महंगाई के लिए रहिये तैयार, वैश्विक कारणों से जल्द महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीज़ल
Thursday - April 25, 2019 1:09 pm ,
Category : WTN HINDI
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण महंगा होगा कच्चा तेल, बढ़ेंगे पेट्रोल--डीज़ल के दाम
2 मई से ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति में होगी भारी कमी, विकल्प की तलाश में भारत
APR 25 (WTN) – तो आने वाले कुछ दिनों के बाद आप महंगाई के लिए तैयार रहिये। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मई के महीने से पेट्रोल-डीज़ल के दाम में भारी वृद्धि हो सकती है। पेट्रोल-डीज़ल के दामों में वृद्धि के बाद महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि अचानक पेट्रोल-डीज़ल के दामों में वृद्धि क्यों होने जा रही है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह सब होने जा रहा है ईरान-अमेरिका विवाद और सऊदी अरब के कारण।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद पर प्रतिबंधों से दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इसी बीच सऊदी अरब ने साफ़ कर दिया है कि उसकी तेल उत्पादन बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है। इन दोनों कारणों के चलते ही आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीज़ल महंगा होने की बात कही जा रही है।
दरअसल, सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद अल-फलीह ने रियाद में वित्तीय सम्मेलन में यह कहा कि फिलहाल सऊदी अरब की तेल उत्पादन बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद अब सऊदी अरब के इस बयान से भारत समेत 8 देशों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, और इन देशों में पेट्रोल-डीज़ल महंगा होने के आसार हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब का कहना है कि वेनेजुएला में हो रही घटनाओं और ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को कड़ा किए जाने के बाद भी वैश्विक तेल भण्डार का बढ़ना लगातार जारी है। ऐसे में सऊदी अरब का मानना है कि तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए तत्काल कुछ किए जाने की जरूरत नहीं है।
भारत अपनी तेल की जरूरतों के लिए विदेश पर निर्भर है। भारत अपनी तेल जरूरतों का क़रीब 11 प्रतिशत ईरान से आयात करता है। लेकिन 2 मई के बाद ईरान से तेल का आयात बंद हो जाने के बाद यदि भारत को कहीं और से कच्चे तेल की सप्लाई नहीं हुई तो पेट्रोल-डीज़ल महंगा होगा और उसके साथ-साथ महंगाई भी बढ़ेगी। जानकारों का कहना है कि भारत को ईरान से होने वाले तेल आयात की कमी को पूरा करने के लिए अब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे ओपेक देशों की तरफ रूख करना होगा।
जैसा कि आप जानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी विवाद के कारण अमेरिका ने ईरान से तेल निर्यात पर प्रतिबंध की छूट को वापस ले लिया है। इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फ़ैसले के ख़िलाफ़ ईरान ने भी कूटनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज़ कर दी हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामैनी ने तेल प्रतिबंध पर दी गई छूट को वापस लेने के अमेरिका के निर्णय को दुश्मनी भरा कदम करार दिया है। खामैनी ने कहा कि अमेरिका की इस कार्रवाई पर ईरान शांत नहीं रहेगा। अमेरिका की कार्रवाई पर ईरान का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि ईरान की सरकार वापस नये समझौते करे और यह समझौते पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ किए समझौतों से बेहतर हो।
इधर तेल मार्केट के जानकारों की मानें तो ईरानी तेल कम्पनियों से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी धमकी के बाद भी वैश्विक बाजार में पर्याप्त आपूर्ति के संकेतों के कारण वायदा कारोबार में कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट आई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में ईरान से सबसे ज्यादा तेल का आयात चीन और भारत करते हैं।
विश्व राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर चीन और भारत ने 2 मई के बाद भी डोनाल्ड ट्रम्प के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाकर ईरान से तेल का आयात जारी रखा तो फ़िर अमेरिका के साथ इन दोनों ही देशों के रिश्तों में तनाव आ सकता है। यदि ऐसा रहा तो इसका असर अमेरिका और इन दोनों के बीच व्यापार में देखा जा सकता है।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से तेल आयात की पाबंदी से किसी को भी छूट नहीं देने का फ़ैसला लिया है। अमेरिका ने पिछले साल नवम्बर में 8 देशों को ईरान से तेल आयात करने की 6 महीने की छूट दी थी जो कि 2 मई को समाप्त हो रही है। इन 8 देशों में भारत और चीन के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, तुर्की, इटली और यूनान शामिल हैं।
जाहिर है कि यदि ईरान से तेल आयात बंद हुआ और इसका विकल्प भारत को नहीं मिला तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीज़ल महंगा होगा। डीज़ल महंगा होने से इसका असर ट्रांसपोर्ट पर पड़ेगा, जिसके कारण महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि 2 मई के बाद भारत सरकार अपने जरूरत की तेल की आपूर्ति कहां से करती है। जानकारों का मानना है कि भारत को ईरान से तेल आयात के विकल्प को बिल्कुल ही सीमित रखना चाहिए, क्योंकि अमेरिका के साथ ईरान के सम्बन्धों के कारण अमेरिका कभी भी ईरान पर प्रतिबंध लगा देता है। समय की मांग है कि भारत को ईरान के अलावा तेल निर्यात करने वाले अन्य देशों पर निर्भरता बढ़ाना चाहिए।
APR 25 (WTN) – तो आने वाले कुछ दिनों के बाद आप महंगाई के लिए तैयार रहिये। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मई के महीने से पेट्रोल-डीज़ल के दाम में भारी वृद्धि हो सकती है। पेट्रोल-डीज़ल के दामों में वृद्धि के बाद महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि अचानक पेट्रोल-डीज़ल के दामों में वृद्धि क्यों होने जा रही है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह सब होने जा रहा है ईरान-अमेरिका विवाद और सऊदी अरब के कारण।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद पर प्रतिबंधों से दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इसी बीच सऊदी अरब ने साफ़ कर दिया है कि उसकी तेल उत्पादन बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है। इन दोनों कारणों के चलते ही आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीज़ल महंगा होने की बात कही जा रही है।
दरअसल, सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद अल-फलीह ने रियाद में वित्तीय सम्मेलन में यह कहा कि फिलहाल सऊदी अरब की तेल उत्पादन बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद अब सऊदी अरब के इस बयान से भारत समेत 8 देशों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, और इन देशों में पेट्रोल-डीज़ल महंगा होने के आसार हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब का कहना है कि वेनेजुएला में हो रही घटनाओं और ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को कड़ा किए जाने के बाद भी वैश्विक तेल भण्डार का बढ़ना लगातार जारी है। ऐसे में सऊदी अरब का मानना है कि तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए तत्काल कुछ किए जाने की जरूरत नहीं है।
भारत अपनी तेल की जरूरतों के लिए विदेश पर निर्भर है। भारत अपनी तेल जरूरतों का क़रीब 11 प्रतिशत ईरान से आयात करता है। लेकिन 2 मई के बाद ईरान से तेल का आयात बंद हो जाने के बाद यदि भारत को कहीं और से कच्चे तेल की सप्लाई नहीं हुई तो पेट्रोल-डीज़ल महंगा होगा और उसके साथ-साथ महंगाई भी बढ़ेगी। जानकारों का कहना है कि भारत को ईरान से होने वाले तेल आयात की कमी को पूरा करने के लिए अब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे ओपेक देशों की तरफ रूख करना होगा।
जैसा कि आप जानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी विवाद के कारण अमेरिका ने ईरान से तेल निर्यात पर प्रतिबंध की छूट को वापस ले लिया है। इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फ़ैसले के ख़िलाफ़ ईरान ने भी कूटनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज़ कर दी हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामैनी ने तेल प्रतिबंध पर दी गई छूट को वापस लेने के अमेरिका के निर्णय को दुश्मनी भरा कदम करार दिया है। खामैनी ने कहा कि अमेरिका की इस कार्रवाई पर ईरान शांत नहीं रहेगा। अमेरिका की कार्रवाई पर ईरान का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि ईरान की सरकार वापस नये समझौते करे और यह समझौते पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ किए समझौतों से बेहतर हो।
इधर तेल मार्केट के जानकारों की मानें तो ईरानी तेल कम्पनियों से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी धमकी के बाद भी वैश्विक बाजार में पर्याप्त आपूर्ति के संकेतों के कारण वायदा कारोबार में कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट आई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में ईरान से सबसे ज्यादा तेल का आयात चीन और भारत करते हैं।
विश्व राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर चीन और भारत ने 2 मई के बाद भी डोनाल्ड ट्रम्प के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाकर ईरान से तेल का आयात जारी रखा तो फ़िर अमेरिका के साथ इन दोनों ही देशों के रिश्तों में तनाव आ सकता है। यदि ऐसा रहा तो इसका असर अमेरिका और इन दोनों के बीच व्यापार में देखा जा सकता है।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से तेल आयात की पाबंदी से किसी को भी छूट नहीं देने का फ़ैसला लिया है। अमेरिका ने पिछले साल नवम्बर में 8 देशों को ईरान से तेल आयात करने की 6 महीने की छूट दी थी जो कि 2 मई को समाप्त हो रही है। इन 8 देशों में भारत और चीन के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, तुर्की, इटली और यूनान शामिल हैं।
जाहिर है कि यदि ईरान से तेल आयात बंद हुआ और इसका विकल्प भारत को नहीं मिला तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीज़ल महंगा होगा। डीज़ल महंगा होने से इसका असर ट्रांसपोर्ट पर पड़ेगा, जिसके कारण महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि 2 मई के बाद भारत सरकार अपने जरूरत की तेल की आपूर्ति कहां से करती है। जानकारों का मानना है कि भारत को ईरान से तेल आयात के विकल्प को बिल्कुल ही सीमित रखना चाहिए, क्योंकि अमेरिका के साथ ईरान के सम्बन्धों के कारण अमेरिका कभी भी ईरान पर प्रतिबंध लगा देता है। समय की मांग है कि भारत को ईरान के अलावा तेल निर्यात करने वाले अन्य देशों पर निर्भरता बढ़ाना चाहिए।