फेसबुक पर प्रचार के मामले में भाजपा ने सभी पार्टियों को ‘पछाड़ा’
Thursday - March 28, 2019 10:38 am ,
Category : WTN HINDI
लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया पर ‘ज्यादा ध्यान’ दे रही है भाजपा
भाजपा के रणनीतिकारों ने सोशल मीडिया के जरिये प्रचार पर दिया ‘जोर’
MAY 28 (WTN) – एक समय था जब चुनाव प्रचार के लिए पेम्पलेट, नुक्कड़ सभाओं और लाउड स्पीकर जैसे ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग किया जाता था, लेकिन समय बदला तो समय के साथ-साथ चुनाव प्रचार के साधन भी बदले। अब चुनाव प्रचार का स्थान पेम्पलेट और ध्वनि विस्तारक यंत्रों की जगह बहुत कुछ सोशल मीडिया ने ले लिया है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में होने लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार का काम जोरों पर है, और सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर विज्ञापनों के जरिये चुनाव प्रचार के काम ने तेज़ी पकड़ ली है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए, फेसबुक पर भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थक जमकर विज्ञापन दे रहे हैं, और इस मामले में ये दूसरे दलों और अन्य लोगों से काफ़ी आगे हैं। चुनाव के मद्देनज़र, फेसबुक पर विज्ञापन व्यय बढ़कर 8.38 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें भाजपा और उसके समर्थकों की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा है।

मीडिया के मिली जानकारी के मुताबिक़, फेसबुक की एड लाइब्रेरी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल फरवरी से लेकर 16 मार्च, 2019 तक फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापनों की संख्या 34,048 रही। इन विज्ञापनों पर कुल 6.88 करोड़ रुपए खर्च किये गये। वहीं 23 मार्च तक यह संख्या बढ़कर 41,514 हो गई, जबकि कुल खर्च 8.38 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, 23 मार्च, 2019 को समाप्त सप्ताह में, भारत में फेसबुक पर राजनीति और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों से जुड़े विज्ञापनों की संख्या 7,400 से अधिक हो गई।

फेसबुक से मिली जानकारी के अनुसार, 'भारत के मन की बात' पेज पर विज्ञापन के लिए सबसे ज़्यादा खर्च किया गया है। इस पेज पर दो श्रेणियों के अंतर्गत, 3,700 से अधिक विज्ञापन आये और 2.23 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किये गये। इस दौरान भाजपा ने करीब 600 विज्ञापन दिये और 7 लाख रुपए खर्च किये, जबकि अन्य पेज, जैसे 'माई फर्स्ट वोट फार मोदी' और 'नेशन विद नमो' पर भी काफी रुपया विज्ञापन के लिए खर्च किया गया है।

भाजपा के अलावा यदि बात करें कांग्रेस की, तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पेज पर 410 विज्ञापन हैं, और इस पर फरवरी से मार्च के दौरान 5.91 लाख रुपए का विज्ञापन खर्च आया। फेसबुक ने फरवरी में ही साफ़ कर दिया था कि उसके मंच पर दिये गये राजनीतिक विज्ञापनों के बारे में वो पूरी जानकारी देगा।

कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया ने राजनीतिक विज्ञापनों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। सोशल मीडिया कम्पनियों का मानना है कि जिन विज्ञापनों को लोग देख रहे हैं, उसके बारे में उन्हें जानने की जरूरत है कि इन विज्ञापनों को किसने दिया है और उनका इन विज्ञापनों के पीछे उद्देश्य क्या है।

सोशल मीडिया के जरिये मार्केटिंग में हमेशा से ही भाजपा आगे रही है। भाजपा के चुनावी रणनीतिकार अच्छी तरह से जानते हैं कि आजकल हर हाथ में मोबाइल है और हर मोबाइल में फेसबुक है। आजकल की बिजी लाइफ स्टाइल में लोगों के पास समय नहीं है कि वे टीवी पर ज़्यादा समय गुजारें। ऐसे में भाजपा ने सोशल मीडिया के जरिये चुनाव प्रचार पर ज्यादा ध्यान दिया है, ताकि वो अपनी बात हर उस व्यक्ति तक पहुंचाने में सफल रहे जो फेसबुक पर सक्रिय है।
MAY 28 (WTN) – एक समय था जब चुनाव प्रचार के लिए पेम्पलेट, नुक्कड़ सभाओं और लाउड स्पीकर जैसे ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग किया जाता था, लेकिन समय बदला तो समय के साथ-साथ चुनाव प्रचार के साधन भी बदले। अब चुनाव प्रचार का स्थान पेम्पलेट और ध्वनि विस्तारक यंत्रों की जगह बहुत कुछ सोशल मीडिया ने ले लिया है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में होने लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार का काम जोरों पर है, और सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर विज्ञापनों के जरिये चुनाव प्रचार के काम ने तेज़ी पकड़ ली है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए, फेसबुक पर भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थक जमकर विज्ञापन दे रहे हैं, और इस मामले में ये दूसरे दलों और अन्य लोगों से काफ़ी आगे हैं। चुनाव के मद्देनज़र, फेसबुक पर विज्ञापन व्यय बढ़कर 8.38 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें भाजपा और उसके समर्थकों की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा है।

मीडिया के मिली जानकारी के मुताबिक़, फेसबुक की एड लाइब्रेरी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल फरवरी से लेकर 16 मार्च, 2019 तक फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापनों की संख्या 34,048 रही। इन विज्ञापनों पर कुल 6.88 करोड़ रुपए खर्च किये गये। वहीं 23 मार्च तक यह संख्या बढ़कर 41,514 हो गई, जबकि कुल खर्च 8.38 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, 23 मार्च, 2019 को समाप्त सप्ताह में, भारत में फेसबुक पर राजनीति और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों से जुड़े विज्ञापनों की संख्या 7,400 से अधिक हो गई।

फेसबुक से मिली जानकारी के अनुसार, 'भारत के मन की बात' पेज पर विज्ञापन के लिए सबसे ज़्यादा खर्च किया गया है। इस पेज पर दो श्रेणियों के अंतर्गत, 3,700 से अधिक विज्ञापन आये और 2.23 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किये गये। इस दौरान भाजपा ने करीब 600 विज्ञापन दिये और 7 लाख रुपए खर्च किये, जबकि अन्य पेज, जैसे 'माई फर्स्ट वोट फार मोदी' और 'नेशन विद नमो' पर भी काफी रुपया विज्ञापन के लिए खर्च किया गया है।

भाजपा के अलावा यदि बात करें कांग्रेस की, तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पेज पर 410 विज्ञापन हैं, और इस पर फरवरी से मार्च के दौरान 5.91 लाख रुपए का विज्ञापन खर्च आया। फेसबुक ने फरवरी में ही साफ़ कर दिया था कि उसके मंच पर दिये गये राजनीतिक विज्ञापनों के बारे में वो पूरी जानकारी देगा।

कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया ने राजनीतिक विज्ञापनों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। सोशल मीडिया कम्पनियों का मानना है कि जिन विज्ञापनों को लोग देख रहे हैं, उसके बारे में उन्हें जानने की जरूरत है कि इन विज्ञापनों को किसने दिया है और उनका इन विज्ञापनों के पीछे उद्देश्य क्या है।

सोशल मीडिया के जरिये मार्केटिंग में हमेशा से ही भाजपा आगे रही है। भाजपा के चुनावी रणनीतिकार अच्छी तरह से जानते हैं कि आजकल हर हाथ में मोबाइल है और हर मोबाइल में फेसबुक है। आजकल की बिजी लाइफ स्टाइल में लोगों के पास समय नहीं है कि वे टीवी पर ज़्यादा समय गुजारें। ऐसे में भाजपा ने सोशल मीडिया के जरिये चुनाव प्रचार पर ज्यादा ध्यान दिया है, ताकि वो अपनी बात हर उस व्यक्ति तक पहुंचाने में सफल रहे जो फेसबुक पर सक्रिय है।