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ईवीएम-वीवीपैट मिलान के कारण 4 घंटे देरी से आएंगे लोकसभा चुनाव के परिणाम

Tuesday - April 16, 2019 10:12 am , Category : WTN HINDI
विपक्षी दलों ने फ़िर उठाई 50 प्रतिशत ईवीएम-वीवीपैट मिलान की मांग
विपक्षी दलों ने फ़िर उठाई 50 प्रतिशत ईवीएम-वीवीपैट मिलान की मांग

ईवीएम-वीवीपैट मिलान के कारण 4 घंटे देरी से आएंगे लोकसभा चुनाव के परिणाम

APR 16 (WTN) – एक समय था जब लोकसभा चुनाव मतपत्रों के जरिये होते थे और मतपत्रों की गिनती में लगने वाले समय के कारण चुनाव परिणाम आने में दो से तीन दिन लग जाते थे। लेकिन जब से निर्वाचन आयोग ने ईवीएम यानि कि इलेक्टॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग करना शुरू किया है, तब से लोकसभा और विधानसभा चुनाव के परिणाम चंद घण्टों में आ जाते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव पूरी तरह से ईवीएम के द्वारा कराए गये थे, जिसके कारण दोपहर एक बजे तक लोकसभा चुनाव परिणामों की स्थिति साफ़ हो गई थी।
 
लेकिन ईवीएम से चुनाव होने के बाद भी इस बार लोकसभा चुनाव के परिणाम आने में देरी लग सकती है। जी हां इस बार लोकसभा चुनाव के परिणाम आने में कम से कम 4 घण्टे की देरी हो  सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वीवीपैट की पर्चियों को गिनने में अतिरिक्त समय लगेगा, जिसके कारण चुनाव परिणाम घोषित होने में ज़्यादा वक़्त लगेगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लोकसभा चुनाव में मतगणना के दौरान हर विधानसभा क्षेत्र से पांच-पांच वीवीपैट का चयन कर उनकी पर्चियां ईवीएम से मतगणना होने के बाद गिनी जाएंगी। जिसके कारण चुनाव परिणाम आने में 4 घण्टे ज़्यादा लग सकते हैं।



आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईवीएम के साथ ही वीवीपैट को स्ट्रांग रूम में रखा जाएगा। मतगणना वाले दिन हर विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केन्द्रों की वीवीपैट की पर्चियां और उसी केन्द्र की ईवीएम में दर्ज वोटों का मिलान किया जाएगा। ईवीएम से वोटों की गिनती के आख़िरी चरण के बाद वीवीपैट की पर्चियों को गिना चाएगा।

वोटिंग होने के बाद पीठासीन अधिकारी, पोलिंग एजेंट की मौजूदगी में वीवीपैट की बैटरी निकाल देंगे। इसके बाद बिना बैटरी वाली वीवीपैट को ईवीएम के साथ स्ट्रांग रूम में सीलबंद करके रखा जाएगा। वीवीपैट की पर्चियों की गणना के बाद रिटर्निंग ऑफिसर मतदान केन्द्रवार एक प्रमाण पत्र मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भेजेंगे। वहीं सम्बन्धित प्रदेश की पूरी रिपोर्ट तैयार करके मतगणना समाप्त होने के सात दिन के अन्दर सम्बन्धित राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी इसे निर्वाचन आयोग को भेजेंगे।

वीवीपैट (VVPAT) का पूरा नाम वोटर वेरीफ़ाएड पेपर ऑडिट ट्रेल है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने यह मशीन साल 2013 में डिज़ायन की थी। वीवीपैट का सबसे पहले इस्तेमाल 2013 के नागालैंड चुनाव में किया गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट मशीन बनाने और इसके लिए जरूरी पैसा मुहैया कराने के आदेश केन्द्र सरकार को दिये थे। चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए निर्वाचन आयोग ने जून 2014 में तय किया था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सभी मतदान केन्द्रों पर वीवीपैट का प्रयोग किया जाएगा।

इधर, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी दल एक बार फ़िर से पचास प्रतिशत ईवीएम-वीवीपैट मिलान को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि निर्वाचन आयोग हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम पचास प्रतिशत वोटों का ईवीएम-वीवीपैट से मिलान करे।

लेकिन ईवीएम और वीवीपैट के इस्तेमाल होने के बाद भी यदि विपक्षी दलों को निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सन्देह है तो यह चिन्ता का विषय है। निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और देश की आज़ादी के बाद से ही हर चुनाव में निर्वाचन आयोग ने अपनी निष्पक्षता और प्रतिबद्धता साबित की है। इधर भाजपा का आरोप है कि हार के डर के कारण विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर जो सन्देह कर रहे हैं वो ग़लत है। खैर अब देखते हैं कि विपक्षी दलों की मांग पर सुप्रीम कोर्ट क्या निर्देश देता है।