क्या इस बार लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में ‘कुछ बड़ा’ होने वाला है?
Saturday - April 20, 2019 3:23 pm ,
Category : WTN HINDI
बंगाल में टीएमसी को घेरने भाजपा ने बनाई ‘रणनीति’
इस बार चौका सकते हैं लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल के नतीजे, टीएमसी और भाजपा के बीच ‘कांटे की टक्कर’
APR 20 (WTN) – लेख का शीर्षक पढ़कर आप सोच में पड़ गये होंगे। दरअसल लेख का शीर्षक अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल है कि क्या इस बार के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में कुछ बड़ा होने वाला है? दरअसल, इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल काफ़ी मायने रखता है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि भाजपा को इस बार महागठबंधन के कारण यूपी में सीटों का काफ़ी नुकसान होने वाला है, लेकिन इन सीटों की कमी भाजपा बंगाल से पूरी कर सकती है और वो इस कमी को पूरा करने जा रही है।
दरअसल पश्चिम बंगाल में सालों तक वामदलों की सत्ता रही, जिसके बाद अब यहां पर काफ़ी समय से टीएमसी की सरकार है। बंगाल की राजनीति हमेशा से ही खूनी संघर्ष की राजनीति रही है। एक समय था जब बंगाल में वामपंथी पार्टियों और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष होता रहता था, लेकिन अब टीएमसी सत्ता में आई है तो भी खूनी संघर्ष जारी है। इस बार सत्ता में टीएमसी है तो निशाने पर हैं भाजपा कार्यकर्ता। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी के कार्यकर्ता भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या में शामिल रहे हैं।
अब बात करें मुस्लिम वोटों की तो भाजपा का हमेशा से यह आरोप है कि ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति को राज्य में बढ़ावा देती रही हैं। भाजपा का आरोप है कि मुस्लिम वोट बैंक के लिए ममता बनर्जी ने राज्य में हिन्दुओं पर अत्याचार किये हैं। अब जबकि लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर है तो ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ममता बनर्जी पर काफी गम्भीर आरोप लगा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के बुनियादपुर में एक चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को स्पीडब्रेकर दीदी नाम से सम्बोधित करते हुए कहा कि देश की जनता उन्हें सजा देगी। प्रधानमंत्री मोदी ने रैली में साफ कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में कुछ बड़ा हो रहा है और जो हो रहा है वो आपके इस प्यार और स्नेह से साफ़ दिखाई दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने मां, माटी और मानुष के नाम पर देश को धोखा दिया है। ममता बनर्जी के पास गुंडों को देने के लिए पैसा है लेकिन कर्मचारियों को डीए को देने के लिए पैसा नहीं है। मोदी ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा कि बंगाल में पहले और दूसरे चरण में मतदान की जो रिपोर्ट आई हैं, उसने ममता बनर्जी की नींद उड़ गई है और इसी बौखलाहट में किस तरह के जघन्य अपराध हो रहे हैं, वो भी देश देख रहा है।
दरअसल कहा जा रहा है कि इस बार बंगाल में टीएमसी प्रत्याशियों को काफी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यदि पिछले लोकसभा चुनाव यानि कि साल 2014 की बात करें तो इस चुनाव में ममता बनर्जी की टीएमसी ने राज्य की 42 में से 34 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस को चार, सीपीआई को दो और भाजपा को दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी। लेकिन कहा जा रहा है कि इस बार टीएमसी को यहां पर करारी हार का सामना करना पड़ सकता है।
जब हमने इस बारे में बंगाल की कुछ पत्रकारों और जनता से बात की तो उनका कहना है कि राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में टीएमसी तो रहेगी, लेकिन उसे पिछले लोकसभा चुनाव जितनी सीटों पर जीत हासिल नहीं होगी। कहा जा रहा है कि इस बार टीएमसी बंगाल में 20 सीटों के अन्दर सिमट सकती है।
टीएमसी को घेरने के लिए रणनीति के तहत भाजपा ने हिन्दुत्ववादी कार्ड के साथ-साथ सारदा चिटफंड घोटाले को और बांग्लादेशी घुसपैठियों के मामले को बड़े ही जोरदार तरीके से उठाया है। भाजपा जानती है कि यदि ममता बनर्जी की पार्टी को हराना है तो मुस्लिम बाहुल्य बंगाल में हिन्दुववादी कार्ड एक ट्रम्प कार्ड साबित हो सकता। अब देखते हैं कि भाजपा की रणनीति कितना कारगर साबित होता है और क्या कुछ नतीजे पश्चिम बंगाल से आते हैं और क्या सच में बंगाल में कुछ बड़ा होने वाला है?
APR 20 (WTN) – लेख का शीर्षक पढ़कर आप सोच में पड़ गये होंगे। दरअसल लेख का शीर्षक अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल है कि क्या इस बार के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में कुछ बड़ा होने वाला है? दरअसल, इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल काफ़ी मायने रखता है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि भाजपा को इस बार महागठबंधन के कारण यूपी में सीटों का काफ़ी नुकसान होने वाला है, लेकिन इन सीटों की कमी भाजपा बंगाल से पूरी कर सकती है और वो इस कमी को पूरा करने जा रही है।
दरअसल पश्चिम बंगाल में सालों तक वामदलों की सत्ता रही, जिसके बाद अब यहां पर काफ़ी समय से टीएमसी की सरकार है। बंगाल की राजनीति हमेशा से ही खूनी संघर्ष की राजनीति रही है। एक समय था जब बंगाल में वामपंथी पार्टियों और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष होता रहता था, लेकिन अब टीएमसी सत्ता में आई है तो भी खूनी संघर्ष जारी है। इस बार सत्ता में टीएमसी है तो निशाने पर हैं भाजपा कार्यकर्ता। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी के कार्यकर्ता भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या में शामिल रहे हैं।
अब बात करें मुस्लिम वोटों की तो भाजपा का हमेशा से यह आरोप है कि ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति को राज्य में बढ़ावा देती रही हैं। भाजपा का आरोप है कि मुस्लिम वोट बैंक के लिए ममता बनर्जी ने राज्य में हिन्दुओं पर अत्याचार किये हैं। अब जबकि लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर है तो ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ममता बनर्जी पर काफी गम्भीर आरोप लगा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के बुनियादपुर में एक चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को स्पीडब्रेकर दीदी नाम से सम्बोधित करते हुए कहा कि देश की जनता उन्हें सजा देगी। प्रधानमंत्री मोदी ने रैली में साफ कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में कुछ बड़ा हो रहा है और जो हो रहा है वो आपके इस प्यार और स्नेह से साफ़ दिखाई दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने मां, माटी और मानुष के नाम पर देश को धोखा दिया है। ममता बनर्जी के पास गुंडों को देने के लिए पैसा है लेकिन कर्मचारियों को डीए को देने के लिए पैसा नहीं है। मोदी ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा कि बंगाल में पहले और दूसरे चरण में मतदान की जो रिपोर्ट आई हैं, उसने ममता बनर्जी की नींद उड़ गई है और इसी बौखलाहट में किस तरह के जघन्य अपराध हो रहे हैं, वो भी देश देख रहा है।
दरअसल कहा जा रहा है कि इस बार बंगाल में टीएमसी प्रत्याशियों को काफी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यदि पिछले लोकसभा चुनाव यानि कि साल 2014 की बात करें तो इस चुनाव में ममता बनर्जी की टीएमसी ने राज्य की 42 में से 34 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस को चार, सीपीआई को दो और भाजपा को दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी। लेकिन कहा जा रहा है कि इस बार टीएमसी को यहां पर करारी हार का सामना करना पड़ सकता है।
जब हमने इस बारे में बंगाल की कुछ पत्रकारों और जनता से बात की तो उनका कहना है कि राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में टीएमसी तो रहेगी, लेकिन उसे पिछले लोकसभा चुनाव जितनी सीटों पर जीत हासिल नहीं होगी। कहा जा रहा है कि इस बार टीएमसी बंगाल में 20 सीटों के अन्दर सिमट सकती है।
टीएमसी को घेरने के लिए रणनीति के तहत भाजपा ने हिन्दुत्ववादी कार्ड के साथ-साथ सारदा चिटफंड घोटाले को और बांग्लादेशी घुसपैठियों के मामले को बड़े ही जोरदार तरीके से उठाया है। भाजपा जानती है कि यदि ममता बनर्जी की पार्टी को हराना है तो मुस्लिम बाहुल्य बंगाल में हिन्दुववादी कार्ड एक ट्रम्प कार्ड साबित हो सकता। अब देखते हैं कि भाजपा की रणनीति कितना कारगर साबित होता है और क्या कुछ नतीजे पश्चिम बंगाल से आते हैं और क्या सच में बंगाल में कुछ बड़ा होने वाला है?