मध्य प्रदेश में भाजपा के आधे से ज़्यादा मौजूदा सांसदों का कट सकता है टिकट
Friday - March 22, 2019 2:05 pm ,
Category : WTN HINDI
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह लगाएंगे प्रत्याशियों के नामों पर ‘अन्तिम मुहर’
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा ‘सतर्क’, सर्वे में ‘पास’ होने के बाद ही मिल सकता है लोकसभा चुनाव का टिकट!
MAR 22 (WTN) – लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मियों के बीच, भाजपा ने लोकसभा चुनाव लड़ने वाले अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। भाजपा की पहली सूची में 184 नामों की घोषणा की गई है, हालांकि इस सूची में मध्य प्रदेश से एक भी नाम नहीं हैं, जिसके बाद चर्चाओं का दौर जारी है कि भाजपा मध्य प्रदेश की सीटों पर प्रत्याशियों के नाम कब तक घोषित करती है।
कहा जा रहा है कि भाजपा जल्द ही मध्य प्रदेश से चुनाव लड़ने वाले अपने प्रत्याशियों की सूची जारी करेगी, लेकिन वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, भाजपा अपने कई मौजूदा सांसदों के टिकट काट सकती है। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में हार के बाद सतर्क भाजपा ने लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण में काफ़ी विचार करने का फ़ैसला लिया है।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, सर्वे और भाजपा की आंतरिक रिपोर्ट पर यदि भाजपा अमल करती है, तो मध्य प्रदेश में भाजपा के क़रीब 14 मौजूदा सांसदों का टिकट कट सकता है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सर्वे और फीडबैक को दरकिनार करने, और उसके कारण हार से सहमी भाजपा, लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं दिख रही है।
कहा जा रहा है कि सर्वे और फीडबैक में पता चला है कि भाजपा के वर्तमान 14 सासंदों के ख़िलाफ़ जनता का निगेटिव रिस्पांस है और जनता स्थानीय सांसद के कामों से खुश नहीं है। वहीं नमो एप के जरिए हुए सर्वे में भी कई सांसदों का कामकाज संतोषजनक नहीं रहा है, और इसकी रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को है। जिसके बाद कहा जा रहा है कि भाजपा मध्य प्रदेश में अपने कई सांसदों के टिकट काट सकती है।
पूर्व नौकरशाह रहे भिण्ड सांसद डॉ भागीरथ प्रसाद का टिकट कटना इस बार तय लग रहा है, वहीं उम्रदराज सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव और शहडोल सांसद ज्ञान सिंह के टिकट पर भी तलवार लटक रही है। इधर बालाघाट सांसद बोध सिंह भगत और जाति प्रमाणपत्र मामले में फजीहत करा चुंकी बैतूल सांसद ज्योति धुर्वे का भी टिकट कट सकता है।
वहीं कम सक्रिय खरगोन सांसद सुभाष पटेल और धार सांसद सावित्री ठाकुर का फीडबैक भी निराजाजनक रहा है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि इन्हें भी शायद ही एक बार फ़िर से टिकट मिले। साथ ही मन्दसौर सांसद सुधीर गुप्ता, भोपाल सांसद आलोक संजर, राजगढ़ सांसद रोडमल नागर और होशंगाबाद सांसद राव उदय प्रताप सिंह को टिकट मिलने पर संशय है क्योंकि ये सांसद अपने-अपने लोकसभा क्षेत्र और संसद मे ज़्यादा सक्रिय नहीं रहे हैं।
वहीं तीन अन्य सांसदों की बात करें, तो देवास सांसद मनोहर ऊंटवाल और खजुराहो सांसद नागेंद्र सिंह विधायक बन चुके हैं। ऐसे में जानकारी के मुताबिक़, इन दोनों ही विधायकों को भाजपा फ़िर से टिकट नहीं देगी। वहीं विदिशा सांसद सुषमा स्वराज खुद चुनाव लड़ने से मना कर चुकी हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के कारण मध्य प्रदेश में भाजपा ने 29 में से 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं रतलाम-झाबुआ सीट पर हुए उपचुनाव के बाद इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी, जिसके बाद मध्य प्रदेश में भाजपा के 26 सासंद रह गये थे। अब जबकि भाजपा, 26 में से क़रीब 14 सांसदों के टिकट काटने जा रही है, तो ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन 14 सीटों पर भाजपा पुराने चेहरों पर दांव खेलती है या फिर नये चेहरों को मैदान में उतारती है?
MAR 22 (WTN) – लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मियों के बीच, भाजपा ने लोकसभा चुनाव लड़ने वाले अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। भाजपा की पहली सूची में 184 नामों की घोषणा की गई है, हालांकि इस सूची में मध्य प्रदेश से एक भी नाम नहीं हैं, जिसके बाद चर्चाओं का दौर जारी है कि भाजपा मध्य प्रदेश की सीटों पर प्रत्याशियों के नाम कब तक घोषित करती है।
कहा जा रहा है कि भाजपा जल्द ही मध्य प्रदेश से चुनाव लड़ने वाले अपने प्रत्याशियों की सूची जारी करेगी, लेकिन वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, भाजपा अपने कई मौजूदा सांसदों के टिकट काट सकती है। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में हार के बाद सतर्क भाजपा ने लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण में काफ़ी विचार करने का फ़ैसला लिया है।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, सर्वे और भाजपा की आंतरिक रिपोर्ट पर यदि भाजपा अमल करती है, तो मध्य प्रदेश में भाजपा के क़रीब 14 मौजूदा सांसदों का टिकट कट सकता है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सर्वे और फीडबैक को दरकिनार करने, और उसके कारण हार से सहमी भाजपा, लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं दिख रही है।
कहा जा रहा है कि सर्वे और फीडबैक में पता चला है कि भाजपा के वर्तमान 14 सासंदों के ख़िलाफ़ जनता का निगेटिव रिस्पांस है और जनता स्थानीय सांसद के कामों से खुश नहीं है। वहीं नमो एप के जरिए हुए सर्वे में भी कई सांसदों का कामकाज संतोषजनक नहीं रहा है, और इसकी रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को है। जिसके बाद कहा जा रहा है कि भाजपा मध्य प्रदेश में अपने कई सांसदों के टिकट काट सकती है।
पूर्व नौकरशाह रहे भिण्ड सांसद डॉ भागीरथ प्रसाद का टिकट कटना इस बार तय लग रहा है, वहीं उम्रदराज सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव और शहडोल सांसद ज्ञान सिंह के टिकट पर भी तलवार लटक रही है। इधर बालाघाट सांसद बोध सिंह भगत और जाति प्रमाणपत्र मामले में फजीहत करा चुंकी बैतूल सांसद ज्योति धुर्वे का भी टिकट कट सकता है।
वहीं कम सक्रिय खरगोन सांसद सुभाष पटेल और धार सांसद सावित्री ठाकुर का फीडबैक भी निराजाजनक रहा है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि इन्हें भी शायद ही एक बार फ़िर से टिकट मिले। साथ ही मन्दसौर सांसद सुधीर गुप्ता, भोपाल सांसद आलोक संजर, राजगढ़ सांसद रोडमल नागर और होशंगाबाद सांसद राव उदय प्रताप सिंह को टिकट मिलने पर संशय है क्योंकि ये सांसद अपने-अपने लोकसभा क्षेत्र और संसद मे ज़्यादा सक्रिय नहीं रहे हैं।
वहीं तीन अन्य सांसदों की बात करें, तो देवास सांसद मनोहर ऊंटवाल और खजुराहो सांसद नागेंद्र सिंह विधायक बन चुके हैं। ऐसे में जानकारी के मुताबिक़, इन दोनों ही विधायकों को भाजपा फ़िर से टिकट नहीं देगी। वहीं विदिशा सांसद सुषमा स्वराज खुद चुनाव लड़ने से मना कर चुकी हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के कारण मध्य प्रदेश में भाजपा ने 29 में से 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं रतलाम-झाबुआ सीट पर हुए उपचुनाव के बाद इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी, जिसके बाद मध्य प्रदेश में भाजपा के 26 सासंद रह गये थे। अब जबकि भाजपा, 26 में से क़रीब 14 सांसदों के टिकट काटने जा रही है, तो ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन 14 सीटों पर भाजपा पुराने चेहरों पर दांव खेलती है या फिर नये चेहरों को मैदान में उतारती है?