इन्दौर लोकसभा सीट पर भाजपा में मचा ‘घमासान’!
Tuesday - March 19, 2019 11:41 am ,
Category : WTN HINDI
क्या कैलाश विजयवर्गीय करेंगे सुमित्रा महाजन के टिकट का विरोध?
बड़ा सवाल: क्या विरोध के कारण इन्दौर सीट पर सुमित्रा महाजन की जगह किसी और पर दांव खेलेगी भाजपा?
MAR 19 (WTN) – देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इन्दौर में इन दिनों लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है। बात करें इन्दौर लोकसभा सीट की, तो लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन इस सीट से साल 1989 से लगातार चुनाव जीतती आ रही हैं। लगातार एक ही सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर जहां एक तरफ़ सुमित्रा महाजन ने जीत का रिकॉर्ड बनाया है, तो वहीं दूसरी तरफ़ लोकसभा चुनाव में इस बार टिकट को लेकर अब उनकी ही पार्टी में उनका विरोध शुरू हो गया है।

कयास लगाए जा रहे थे कि लगातार तीस सालों से इन्दौर की सांसद रहीं सुमित्रा महाजन इस बार लोकसभा चुनाव के लिए शायद टिकट ना मांगे, लेकिन तमाम कयास धरे के धरे रह गये, जब इन्दौर लोकसभा सीट के लिए सुमित्रा महाजन ने अपनी दावेदारी दिल्ली में पेश कर दी। सुमित्रा महाजन के दावेदारी पेश करते ही इन्दौर भाजपा के नेताओं में खलबली सी मच गई है।

ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन को सबसे पहले चुनौती मिल सकती है भाजपा महासचिव और कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय से। इन्दौर की राजनीति को समझने वाला हर व्यक्ति यह जानता है कि सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय के बीच राजनीतिक वर्चस्व की हमेशा से लड़ाई रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इन्दौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए इस बार कैलाश विजयवर्गीय भी जोर आजमाइश कर सकते हैं।

समय-समय पर सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण उनके बीच के विवाद सार्वजनिक होते रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बार विधानसभा चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय ने खुद चुनाव नहीं लड़ा था और अपने बेटे को टिकट दिलाकर उसे जीत दिलाने में सफल रहे थे, लेकिन कहा जा रहा है कि अब कैलाश विजयवर्गीय खुद लोकसभा टिकट की डिमांड कर सकते हैं, जिसके कारण ताई यानि कि सुमित्रा महाजन के सामने मुसीबत खड़ी हो सकती है।

कैलाश विजयवर्गीय ही नहीं, बल्कि भाजपा के कई अन्य नेता भी इन्दौर जैसी भाजपा के लिए सुरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के अरमान लिये बैठे हैं। इन नेताओं में पूर्व भाजपा विधायक कवि सत्यनारायण सत्तन का नाम भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक, सत्तन सुमित्रा महाजन के खिलाफ निर्दलीय या फ़िर प्रवीण तोगड़िया की पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं।

इधर दबी जुबान में इन्दौर के भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी को इस बार सुमित्रा महाजन की जगह पर किसी और को टिकट देना चाहिए। यदि कैलाश विजयवर्गीय के अलावा टिकट के दावेदार अन्य नेताओं की बात करें, तो इन्दौर टिकट के कई दावेदारों के नाम सामने आते हैं, जैसे विधायक रमेश मैंदोला, ऊषा ठाकुर और मालिन लक्ष्मण सिंह गौड़।

लेकिन अपने ख़िलाफ़ उठ रहे विरोध के सुरों की परवाह किये बिना, सुमित्रा महाजन एक बार फ़िर से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। सुमित्रा महाजन ने पार्टी आलाकमान से मुलाक़ात कर बाक़ायदा चुनाव लड़ने की उनकी मंशा जाहिर कर दी है, और भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर उन्हें तैयारी के लिए जुटने भी कह दिया है।

इन्दौर लोकसभा सीट भाजपा की परम्परागत सीट मानी जाती है और सुमित्रा महाजन लगातार 30 सालों से यहां की सांसद हैं। खैर, इन्दौर भाजपा के नेता कितना भी विरोध कर लें, लेकिन लोकसभा स्पीकर का टिकट कटना फिलहाल नामुमकिन ही लग रहा है। जैसा सभी जानते हैं कि सुमित्रा महाजन प्रधानमंत्री मोदी की करीबी हैं, ऐसे में इस बार फ़िर से इन्दौर सीट से सुमित्रा महाजन का चुनाव लड़ना तय है।
MAR 19 (WTN) – देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इन्दौर में इन दिनों लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है। बात करें इन्दौर लोकसभा सीट की, तो लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन इस सीट से साल 1989 से लगातार चुनाव जीतती आ रही हैं। लगातार एक ही सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर जहां एक तरफ़ सुमित्रा महाजन ने जीत का रिकॉर्ड बनाया है, तो वहीं दूसरी तरफ़ लोकसभा चुनाव में इस बार टिकट को लेकर अब उनकी ही पार्टी में उनका विरोध शुरू हो गया है।

कयास लगाए जा रहे थे कि लगातार तीस सालों से इन्दौर की सांसद रहीं सुमित्रा महाजन इस बार लोकसभा चुनाव के लिए शायद टिकट ना मांगे, लेकिन तमाम कयास धरे के धरे रह गये, जब इन्दौर लोकसभा सीट के लिए सुमित्रा महाजन ने अपनी दावेदारी दिल्ली में पेश कर दी। सुमित्रा महाजन के दावेदारी पेश करते ही इन्दौर भाजपा के नेताओं में खलबली सी मच गई है।

ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन को सबसे पहले चुनौती मिल सकती है भाजपा महासचिव और कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय से। इन्दौर की राजनीति को समझने वाला हर व्यक्ति यह जानता है कि सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय के बीच राजनीतिक वर्चस्व की हमेशा से लड़ाई रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इन्दौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए इस बार कैलाश विजयवर्गीय भी जोर आजमाइश कर सकते हैं।

समय-समय पर सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण उनके बीच के विवाद सार्वजनिक होते रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बार विधानसभा चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय ने खुद चुनाव नहीं लड़ा था और अपने बेटे को टिकट दिलाकर उसे जीत दिलाने में सफल रहे थे, लेकिन कहा जा रहा है कि अब कैलाश विजयवर्गीय खुद लोकसभा टिकट की डिमांड कर सकते हैं, जिसके कारण ताई यानि कि सुमित्रा महाजन के सामने मुसीबत खड़ी हो सकती है।

कैलाश विजयवर्गीय ही नहीं, बल्कि भाजपा के कई अन्य नेता भी इन्दौर जैसी भाजपा के लिए सुरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के अरमान लिये बैठे हैं। इन नेताओं में पूर्व भाजपा विधायक कवि सत्यनारायण सत्तन का नाम भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक, सत्तन सुमित्रा महाजन के खिलाफ निर्दलीय या फ़िर प्रवीण तोगड़िया की पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं।

इधर दबी जुबान में इन्दौर के भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी को इस बार सुमित्रा महाजन की जगह पर किसी और को टिकट देना चाहिए। यदि कैलाश विजयवर्गीय के अलावा टिकट के दावेदार अन्य नेताओं की बात करें, तो इन्दौर टिकट के कई दावेदारों के नाम सामने आते हैं, जैसे विधायक रमेश मैंदोला, ऊषा ठाकुर और मालिन लक्ष्मण सिंह गौड़।

लेकिन अपने ख़िलाफ़ उठ रहे विरोध के सुरों की परवाह किये बिना, सुमित्रा महाजन एक बार फ़िर से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। सुमित्रा महाजन ने पार्टी आलाकमान से मुलाक़ात कर बाक़ायदा चुनाव लड़ने की उनकी मंशा जाहिर कर दी है, और भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर उन्हें तैयारी के लिए जुटने भी कह दिया है।

इन्दौर लोकसभा सीट भाजपा की परम्परागत सीट मानी जाती है और सुमित्रा महाजन लगातार 30 सालों से यहां की सांसद हैं। खैर, इन्दौर भाजपा के नेता कितना भी विरोध कर लें, लेकिन लोकसभा स्पीकर का टिकट कटना फिलहाल नामुमकिन ही लग रहा है। जैसा सभी जानते हैं कि सुमित्रा महाजन प्रधानमंत्री मोदी की करीबी हैं, ऐसे में इस बार फ़िर से इन्दौर सीट से सुमित्रा महाजन का चुनाव लड़ना तय है।