...तो फ़िर 23 मई को नहीं बल्कि 6 से 9 दिन देरी से आएंगे लोकसभा चुनाव परिणाम
Saturday - March 30, 2019 2:31 pm ,
Category : WTN HINDI
निर्वाचन आयोग और विपक्षी नेताओं के बीच VVPAT-EVM मिलान को लेकर ‘तकरार’
VVPAT-EVM मिलान की नई व्यवस्था की मांग का निर्वाचन आयोग ने किया विरोध
MAR 30 (WTN) – विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र भारत में होने जा रहे लोकसभा चुनाव पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। सभी को 23 मई को आने वाले चुनाव परिमाण का इंतजार है। भारतीय लोगों के साथ-साथ दुनिया के कई देशों लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी एक बार फ़िर से जीत हासिल कर पाते हैं कि नहीं। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि लोकसभा के चुनाव परिणाम आपको 23 मई के दिन नहीं बल्कि 30 मई तक पता चलेंगे, तो आप सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि आखिर ऐसा क्यों।
दरअसल यदि चुनाव आयोग की मानें, और लोकसभा चुनाव में परिणाम के लिए 50 प्रतिशत VVPAT की पर्चियों का मिलान किया गया तो परिणाम 23 मई को आना मुश्किल है, और नतीजों में 6 से 9 दिनों की देरी हो सकती है। हालांकि, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में साफ़ कहा है कि वीवीपैट की पर्चियों की गणना का जो तरीका वे अभी अपना रहे हैं, वो तरीका सबसे ज्यादा उपयुक्त है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि निर्वाचन आयोग ने इस समय विधानसभा चुनाव के लिये एक निर्वाचन क्षेत्र से एक मतदान केन्द्र, और लोकसभा चुनाव के मामले में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के एक-एक मतदान केन्द्र की वीवीपैट पर्चियों की गणना की प्रणाली अपनाई हुई है। निर्वाचन आयोग का तर्क है कि यही तरीक़ा सबसे ज़्यादा सही है, जिसमें समय भी कम लगता है और वीवीपीएटी पर्चियों का मिलना भी हो जाता है।
दरअसल निर्वाचन आयोग परिणाम में देरी की बात इसलिए कह रहा है क्योंकि विपक्षी नेता चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव में मतगणना के दौरान, हर विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग मशीनों की कम से कम 50 प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाए। जिस पर निर्वाचन आयोग का तर्क है कि सत्यापन के आकार में किसी भी तरह की वृद्धि से विश्वास स्तर पर बहुत ही मामूली फर्क पड़ेगा।
इधर सुप्रीम कोर्ट में निर्वाचन आयोग ने 21 विपक्षी नेताओं की याचिका को खारिज करने का अनुरोध करते हुये कहा है कि वे वीवीपैट की पर्चियों की गणना सम्बन्धी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव के लिये एक भी ठोस आधार बताने में असमर्थ रहे हैं।
निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना तर्क रखते हुए कुछ प्रमुख बातें कहीं हैं, जो इस तरह से हैं; 50 प्रतिशत VVPAT पर्चियों की EVM से मिलान की मांग अव्यवहारिक है। अभी हर विधानसभा क्षेत्र के किसी एक बूथ में VVPAT-EVM मिलान की व्यवस्था सही है जिसमें अभी तक कोई कमी नहीं पाई गई है, और याचिकाकर्ता भी कमी नहीं बता पा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन.चन्द्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी दलों के नेताओं की याचिका का जिक्र करते हुये कहा कि इसमें इस समय वर्तमान प्रणाली में बदलाव के लिये कोई वजह नहीं बताई गयी है।
निर्वाचन आयोग का तर्क है कि 50 प्रतिशत मिलान के बाद चुनाव परिणाम घोषित करने में 6 से 9 दिन का और ज्यादा समय लगेगा जो कि सही नहीं है। चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, अब मिलान की प्रक्रिया बढ़ाना मुश्किल होगा। चुनाव कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने से लेकर ट्रेनिंग जैसे कई कदम उठाने होंगे।
यदि निर्वाचन आयोग की बात पर यकीन करें, तो उसका तर्क एक तरह से सही है। क्योंकि यदि 50 प्रतिशत मिलान करने के बाद चुनाव परिणाम घोषित किये गये, तो चुनाव परिणाम आने में 6 से 9 दिन ज्यादा लग सकते हैं जिसे किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता है। पहले जब बैलेट पेपर से चुनाव होते थे तो चुनाव परिणाम आने में 2 से 3 दिन का समय लग जाता था, इसी समय को बचाने और चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए ही निर्वाचन आयोग ने ईवीएम और वीवीपीएटी का प्रयोग करना शुरू किया है।
इधर भाजपा का कहना है कि चुनावों में लगातार हार के बाद विपक्ष बौखला गया है, जिसके बाद वो लगातार निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। भाजपा का आरोप है कि निर्वाचन आयोग जैसी संस्थायों की कार्यप्रणाली पर संदेह करके विपक्षी दल अपनी हार की खीज निकाल रहे हैं। अब देखना होगा कि विपक्षी नेताओं की दलील और उसके बाद निर्वाचन आयोग के तर्कों को सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कुछ दिशा-निर्देश देता है या फ़िर आदेश जारी करता है।
MAR 30 (WTN) – विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र भारत में होने जा रहे लोकसभा चुनाव पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। सभी को 23 मई को आने वाले चुनाव परिमाण का इंतजार है। भारतीय लोगों के साथ-साथ दुनिया के कई देशों लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी एक बार फ़िर से जीत हासिल कर पाते हैं कि नहीं। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि लोकसभा के चुनाव परिणाम आपको 23 मई के दिन नहीं बल्कि 30 मई तक पता चलेंगे, तो आप सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि आखिर ऐसा क्यों।
दरअसल यदि चुनाव आयोग की मानें, और लोकसभा चुनाव में परिणाम के लिए 50 प्रतिशत VVPAT की पर्चियों का मिलान किया गया तो परिणाम 23 मई को आना मुश्किल है, और नतीजों में 6 से 9 दिनों की देरी हो सकती है। हालांकि, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में साफ़ कहा है कि वीवीपैट की पर्चियों की गणना का जो तरीका वे अभी अपना रहे हैं, वो तरीका सबसे ज्यादा उपयुक्त है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि निर्वाचन आयोग ने इस समय विधानसभा चुनाव के लिये एक निर्वाचन क्षेत्र से एक मतदान केन्द्र, और लोकसभा चुनाव के मामले में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के एक-एक मतदान केन्द्र की वीवीपैट पर्चियों की गणना की प्रणाली अपनाई हुई है। निर्वाचन आयोग का तर्क है कि यही तरीक़ा सबसे ज़्यादा सही है, जिसमें समय भी कम लगता है और वीवीपीएटी पर्चियों का मिलना भी हो जाता है।
दरअसल निर्वाचन आयोग परिणाम में देरी की बात इसलिए कह रहा है क्योंकि विपक्षी नेता चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव में मतगणना के दौरान, हर विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग मशीनों की कम से कम 50 प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाए। जिस पर निर्वाचन आयोग का तर्क है कि सत्यापन के आकार में किसी भी तरह की वृद्धि से विश्वास स्तर पर बहुत ही मामूली फर्क पड़ेगा।
इधर सुप्रीम कोर्ट में निर्वाचन आयोग ने 21 विपक्षी नेताओं की याचिका को खारिज करने का अनुरोध करते हुये कहा है कि वे वीवीपैट की पर्चियों की गणना सम्बन्धी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव के लिये एक भी ठोस आधार बताने में असमर्थ रहे हैं।
निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना तर्क रखते हुए कुछ प्रमुख बातें कहीं हैं, जो इस तरह से हैं; 50 प्रतिशत VVPAT पर्चियों की EVM से मिलान की मांग अव्यवहारिक है। अभी हर विधानसभा क्षेत्र के किसी एक बूथ में VVPAT-EVM मिलान की व्यवस्था सही है जिसमें अभी तक कोई कमी नहीं पाई गई है, और याचिकाकर्ता भी कमी नहीं बता पा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन.चन्द्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी दलों के नेताओं की याचिका का जिक्र करते हुये कहा कि इसमें इस समय वर्तमान प्रणाली में बदलाव के लिये कोई वजह नहीं बताई गयी है।
निर्वाचन आयोग का तर्क है कि 50 प्रतिशत मिलान के बाद चुनाव परिणाम घोषित करने में 6 से 9 दिन का और ज्यादा समय लगेगा जो कि सही नहीं है। चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, अब मिलान की प्रक्रिया बढ़ाना मुश्किल होगा। चुनाव कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने से लेकर ट्रेनिंग जैसे कई कदम उठाने होंगे।
यदि निर्वाचन आयोग की बात पर यकीन करें, तो उसका तर्क एक तरह से सही है। क्योंकि यदि 50 प्रतिशत मिलान करने के बाद चुनाव परिणाम घोषित किये गये, तो चुनाव परिणाम आने में 6 से 9 दिन ज्यादा लग सकते हैं जिसे किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता है। पहले जब बैलेट पेपर से चुनाव होते थे तो चुनाव परिणाम आने में 2 से 3 दिन का समय लग जाता था, इसी समय को बचाने और चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए ही निर्वाचन आयोग ने ईवीएम और वीवीपीएटी का प्रयोग करना शुरू किया है।
इधर भाजपा का कहना है कि चुनावों में लगातार हार के बाद विपक्ष बौखला गया है, जिसके बाद वो लगातार निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। भाजपा का आरोप है कि निर्वाचन आयोग जैसी संस्थायों की कार्यप्रणाली पर संदेह करके विपक्षी दल अपनी हार की खीज निकाल रहे हैं। अब देखना होगा कि विपक्षी नेताओं की दलील और उसके बाद निर्वाचन आयोग के तर्कों को सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कुछ दिशा-निर्देश देता है या फ़िर आदेश जारी करता है।