BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

भोपाल सीट पर प्रत्याशी चयन के लिए भाजपा में ‘चिंतन’ जारी

Monday - April 15, 2019 3:38 pm , Category : WTN HINDI
भोपाल में ‘बड़े नेता’ या फ़िर ‘छोटे नेता’ के पेंच में फंसी भाजपा!
भोपाल में ‘बड़े नेता’ या फ़िर ‘छोटे नेता’ के पेंच में फंसी भाजपा!

बड़ा सवाल: भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह के सामने कौन?

APR 15 (WTN) – लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की भोपाल सीट पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं क्योंकि इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं कांग्रेस के कद्दावर नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह। भोपाल सीट सालों से भाजपा की परम्परागत सीट रही है। 1989 के लोकसभा चुनाव से भाजपा यहां से लगातार जीत हासिल कर रही है। इस लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने के लिए कांग्रेस ने अपने बड़े दिग्गजों को चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतारा है, और इसी कड़ी में भोपाल सीट जीतने की जिम्मेदारी कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को दी है और उन्हें यहां से टिकट दिया है।
 
भोपाल सीट से कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित होने के बाद जहां एक तरफ़ दिग्विजय सिंह लगातार चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा अपना प्रत्याशी ही घोषित नहीं कर सकी है। कहा जा रहा है कि भोपाल सीट से दिग्विजय सिंह को हराने के लिए भाजपा के पास दो प्लान है। एक प्लान के तहत दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ भाजपा किसी बड़े नेता को उनके ख़िलाफ़ चुनाव मैदान में उतार सकती है, तो दूसरे प्लान के तहत भाजपा दिग्विजय सिंह को ज्यादा तवज्जो ना देते हुए दूसरे पंक्ति के किसी नेता को भोपाल सीट से टिकट दे सकती है।
 
कुछ दिनों पहले चर्चा थी कि साध्वी प्रज्ञा भोपाल सीट से दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन इस पर कुछ फाइनल नहीं हो सका है। वहीं मीडिया में ख़बरें आई थीं कि मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और फायर ब्रांड नेता उमा भारती, दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन अब खुद उमा भारती ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है कि वे भोपाल सीट से चुनाव लड़ेंगी।

भोपाल से चुनाव लड़ने की अपनी दावेदारी के सवाल पर उमा भारती ने साफ़ किया है कि दिग्विजय सिंह को वे साल 2003 के विधानसभा चुनाव में ही बुरी तरह से हरा चुकी हैं और दिग्विजय सिंह को हराने का उनका रोल पूरा हो चुका है। दिग्विजय सिंह पर कटाक्ष करते हुए उमा भारती का कहना है कि दिग्विजय सिंह 15 साल पुराने पिटे हुए मोहरे हैं।

उमा भारती के मुताबिक़ दिग्विजय सिंह को तो भाजपा का एक छोटा कार्यकर्ता ही हरा देगा। हालांकि उमा भारती का मानना है कि पार्टी को भोपाल सीट के लिए प्रत्याशी की घोषणा जल्द से जल्द करा चाहिए। वहीं उमा भारती का साफ़ कहना है कि यदि भाजपा प्रत्याशी का नाम बड़ा होगा तो दिग्विजय सिंह बड़े नेता हो जाएंगे।
 
लेकिन इस सबके बीच, दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ भाजपा की तरफ़ चुनाव लड़ने के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं। जिन नामों की चर्चा है उनमें 2014 में भोपाल सीट से लोकसभा चुनाव जीते आलोक संजर, भोपाल की पूर्व मेयर और वर्तमान विधायक कृष्णा गौर, भोपाल के वर्तमान मेयर आलोक शर्मा,  विधायक रामेश्वर शर्मा, पूर्व मंत्री और विधायक विश्वास सारंग, शैलेन्द्र शर्मा और भगवानदास सबनानी।

हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम भी सामने आ रहा है कि वे दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन लेख लिखे जाने तक भाजपा ने भोपाल सीट के लिए अपना प्रत्याशी तय नहीं किया था। कहा जा रहा है कि भाजपा भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह की दावेदारी को हल्के में लेने के मूड़ में नहीं है। भाजपा जानती है कि भोपाल उसकी परम्परागत सीट रही है, लेकिन दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता के खड़े होने से इस बार भाजपा की राह आसान नहीं होने वाली इसलिए भाजपा इस सीट से किसी कद्दावर नेता को टिकट दे सकती है ताकि दिग्विजय सिंह के सामने कड़ी चुनौती पेश की जा सके।

वहीं चर्चा यह भी है कि भाजपा दिग्विजय सिंह के चुनाव लड़ने को ज्यादा तवज्जो ना देकर किसी बड़े नेता की जगह छोटे नेता को भोपाल सीट से चुनाव लड़ाए। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि किसी बड़े नेता को भोपाल सीट से टिकट दिया तो मतदाताओं में यह सन्देश जाएगा कि भाजपा ने दिग्विजय सिंह की दावेदारी को सीरियस ले लिया है इसलिए बड़े नेता को चुनाव मैदान में उतारा है। इसी रणनीति के तहत भाजपा दूसरी पंक्ति के किसी नेता को भोपाल सीट से चुनाव लड़ा सकती है ताकि मतादाताओं में यह सन्देश जाए कि भाजपा के लिए दिग्विजय सिंह कोई बड़े प्रत्याशी नहीं है और उन्हें भाजपा का एक छोटा नेता ही हरा सकता है।

खैर अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ किस रणनीति के तहत भाजपा अपने प्रत्याशी को उतारती है। वैसे भाजपा जानती है कि भोपाल सीट उसके लिए काफ़ी सुरक्षित सीट है और यहां से दिग्विजय सिंह को हराना उसे आसान है। भाजपा अपनी चुनावी रणनीति के तहत लोगों को दिग्विजय सिंह के शासन के समय की याद दिलाकर उन्हें डरा सकती है। भोपाल में कर्मचारियों की भी काफ़ी तादात है और कहा जाता है कि कर्मचारी वर्ग दिग्विजय सिंह से पहले से नाराज है, ऐसे में कहा जा सकता है कि दिग्विजय सिंह के लिए भोपाल से जीत की राह आसान नहीं है।