जानिए अब क्यों बढ़ेगी प्राइवेट कम्पनियों में काम करने वालों की पेंशन?
Wednesday - April 3, 2019 12:42 pm ,
Category : WTN HINDI
सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की केरल हाईकोर्ट के ख़िलाफ़ दायर याचिका का किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पेंशन में होगा कई गुना इज़ाफा
APR 03 (WTN) – यदि आप प्राइवेट कम्पनी में काम करते हैं, तो यह ख़बर आपके काम की है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के हाल के एक आदेश के बाद, प्राइवेट कम्पनी में काम करने वाले कर्मचारियों की पेंशन में कई गुना इज़ाफा होने जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की केरल हाइकोर्ट के ख़िलाफ़ दी गई याचिका को खारिज कर दिया है। आख़िर क्या है यह पूरा मामला आपको विस्तार से बताते हैं।
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईपीएस की सुविधा साल 1995 में शुरू की गई थी। उस समय कोई भी प्राइवेट कम्पनी अपने कर्मचारी के वेतन का अधिकतम सालाना 6500 रुपए का 8.33 प्रतिशत ही जमा कर सकती थी। लेकिन मार्च 1996 में नियम में बदलाव हुआ, और इसके मुताबिक अगर कोई कर्मचारी अपनी पूरी सैलरी के हिसाब से ईपीएस में रकम जमा करना चाहता है तो उसे ऐसा करने दिया जाए। साथ ही यदि अगर कम्पनी भी तैयार हो जाए तो उसे पेंशन भी ऐसे ही मिले।
लेकिन सितम्बर 2014 में नियम में एक बार फ़िर से बदलाव आया। नये नियम के मुताबिक़, पेंशन के लिए अधिकतम 15 हज़ार रुपए का 8.33 प्रतिशत योगदान ईपीएस में किया जाएगा। वहीं यदि कोई कर्मचारी पूरी सैलरी पर पेंशन लेना चाहता है, तो उसकी पेंशन सैलरी पिछले 5 साल के हिसाब से तय होगी।
लेकिन केरल हाईकोर्ट ने 1 सितम्बर, 2014 को हुए बदलाव को रद्द कर दिया और पुराने सिस्टम को मन्जूरी दे दी। केरल हाईकोर्ट के आदेश के बाद पेंशन की सैलरी पिछले साल की औसत सैलरी से तय होने लगी। इधर केरल हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सेवानिवृत्त हुए सभी कर्मचारियों को उनके पूरे वेतन के हिसाब से पेंशन दी जाए। चूंकि ईपीएफओ 15,000 रुपये के हिसाब से योगदान गिनता है, जिसके कारण अब पीएफ फंड में कमी आने लगी और इसका ज्यादा हिस्सा ईपीएस वाले फंड में जाने लगा।
सुप्रीम कोर्ट के नये आदेश के बाद, अगर किसी ने 20 साल काम किया है और उसकी सैलरी एक लाख रुपए है तो उसे अब 2100 रुपए के बजाय 28,571 रुपए पेंशन मिलेगी। यानि कि एक तरह से पेंशन में 1261 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में ईपीएफओ से इसका फायदा फुल सैलरी के आधार पर पेंशन स्कीम में योगदान देने वालों को भी देने के लिए कहा है। इधर जिन कम्पनियों में ईपीएस ट्रस्ट से चलता है, ईपीएफओ ने उनको इसका फायदा देने से इंकार कर दिया। कई सरकारी कम्पनियों जैसे ONGC और इंडियन ऑयल को ईपीएस ट्रस्ट ही मैनेज करता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 1 सितम्बर, 2014 के बाद काम शुरू करने वालों को भी फुल सैलरी पर पेंशन का लाभ मिलेगा।
APR 03 (WTN) – यदि आप प्राइवेट कम्पनी में काम करते हैं, तो यह ख़बर आपके काम की है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के हाल के एक आदेश के बाद, प्राइवेट कम्पनी में काम करने वाले कर्मचारियों की पेंशन में कई गुना इज़ाफा होने जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की केरल हाइकोर्ट के ख़िलाफ़ दी गई याचिका को खारिज कर दिया है। आख़िर क्या है यह पूरा मामला आपको विस्तार से बताते हैं।
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईपीएस की सुविधा साल 1995 में शुरू की गई थी। उस समय कोई भी प्राइवेट कम्पनी अपने कर्मचारी के वेतन का अधिकतम सालाना 6500 रुपए का 8.33 प्रतिशत ही जमा कर सकती थी। लेकिन मार्च 1996 में नियम में बदलाव हुआ, और इसके मुताबिक अगर कोई कर्मचारी अपनी पूरी सैलरी के हिसाब से ईपीएस में रकम जमा करना चाहता है तो उसे ऐसा करने दिया जाए। साथ ही यदि अगर कम्पनी भी तैयार हो जाए तो उसे पेंशन भी ऐसे ही मिले।
लेकिन सितम्बर 2014 में नियम में एक बार फ़िर से बदलाव आया। नये नियम के मुताबिक़, पेंशन के लिए अधिकतम 15 हज़ार रुपए का 8.33 प्रतिशत योगदान ईपीएस में किया जाएगा। वहीं यदि कोई कर्मचारी पूरी सैलरी पर पेंशन लेना चाहता है, तो उसकी पेंशन सैलरी पिछले 5 साल के हिसाब से तय होगी।
लेकिन केरल हाईकोर्ट ने 1 सितम्बर, 2014 को हुए बदलाव को रद्द कर दिया और पुराने सिस्टम को मन्जूरी दे दी। केरल हाईकोर्ट के आदेश के बाद पेंशन की सैलरी पिछले साल की औसत सैलरी से तय होने लगी। इधर केरल हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सेवानिवृत्त हुए सभी कर्मचारियों को उनके पूरे वेतन के हिसाब से पेंशन दी जाए। चूंकि ईपीएफओ 15,000 रुपये के हिसाब से योगदान गिनता है, जिसके कारण अब पीएफ फंड में कमी आने लगी और इसका ज्यादा हिस्सा ईपीएस वाले फंड में जाने लगा।
सुप्रीम कोर्ट के नये आदेश के बाद, अगर किसी ने 20 साल काम किया है और उसकी सैलरी एक लाख रुपए है तो उसे अब 2100 रुपए के बजाय 28,571 रुपए पेंशन मिलेगी। यानि कि एक तरह से पेंशन में 1261 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में ईपीएफओ से इसका फायदा फुल सैलरी के आधार पर पेंशन स्कीम में योगदान देने वालों को भी देने के लिए कहा है। इधर जिन कम्पनियों में ईपीएस ट्रस्ट से चलता है, ईपीएफओ ने उनको इसका फायदा देने से इंकार कर दिया। कई सरकारी कम्पनियों जैसे ONGC और इंडियन ऑयल को ईपीएस ट्रस्ट ही मैनेज करता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 1 सितम्बर, 2014 के बाद काम शुरू करने वालों को भी फुल सैलरी पर पेंशन का लाभ मिलेगा।