मध्य प्रदेश सरकार की आर्थिक हालत बिगड़ी, वित्तीय प्रबंधन की राह अपनाने पर ज़ोर
Wednesday - March 20, 2019 2:43 pm ,
Category : WTN HINDI
गैरज़रूरी खर्चों पर लगाम लगाने की तैयारी में कमलनाथ सरकार
कमाऊ विभागों से राजस्व जुटाने की जुगाड़ में मध्य प्रदेश सरकार
MAR 20 (WTN) – मध्य प्रदेश सरकार की बिगड़ी हुई आर्थिक हालत किसी से छिपी हुई नहीं है, कर्ज पर कर्ज ले रही कमलनाथ सरकार को कर्मचारियों के वेतन के लिए भी परेशानियों का सामना पड़ रहा है। इस सबके बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट की तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि कई विभागों के बजट में भारी कटौती की जाएगी, और इसके लिए विभागीय मंत्रियों से उनकी प्राथमिकताएं पूछी जा रही हैं।
जानकारी के मुताबिक़, वित्तमंत्री तरुण भनोट ने सभी विभागीय मंत्रियों को पत्र लिखकर उनके विभागों में चल रही योजनाओं की समीक्षा करने के साथ-साथ, मंत्रियों से उन योजनाओं की प्राथमिकता तय करने की सिफारिश करने को कहा है। वहीं जिन विभागों से सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है, उन विभागों से कहा गया है कि वे नये उपाय बताएं, जिससे और अधिक राजस्व प्राप्त किया जा सके।
लोक लुभावन योजनाओं के चलते मध्य प्रदेश की वित्तीय हालत दिनों दिन खराब होती जा रही है। जानकारी के मुताबिक़, राज्य के खजाने की हालत यह है कि नगरीय निकायों को चुंगी कर से मिलने वाली करोड़ों रुपए की राशि रोक ली गई है, और इसके कारण नगरीय निकायों में वेतन तक नहीं बंट पा रहा है। बात करें पीडब्ल्यूडी विभाग की, तो यहां पर दो महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है।
मध्य प्रदेश की दिनों दिन बिगड़ती वित्तीय हालत के कारण कई बड़े बिलों का भुगतान भी रुका हुआ है। इधर, राज्य के ऊपर का कर्ज भी बढ़कर क़रीब पौने दो लाख करोड़ रुपए के ऊपर पहुंच गया है। इस भयावह स्थिति से निपटने और कल्याणकारी विभागीय योजनाओं को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए वित्त विभाग ने सभी विभागों से कहा है कि फालूत के खर्चे पर लगाम लगाई जाए।
कमलनाथ सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपना वचन पत्र है, जो कि उन्होंने मध्य प्रदेश के मतदाताओं को विधानसभा चुनाव के समय दिया था। लोकसभा चुनाव तक वचन पत्र के वायदों पर अमल करना कमलनाथ सरकार की मज़बूरी है, इसलिए राजस्व जुटाने वाले विभागों के मंत्रियों से कहा गया है कि वे ज़्यादा से ज़्यादा राजस्व जुटाने के उपाय बताएं, ताकि वचन पत्र में किये गये वादों को पूरा करने के लिए राजस्व मिल सके।
जिस तरह से राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति है, उससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार का अपने पहले पूर्ण बजट में पूरा जोर वित्तीय प्रबंधन पर रहेगा। कल्याणकारी कार्यों के लिए विभागों को राशि तो दी जाएगी, लेकिन गैरज़रूरी खर्चों पर रोक लगाना राज्य सरकार की प्राथमिकता रहेगी।
कहा जा रहा है कि विभागीय योजनाओं की समीक्षा के बाद, जल्द ही आयोग, निगम, मंडल, प्राधिकरण, समिति और परिषदों के कामकाज की भी पूरी समीक्षा की जाएगी, ताकि वहां पर भी वित्तीय प्रबंधन के काम को अंजाम दिया जा सके। जिस तरह से राज्य की वित्तीय हालत गड़बड़ाई हुई है, उससे यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वचन पत्र में किये गये वादों को पूरा करना मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
MAR 20 (WTN) – मध्य प्रदेश सरकार की बिगड़ी हुई आर्थिक हालत किसी से छिपी हुई नहीं है, कर्ज पर कर्ज ले रही कमलनाथ सरकार को कर्मचारियों के वेतन के लिए भी परेशानियों का सामना पड़ रहा है। इस सबके बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट की तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि कई विभागों के बजट में भारी कटौती की जाएगी, और इसके लिए विभागीय मंत्रियों से उनकी प्राथमिकताएं पूछी जा रही हैं।
जानकारी के मुताबिक़, वित्तमंत्री तरुण भनोट ने सभी विभागीय मंत्रियों को पत्र लिखकर उनके विभागों में चल रही योजनाओं की समीक्षा करने के साथ-साथ, मंत्रियों से उन योजनाओं की प्राथमिकता तय करने की सिफारिश करने को कहा है। वहीं जिन विभागों से सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है, उन विभागों से कहा गया है कि वे नये उपाय बताएं, जिससे और अधिक राजस्व प्राप्त किया जा सके।
लोक लुभावन योजनाओं के चलते मध्य प्रदेश की वित्तीय हालत दिनों दिन खराब होती जा रही है। जानकारी के मुताबिक़, राज्य के खजाने की हालत यह है कि नगरीय निकायों को चुंगी कर से मिलने वाली करोड़ों रुपए की राशि रोक ली गई है, और इसके कारण नगरीय निकायों में वेतन तक नहीं बंट पा रहा है। बात करें पीडब्ल्यूडी विभाग की, तो यहां पर दो महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है।
मध्य प्रदेश की दिनों दिन बिगड़ती वित्तीय हालत के कारण कई बड़े बिलों का भुगतान भी रुका हुआ है। इधर, राज्य के ऊपर का कर्ज भी बढ़कर क़रीब पौने दो लाख करोड़ रुपए के ऊपर पहुंच गया है। इस भयावह स्थिति से निपटने और कल्याणकारी विभागीय योजनाओं को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए वित्त विभाग ने सभी विभागों से कहा है कि फालूत के खर्चे पर लगाम लगाई जाए।
कमलनाथ सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपना वचन पत्र है, जो कि उन्होंने मध्य प्रदेश के मतदाताओं को विधानसभा चुनाव के समय दिया था। लोकसभा चुनाव तक वचन पत्र के वायदों पर अमल करना कमलनाथ सरकार की मज़बूरी है, इसलिए राजस्व जुटाने वाले विभागों के मंत्रियों से कहा गया है कि वे ज़्यादा से ज़्यादा राजस्व जुटाने के उपाय बताएं, ताकि वचन पत्र में किये गये वादों को पूरा करने के लिए राजस्व मिल सके।
जिस तरह से राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति है, उससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार का अपने पहले पूर्ण बजट में पूरा जोर वित्तीय प्रबंधन पर रहेगा। कल्याणकारी कार्यों के लिए विभागों को राशि तो दी जाएगी, लेकिन गैरज़रूरी खर्चों पर रोक लगाना राज्य सरकार की प्राथमिकता रहेगी।
कहा जा रहा है कि विभागीय योजनाओं की समीक्षा के बाद, जल्द ही आयोग, निगम, मंडल, प्राधिकरण, समिति और परिषदों के कामकाज की भी पूरी समीक्षा की जाएगी, ताकि वहां पर भी वित्तीय प्रबंधन के काम को अंजाम दिया जा सके। जिस तरह से राज्य की वित्तीय हालत गड़बड़ाई हुई है, उससे यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वचन पत्र में किये गये वादों को पूरा करना मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।