अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर का भारत ने उठाया ‘फ़ायदा’, दोनों देशों में बढ़ा भारत का निर्यात
Monday - May 6, 2019 1:43 pm ,
Category : WTN HINDI
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर से भारत का ‘मुनाफ़ा’
व्यापार वर्चस्व की लड़ाई के कारण अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर, भारत को मिला परिस्थितियों का ‘लाभ’
MAY 06 (WTN) – आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी कि दो लोगों की लड़ाई में कई बार तीसरे का भला हो जाता है। कुछ ऐसा ही इन दिनों अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण हो रहा है। दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण भारत जमकर फ़ायदा उठा रहा है। क्या है यह पूरा मामला? आइये इसके बारे में विस्तार से आपको बताते हैं।
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने देश की कम्पनियों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए विदेशी कम्पनियों पर ज़्यादा टैक्स लगा रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि क़रीब 200 अरब डॉलर की चीनी वस्तुओं पर लगने वाले आयात कर को इसी सप्ताह 10 मई से बढ़ाया जाएगा, और चाइनीज़ इम्पोर्ट पर शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। दरअसल, व्यापार के लिए अमरीका, चीन पर ग़लत तरीक़े अपनाने का आरोप लगाता रहा है>
लेकिन अमेरिका और चीन के बीच हो रहे इस ट्रेड वॉर का फ़ायदा भारत को मिल रहा है। विदेशी व्यापार के जानकारों के मुताबिक़, अमेरिकी प्रतिबन्धों के कारण साल 2018-19 में भारत से अमेरिका को एल्युमिनियम के निर्यात में काफ़ी वृद्धि हुई है। जानकारों के अनुसार, यदि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर चलता रहता तो यही ट्रेंड साल 2019-20 में भी जारी रह सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत से अमेरिका को एल्युमिनियम का निर्यात साल 2018 में 58 प्रतिशत बढ़कर 22.1 करोड़ डॉलर का हो गया है। अमेरिकी बाज़ारों में भारतीय एल्युमिनियम की मांग अभी भी तेज़ बनी हई है। अमेरिका द्वारा चीन पर प्रतिबंध लगाने के बाद अमेरिकी ख़रीददार अब भारत का रुख कर रहे हैं। इसी कारण नाल्को, हिंडाल्को और वेदांता जैसी भारतीय एल्युमिनियम कम्पनियों ने अपने-अपने उत्पादन में वृद्धि की है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के लिए चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश भारत ही है, जिसके साथ वो इतने बड़े स्तर पर व्यापार करता है। पिछले कुछ महीनों से अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में पिछले महीने 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण भारत से कई वस्तुओं का निर्यात अमेरिका और चीन दोनों ही देशों में तेज़ी से बढ़ा है और इस वित्त वर्ष के आख़िर तक यह निर्यात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले साल जुलाई से ही भारत से चीन में परम्परागत कैमिकल उत्पादों के अलावा चावल, सोयाबीन, फल और मक्के जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात काफी बढ़ रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच भारत जिस सेक्टर्स में फ़ायदा उठा सकता है, वहां पर भारत फ़ायदा उठा रहा है और निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत से चीन में समुद्री उत्पाद, ऑर्गनिक केमिकल्स, प्लास्टिक, पेट्रोलियम उत्पाद, अंगूर, चावल आदि का निर्यात इस दौरान बढ़ा है।
इधर चीन ने पिछले साल जुलाई के महीने से ही अमेरिका से होने वाले आयात पर भारी टैरिफ लगा रखा है, और इसी कारण से चीन में अमेरिकी उत्पादों की क़ीमत काफ़ी बढ़ गई है। अमेरिकी उत्पादों की क़ीमत बढ़ने के बाद चीनी कम्पनियां कच्चे माल के लिए वैकल्पिक आयात पर ज़ोर दे रही हैं, और इसी कारण से भारत का फ़ायदा हो रहा है।
दरअसल, अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के पीछे दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे की लड़ाई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल से दोनों देशों ने एक-दूसरे से किए जाने वाले आयात पर शुल्क लगाया था, जिसके बाद इसे दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर कहा जाने लगा। हमेशा अपने हित देखने वाला अमेरिका, चीन के साथ अपने व्यापार संतुलन को ठीक करने की कोशिश कर रहा है और इसलिए चीनी सामान पर आयात शुल्क बढ़ाने जैसे फ़ैसले अमेरिका इस समय ले रहा है।
अमेरिका और चीन के बीच शुरू हुए ट्रेड वॉर से धीरे-धीरे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने लगा। जिसके बाद दोनों देश के नेताओं ने दिसम्बर में फ़ैसला किया था कि ट्रेड वॉर को ख़त्म किया जाए। इस सबके बीच ट्रम्प ने साफ़ कहा कि वे चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करना चाहते हैं। साल 2018 में अमेरिकी और चीन के बीच व्यापार घाटा 378.73 अरब डॉलर था। इसी घाटे को कम करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के सामने शर्त रखी है कि अमेरिकी सामान के लिए चीनी बाज़ार को खोला जाए और चीन, अमेरिकी कम्पनियों को अपनी तकनीक शेयर करने के लिए मज़बूर करना बंद करे।
वहीं इधर भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले 10 सालों से चला आ रहा है। इसका मतलब है कि चीन ज़्यादा मात्रा में भारत में वस्तुओं का निर्यात करता है, जबकि उसकी तुलना में भारत से कम मात्रा में वस्तुओं का निर्यात चीन होता है। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के बाद चीन ने ज़रूरी वस्तुओं के आयात के लिए अमेरिका की बजाय भारत से उसका आयात करने का फ़ैसले लिया है। इसी कारण भारत को फ़ायदा हो रहा है जिसके कारण भारत ने चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को 10 सालों के बाद कम करने में सफ़लता हासिल की है।
MAY 06 (WTN) – आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी कि दो लोगों की लड़ाई में कई बार तीसरे का भला हो जाता है। कुछ ऐसा ही इन दिनों अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण हो रहा है। दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण भारत जमकर फ़ायदा उठा रहा है। क्या है यह पूरा मामला? आइये इसके बारे में विस्तार से आपको बताते हैं।
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने देश की कम्पनियों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए विदेशी कम्पनियों पर ज़्यादा टैक्स लगा रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि क़रीब 200 अरब डॉलर की चीनी वस्तुओं पर लगने वाले आयात कर को इसी सप्ताह 10 मई से बढ़ाया जाएगा, और चाइनीज़ इम्पोर्ट पर शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। दरअसल, व्यापार के लिए अमरीका, चीन पर ग़लत तरीक़े अपनाने का आरोप लगाता रहा है>
लेकिन अमेरिका और चीन के बीच हो रहे इस ट्रेड वॉर का फ़ायदा भारत को मिल रहा है। विदेशी व्यापार के जानकारों के मुताबिक़, अमेरिकी प्रतिबन्धों के कारण साल 2018-19 में भारत से अमेरिका को एल्युमिनियम के निर्यात में काफ़ी वृद्धि हुई है। जानकारों के अनुसार, यदि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर चलता रहता तो यही ट्रेंड साल 2019-20 में भी जारी रह सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत से अमेरिका को एल्युमिनियम का निर्यात साल 2018 में 58 प्रतिशत बढ़कर 22.1 करोड़ डॉलर का हो गया है। अमेरिकी बाज़ारों में भारतीय एल्युमिनियम की मांग अभी भी तेज़ बनी हई है। अमेरिका द्वारा चीन पर प्रतिबंध लगाने के बाद अमेरिकी ख़रीददार अब भारत का रुख कर रहे हैं। इसी कारण नाल्को, हिंडाल्को और वेदांता जैसी भारतीय एल्युमिनियम कम्पनियों ने अपने-अपने उत्पादन में वृद्धि की है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के लिए चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश भारत ही है, जिसके साथ वो इतने बड़े स्तर पर व्यापार करता है। पिछले कुछ महीनों से अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में पिछले महीने 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण भारत से कई वस्तुओं का निर्यात अमेरिका और चीन दोनों ही देशों में तेज़ी से बढ़ा है और इस वित्त वर्ष के आख़िर तक यह निर्यात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले साल जुलाई से ही भारत से चीन में परम्परागत कैमिकल उत्पादों के अलावा चावल, सोयाबीन, फल और मक्के जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात काफी बढ़ रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच भारत जिस सेक्टर्स में फ़ायदा उठा सकता है, वहां पर भारत फ़ायदा उठा रहा है और निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत से चीन में समुद्री उत्पाद, ऑर्गनिक केमिकल्स, प्लास्टिक, पेट्रोलियम उत्पाद, अंगूर, चावल आदि का निर्यात इस दौरान बढ़ा है।
इधर चीन ने पिछले साल जुलाई के महीने से ही अमेरिका से होने वाले आयात पर भारी टैरिफ लगा रखा है, और इसी कारण से चीन में अमेरिकी उत्पादों की क़ीमत काफ़ी बढ़ गई है। अमेरिकी उत्पादों की क़ीमत बढ़ने के बाद चीनी कम्पनियां कच्चे माल के लिए वैकल्पिक आयात पर ज़ोर दे रही हैं, और इसी कारण से भारत का फ़ायदा हो रहा है।
दरअसल, अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के पीछे दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे की लड़ाई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल से दोनों देशों ने एक-दूसरे से किए जाने वाले आयात पर शुल्क लगाया था, जिसके बाद इसे दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर कहा जाने लगा। हमेशा अपने हित देखने वाला अमेरिका, चीन के साथ अपने व्यापार संतुलन को ठीक करने की कोशिश कर रहा है और इसलिए चीनी सामान पर आयात शुल्क बढ़ाने जैसे फ़ैसले अमेरिका इस समय ले रहा है।
अमेरिका और चीन के बीच शुरू हुए ट्रेड वॉर से धीरे-धीरे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने लगा। जिसके बाद दोनों देश के नेताओं ने दिसम्बर में फ़ैसला किया था कि ट्रेड वॉर को ख़त्म किया जाए। इस सबके बीच ट्रम्प ने साफ़ कहा कि वे चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करना चाहते हैं। साल 2018 में अमेरिकी और चीन के बीच व्यापार घाटा 378.73 अरब डॉलर था। इसी घाटे को कम करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के सामने शर्त रखी है कि अमेरिकी सामान के लिए चीनी बाज़ार को खोला जाए और चीन, अमेरिकी कम्पनियों को अपनी तकनीक शेयर करने के लिए मज़बूर करना बंद करे।
वहीं इधर भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले 10 सालों से चला आ रहा है। इसका मतलब है कि चीन ज़्यादा मात्रा में भारत में वस्तुओं का निर्यात करता है, जबकि उसकी तुलना में भारत से कम मात्रा में वस्तुओं का निर्यात चीन होता है। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के बाद चीन ने ज़रूरी वस्तुओं के आयात के लिए अमेरिका की बजाय भारत से उसका आयात करने का फ़ैसले लिया है। इसी कारण भारत को फ़ायदा हो रहा है जिसके कारण भारत ने चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को 10 सालों के बाद कम करने में सफ़लता हासिल की है।