मध्य प्रदेश की आर्थिक हालत ‘खराब’ होने से ‘गड़बड़ाया’ वित्तीय प्रबंधन!
Wednesday - March 13, 2019 2:43 pm ,
Category : WTN HINDI
वित्त विभाग ने जारी किये दिशा निर्देश
मध्य प्रदेश: योजनाओं में खर्च ना हुई राशि को संचित निधि में जमा कराने के आदेश
MAR 13 (WTN) – मध्य प्रदेश की वित्तीय हालत धीरे-धीरे खराब होती जा रही है और इसके कारण आर्थिक संकट इस कदर गहरा गया है कि राज्य सरकार का पूरा वित्तीय प्रबंधन ही गड़बड़ा गया है। हालात यह हो गये हैं कि वित्त विभाग ने वित्तीय प्रबंधन के लिए नये सिरे से दिशा निर्देश जारी किये हैं। जानकारी के मुताबिक वित्त विभाग ने सभी विभागों से कहा है कि योजनाओं में जो भी राशि खर्च नहीं हुई है, उसे फौरन राज्य सरकार के खजाने में जमा किया जाए।

कर्ज पर कर्ज ले रही मध्य प्रदेश सरकार की वित्तीय हालत इस समय काफ़ी नाजुक स्थिति में है ऐसे में वित्त विभाग के फरमान के मुताबिक जैसा कि विभागीय अधिकारियों को व्यक्तिगत जमा खाता खोलने की परमिशन समय-समय पर दी जाती है और इन खातों में अलग-अलग योजनाओं की राशि रखी हुई है, ऐसे में योजना पूरी होने या चालू नहीं होने की दशा में बची हुई राशि सरकार को तुरन्त ही संचित निधि में जमा करा देना चाहिए, परंतु समय-समय पर यह नोटिस किया गया है कि कई विभागों द्वारा इस राशि को जमा नहीं कराया गया है। वित्त विभाग ने आदेश जारी किया है जिसने भी इस राशि को जमा नहीं कराया है वो इस राशि को तुरन्त जमा कराए। आदेश के अनुसार इन खातों में रखी राशि को सरकार की संचित निधि में जल्द से जल्द जमा किया जाए ताकि इन खातों को तुरन्त बंद कर दिया जाए।

वहीं वित्त विभाग ने आदेश जारी किया है कि जिन विभागों ने विभागाध्यक्ष स्तर पर चल रहे बैंक खातों के लिए वित्त विभाग से अनुमति हासिल नहीं की है, वे खाते भी तुरन्द ही बंद किए जाएंगे और इनकी राशि राज्य सरकार के खजाने में जमा कर दी जाएगी। वहीं कहा गया है कि जिन खातों के लिए अनुमति ली जा चुकी है, उनमें जमा पैसा भी संचित निधि में जमा किया जाए। लेकिन वहीं आयोग, विश्वविद्यालय और निगम-मंडल यदि अपने स्रोत से प्राप्त राशि को बैंक खातों में रखते हैं तो उन्हें यह खाता बंद करने की कोई जरूरत नहीं है।

इतना ही नहीं खराब वित्तीय हालत से गुजर रही राज्य सरकार के वित्त विभाग ने यह तक आदेश दिया है कि वे संस्थान, जहां राज्य सरकार की अंशपूंजी है और व्यावसायिक कार्य करते हैं, वे सभी अपना लाभांश भी सरकार के खाते में जमा करें। वहीं सर्विस प्रोवाइड कराने वाले नियामक आयोगों को भी आधिक्य राशि को संचित निधि में जमा कराने के आदेश दिये गये हैं।

बजट की कमी को देखते हुए सभी विभागों में होने वाली नियुक्तियों पर भी वित्त विभाग की पैनी नजर है। सीमित वित्तीय वित्तीय संसाधनों को देखते हुए निर्देश हैं कि विभागों में जो भी नियुक्तियां होंगी उसके पहले वित्त विभाग से आवश्यक रूप से सहमति लेना होगी। इसके अलावा वित्त विभाग ने निर्माण विभागों के बजट के लिए कुछ दिशा निर्देश जारी किये हैं।
MAR 13 (WTN) – मध्य प्रदेश की वित्तीय हालत धीरे-धीरे खराब होती जा रही है और इसके कारण आर्थिक संकट इस कदर गहरा गया है कि राज्य सरकार का पूरा वित्तीय प्रबंधन ही गड़बड़ा गया है। हालात यह हो गये हैं कि वित्त विभाग ने वित्तीय प्रबंधन के लिए नये सिरे से दिशा निर्देश जारी किये हैं। जानकारी के मुताबिक वित्त विभाग ने सभी विभागों से कहा है कि योजनाओं में जो भी राशि खर्च नहीं हुई है, उसे फौरन राज्य सरकार के खजाने में जमा किया जाए।

कर्ज पर कर्ज ले रही मध्य प्रदेश सरकार की वित्तीय हालत इस समय काफ़ी नाजुक स्थिति में है ऐसे में वित्त विभाग के फरमान के मुताबिक जैसा कि विभागीय अधिकारियों को व्यक्तिगत जमा खाता खोलने की परमिशन समय-समय पर दी जाती है और इन खातों में अलग-अलग योजनाओं की राशि रखी हुई है, ऐसे में योजना पूरी होने या चालू नहीं होने की दशा में बची हुई राशि सरकार को तुरन्त ही संचित निधि में जमा करा देना चाहिए, परंतु समय-समय पर यह नोटिस किया गया है कि कई विभागों द्वारा इस राशि को जमा नहीं कराया गया है। वित्त विभाग ने आदेश जारी किया है जिसने भी इस राशि को जमा नहीं कराया है वो इस राशि को तुरन्त जमा कराए। आदेश के अनुसार इन खातों में रखी राशि को सरकार की संचित निधि में जल्द से जल्द जमा किया जाए ताकि इन खातों को तुरन्त बंद कर दिया जाए।

वहीं वित्त विभाग ने आदेश जारी किया है कि जिन विभागों ने विभागाध्यक्ष स्तर पर चल रहे बैंक खातों के लिए वित्त विभाग से अनुमति हासिल नहीं की है, वे खाते भी तुरन्द ही बंद किए जाएंगे और इनकी राशि राज्य सरकार के खजाने में जमा कर दी जाएगी। वहीं कहा गया है कि जिन खातों के लिए अनुमति ली जा चुकी है, उनमें जमा पैसा भी संचित निधि में जमा किया जाए। लेकिन वहीं आयोग, विश्वविद्यालय और निगम-मंडल यदि अपने स्रोत से प्राप्त राशि को बैंक खातों में रखते हैं तो उन्हें यह खाता बंद करने की कोई जरूरत नहीं है।

इतना ही नहीं खराब वित्तीय हालत से गुजर रही राज्य सरकार के वित्त विभाग ने यह तक आदेश दिया है कि वे संस्थान, जहां राज्य सरकार की अंशपूंजी है और व्यावसायिक कार्य करते हैं, वे सभी अपना लाभांश भी सरकार के खाते में जमा करें। वहीं सर्विस प्रोवाइड कराने वाले नियामक आयोगों को भी आधिक्य राशि को संचित निधि में जमा कराने के आदेश दिये गये हैं।

बजट की कमी को देखते हुए सभी विभागों में होने वाली नियुक्तियों पर भी वित्त विभाग की पैनी नजर है। सीमित वित्तीय वित्तीय संसाधनों को देखते हुए निर्देश हैं कि विभागों में जो भी नियुक्तियां होंगी उसके पहले वित्त विभाग से आवश्यक रूप से सहमति लेना होगी। इसके अलावा वित्त विभाग ने निर्माण विभागों के बजट के लिए कुछ दिशा निर्देश जारी किये हैं।