा और यह नियम भी एक अप्रैल से लागू होगा।
राजनीति के जानकारों के मुताबिक यदि भाजपा को लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना है तो उसे देश के विशाल व्यापारी वर्ग को खुश करना ही होगा। नोटबंदी और जीएसटी के बाद से कहा जा रहा था कि व्यापारी वर्ग भाजपा से नाराज़ चल रहा है, ऐसे में भाजपा ने रणनीति के तहत काम किया और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले व्यापारियों को कई तरह से जीएसटी में राहत देने की कोशिश की है ताकि व्यापारियों को लोकसभा चुनाव से पहले अपने पक्ष में किया जा सके। अब देखना होगा कि मोदी सरकार की व्यापार सुलभ नीतियों और जीएसटी में व्यापारियों को राहत देने का कितना लाभ उसे लोकसभा चुनाव में मिलता है।