भारत में वर्ष 2017 में वायु प्रदूषण के कारण हुई 12 लाख लोगों की मौत, वहीं पूरी दुनिया में 30 लाख
Wednesday - April 3, 2019 5:21 pm ,
Category : WTN HINDI
WTN- इस कठोर वास्तविकता में विश्वास करना मुश्किल है कि हमारे वायुमंडल में वायु प्रदूषण के कारण बढ़ती मृत्यु दर इसका दुखद परिणाम है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में वायु प्रदूषण के कारण भारत में 12 लाख लोगों की मौत हुई। यूएस हेल्थ इफ़ेक्ट इंस्टिट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में 'स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019 ’ में यह आकड़े जारी किये हाय है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2017 में हार्ट अटैक, फेफड़ों के कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों के कारण दुनिया भर में 50 लाख लोगों की मौत हो गई थी, इनमें से 30 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के पीएम 2.5 के कारण हुई थी।
रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई देशों भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल को दुनिया में सबसे प्रदूषित क्षेत्र माना गया है, जहाँ हर साल वायु प्रदूषण के कारण 15 लाख लोग असामयिक मौत का शिकार होते हैं। हालांकि रिपोर्ट बताती है कि चीन और भारत में प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या समान है, जबकि चीन ने प्रदूषण कम करने में सफलता हासिल की है।
रिपोर्ट कहती है कि भारत में प्रदूषण से लड़ने के लिए हाल के वर्षों में सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और बीएस -4 भी प्रमुख कदम हैं और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे यदि इन योजनाओं को भविष्य में सही ढंग से लागू किया जाए।
रिपोर्ट में एक अन्य आंकड़ा बताता है कि प्रदूषण के कारण मरने वालों की संख्या सड़क दुर्घटनाओं और मलेरिया से अधिक है। चीन और भारत की स्थिति इस मामले में समान है। भारत में प्रदूषण हर साल मौत का तीसरा बड़ा कारण है।
रिपोर्ट कहती है कि 2017 में, दुनिया के आधे लोग - यानी 3.6 बिलियन लोग - घर में प्रदूषण से प्रभावित थे। हालांकि, आर्थिक विकास के कारण, अब ठोस ईंधन के साथ खाना पकाने की आदत लगातार कम हो रही है। लेकिन अभी भी भारत में 60% और बांग्लादेश में 79% ठोस ईंधन के साथ भोजन बना रहे हैं। इसके कारण घर के भीतर प्रदूषण बढ़ रहा है। घर का प्रदूषण बाहरी हवा को भी दूषित कर रहा है। - Window To News