इन्दौर, भोपाल या विदिशा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं दिग्विजय सिंह!
Monday - March 18, 2019 11:53 am ,
Category : WTN HINDI
दिग्विजय सिंह के सामने कांग्रेस के लिए ‘मुश्किल’ सीट से चुनाव लड़ने की ‘चुनौती’
लोकसभा चुनाव में ‘कड़े मुकाबले’ के बीच दिग्विजय सिंह की सीट पर ‘संशय’
MAR 18 (WTN) – कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के राजनीतिक गुरू कहे जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह इस बार पूरी दमखम के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार चुकी कांग्रेस इस बार जीत के लिए अपने सभी दिग्गजों को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रही है, और इसी के चलते कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सालों बाद लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

दिग्विजय सिंह के चुनाव लड़ने के संकेत खुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी दिये हैं, जब उन्होंने दिग्विजय सिंह से अपील की कि वे राज्य की ऐसी किसी सीट से चुनाव लड़ें जहां पर कांग्रेस का प्रदर्शन लोकसभा चुनाव में खराब रहा है। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट कर कहा है, “धन्यवाद कमल नाथ जी को जिन्होंने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमज़ोर सीटों पर लड़ने का आमंत्रण दिया। उन्होंने मुझे इस लायक समझा मैं उनका आभारी हूं।”

इस लोकसभा चुनाव में अपना पूरा दम लगा रही कांग्रेस को मध्य प्रदेश की एक-एक सीट काफ़ी मायने रखती है, तभी मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह के बारे में कहा था, “दिग्विजय सिंह कहां से चुनाव लड़ना चाहते हैं ये वे खुद तय करेंगे। लेकिन जो चार- पांच सीटें कड़ी चुनौती वाली हैं, जहां से कांग्रेस पिछले 30-35 सालों से हारती आई है, दिग्विजय सिंह से मेरा आग्रह है कि वे वहां से लड़ें।”

इधर आत्मविश्वास से भरे दिग्विजय सिंह का कहना है ''मैं राघौगढ़ की जनता की कृपा से साल 77 की जनता पार्टी की लहर में भी लड़कर जीत आया था। चुनौतियों को स्वीकार करना मेरी आदत है। जहां से भी मेरे नेता राहुल गांधी कहेंगे, मैं चुनाव लड़ने को तैयार हूं।''

वहीं, दिग्विजय सिंह के किसी मुश्किल सीट से चुनाव लड़ने के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान का पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी समर्थन किया है। इस बारे में सिंधिया का कहना है, “जिन सीटों पर हम कई सालों से जीत नहीं पाए हैं, वहां मजबूत प्रत्याशी उतारने की ज़रूरत है।”

अब जरा बात करते हैं मध्य प्रदेश की उन सीटों की जहां पर कांग्रेस का प्रदर्शन काफ़ी खराब रहा है, तो राज्य की तीन सीटें इन्दौर, भोपाल और विदिशा में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद ही निराशाजनक रहा है। इन तीनों ही सीटों पर कांग्रेस 1989 के लोकसभा चुनाव से लगातार हारती चली आ रही है। यही वो तीन सीटों हैं जिन्हें कांग्रेस अपने लिये सबसे बड़ी चुनौती मान रही है।

इन्दौर, भोपाल और विदिशा इन तीनों ही सीटों से दिग्विजय सिंह के चुनाव लड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा कि इन तीन परम्परागत सीटों पर उसे चुनौती देने के लिए दिग्विजय इन तीनों में से किसी एक सीट पर चुनाव लड़ सकते हैं। वैसे दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के लगातार दस सालों तक मुख्यमंत्री रहे हैं और उनका अच्छा जनाधार मध्य प्रदेश की जनता के बीच है, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि एअर स्ट्राइक के बाद मोदी लहर में इज़ाफ़ा होने के बाद उन्हें इन सीटों पर बहुत कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

वहीं खुद दिग्विजय सिंह को भी यह नहीं भूलना चाहिए कि 1989 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्यारेलाल खण्डेलवाल ने उन्हें उनके ही गढ़ राजगढ़ सीट से हराया था। अब देखना होगा कि आत्मविश्वास से भरपूर दिग्विजय सिंह इन्दौर, भोपाल और विदिशा में से किन सीट से चुनाव लड़ते हैं और यदि चुनाव लड़ते हैं तो जीत हासिल कर पाते हैं कि नहीं।

यदि दिग्विजय सिंह इन तीनों में से किसी एक सीट पर चुनाव लड़ते हैं, तो कहा जा सकता है कि दिग्विजय सिंह राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं और चुनौतियां स्वीकार करने में डरते नहीं हैं, लेकिन यदि वे राजगढ़ सीट से चुनाव लड़ते हैं तो उनके विरोधी उन पर आरोप लगाएंगे कि दिग्विजय सिंह भाजपा के गढ़ में चुनौती देने से पीछे हट गये। अब देखते हैं कि राहुल गांधी दिग्विजय सिंह को इन्दौर, भोपाल और विदिशा जैसी कठिन सीटों से चुनाव मैदान में उतारते हैं या फ़िर उनकी परम्परागत राजगढ़ सीट से उन्हें चुनाव लड़ाते हैं?
MAR 18 (WTN) – कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के राजनीतिक गुरू कहे जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह इस बार पूरी दमखम के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार चुकी कांग्रेस इस बार जीत के लिए अपने सभी दिग्गजों को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रही है, और इसी के चलते कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सालों बाद लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

दिग्विजय सिंह के चुनाव लड़ने के संकेत खुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी दिये हैं, जब उन्होंने दिग्विजय सिंह से अपील की कि वे राज्य की ऐसी किसी सीट से चुनाव लड़ें जहां पर कांग्रेस का प्रदर्शन लोकसभा चुनाव में खराब रहा है। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट कर कहा है, “धन्यवाद कमल नाथ जी को जिन्होंने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमज़ोर सीटों पर लड़ने का आमंत्रण दिया। उन्होंने मुझे इस लायक समझा मैं उनका आभारी हूं।”

इस लोकसभा चुनाव में अपना पूरा दम लगा रही कांग्रेस को मध्य प्रदेश की एक-एक सीट काफ़ी मायने रखती है, तभी मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह के बारे में कहा था, “दिग्विजय सिंह कहां से चुनाव लड़ना चाहते हैं ये वे खुद तय करेंगे। लेकिन जो चार- पांच सीटें कड़ी चुनौती वाली हैं, जहां से कांग्रेस पिछले 30-35 सालों से हारती आई है, दिग्विजय सिंह से मेरा आग्रह है कि वे वहां से लड़ें।”

इधर आत्मविश्वास से भरे दिग्विजय सिंह का कहना है ''मैं राघौगढ़ की जनता की कृपा से साल 77 की जनता पार्टी की लहर में भी लड़कर जीत आया था। चुनौतियों को स्वीकार करना मेरी आदत है। जहां से भी मेरे नेता राहुल गांधी कहेंगे, मैं चुनाव लड़ने को तैयार हूं।''

वहीं, दिग्विजय सिंह के किसी मुश्किल सीट से चुनाव लड़ने के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान का पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी समर्थन किया है। इस बारे में सिंधिया का कहना है, “जिन सीटों पर हम कई सालों से जीत नहीं पाए हैं, वहां मजबूत प्रत्याशी उतारने की ज़रूरत है।”

अब जरा बात करते हैं मध्य प्रदेश की उन सीटों की जहां पर कांग्रेस का प्रदर्शन काफ़ी खराब रहा है, तो राज्य की तीन सीटें इन्दौर, भोपाल और विदिशा में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद ही निराशाजनक रहा है। इन तीनों ही सीटों पर कांग्रेस 1989 के लोकसभा चुनाव से लगातार हारती चली आ रही है। यही वो तीन सीटों हैं जिन्हें कांग्रेस अपने लिये सबसे बड़ी चुनौती मान रही है।

इन्दौर, भोपाल और विदिशा इन तीनों ही सीटों से दिग्विजय सिंह के चुनाव लड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा कि इन तीन परम्परागत सीटों पर उसे चुनौती देने के लिए दिग्विजय इन तीनों में से किसी एक सीट पर चुनाव लड़ सकते हैं। वैसे दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के लगातार दस सालों तक मुख्यमंत्री रहे हैं और उनका अच्छा जनाधार मध्य प्रदेश की जनता के बीच है, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि एअर स्ट्राइक के बाद मोदी लहर में इज़ाफ़ा होने के बाद उन्हें इन सीटों पर बहुत कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

वहीं खुद दिग्विजय सिंह को भी यह नहीं भूलना चाहिए कि 1989 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्यारेलाल खण्डेलवाल ने उन्हें उनके ही गढ़ राजगढ़ सीट से हराया था। अब देखना होगा कि आत्मविश्वास से भरपूर दिग्विजय सिंह इन्दौर, भोपाल और विदिशा में से किन सीट से चुनाव लड़ते हैं और यदि चुनाव लड़ते हैं तो जीत हासिल कर पाते हैं कि नहीं।

यदि दिग्विजय सिंह इन तीनों में से किसी एक सीट पर चुनाव लड़ते हैं, तो कहा जा सकता है कि दिग्विजय सिंह राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं और चुनौतियां स्वीकार करने में डरते नहीं हैं, लेकिन यदि वे राजगढ़ सीट से चुनाव लड़ते हैं तो उनके विरोधी उन पर आरोप लगाएंगे कि दिग्विजय सिंह भाजपा के गढ़ में चुनौती देने से पीछे हट गये। अब देखते हैं कि राहुल गांधी दिग्विजय सिंह को इन्दौर, भोपाल और विदिशा जैसी कठिन सीटों से चुनाव मैदान में उतारते हैं या फ़िर उनकी परम्परागत राजगढ़ सीट से उन्हें चुनाव लड़ाते हैं?