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लाखों रोज़गार और सस्ते वाई-फाई हॉट स्पॉट का ‘वादा’ पूरा करने जा रही मोदी सरकार

Friday - May 17, 2019 1:59 pm , Category : WTN HINDI
जून से शुरू होगी वाई-फाई हॉट स्पॉट की इंटरपोर्टेबिलिटी सुविधा
जून से शुरू होगी वाई-फाई हॉट स्पॉट की इंटरपोर्टेबिलिटी सुविधा

मोदी सरकार की ‘महत्वाकांक्षी’ वाई-फाई हॉट स्पॉट योजना से देशभर में खुलने जा रहे 10 लाख डाटा सेन्टर

MAY 17 (WTN) – यदि मोदी सरकार के दावों को सच माना जाए, तो आने वाले कुछ महीनों में लाखों की तादात में लोगों को रोज़गार मिलने के साथ-साथ सस्ती क़ीमत पर वाई-फाई हॉट स्पॉट की सुविधा मिलने वाली है। ऐसा क्यों, हम आपको बताते हैं। दरअसल, देशभर में वाई-फाई हॉट स्पॉट लगने वाले हैं, जिसके बाद लोगों को रोज़गार तो मिलेगा ही साथ ही कम क़ीमत पर वाई-फाई हॉट स्पॉट की सुविधा भी लोगों को मिलेगी।

सबसे पहले आपको बताते हैं कि यह वाई-फाई हॉट स्पॉट की सुविधा है क्या? दरअसल, अभी तक आप जिस सिम का उपयोग करते हैं उसी कम्पनी के वाई-फाई हॉट स्पॉट से कनेक्शन ले पाते थे लेकिन जून के महीने से अब आप किसी भी टेलीकॉम कम्पनी के वाई-फाई हॉट स्पॉट से अपने मोबाइल फ़ोन को कनेक्ट कर सकेंगे, चाहे आप उस कम्पनी के ग्राहक हो या नहीं।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, गृह मंत्रालय ने वाई-फाई हॉट स्पॉट की इंटरपोर्टेबिलिटी को मन्ज़ूरी दे दी है। इस योजना के तहत अब टेलीकॉम कम्पनियां पूरे देश में वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाएंगी। जानकारी के अनुसार, तय समय में दूरसंचार विभाग की 10 लाख हॉट स्पॉट लगाने की योजना है और इस लक्ष्य को इसी साल दिसम्बर तक पूरा करने का प्लान है। इस तरह पूरे देश में क़रीब 10 लाख हॉट स्पॉट होंगे, जिससे टेलीकॉम कम्पनियों के नेटवर्क से बोझ कम होगा।

वाई-फाई हॉट स्पॉट इंटरपोर्टेबिलिटी में ग्राहक को पहली बार दूसरे नेटवर्क से जुडने पर अपनी पूरी जानकारी देनी होगी, लेकिन फ़िर हर बार कनेक्ट होते समय यूजर नेम और पासवर्ड नहीं डालना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुरक्षा कारणों के चलते अभी तक इस योजना को मन्ज़ूरी नहीं दी गई थी। इस प्लान के लिए दूरसंचार विभाग लाइसेंस की शर्तों में बदलाव करने जा रहा है, जिसमें डाटा रोमिंग को लाइसेंस की शर्तं में शामिल किया जाएगा।

वाई-फाई हॉट स्पॉट इंटरपोर्टेबिलिटी की सुविधा मिलने के बाद किसी भी कम्पनी का ग्राहक, दूसरी कम्पनी के वाई-फाई हॉट स्पॉट से जुड़ सकेगा। टेलीकॉम क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, टेलिकॉम कम्पनियां अपने सब्सक्राइबर बेस और प्रॉफिट में तेज़ी लाने के लिए ग्राहकों को लुभा रही हैं। इसलिए प्रतिस्पर्धा के चलते ग्राहकों को वाई-फाई हॉट स्पॉट की सेवा कम क़ीमत पर मिल सकती है। दावा है कि इस योजना की शुरुआत के साथ तीन साल के अन्दर ही हॉट स्पॉट की संख्या 15 लाख हो जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वाई-फाई हॉट स्पॉट एक फिजिकल लोकेशन होती है, जहां उपभोक्ता इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से राउटर के साथ WLAN के माध्यम से इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं। आम भाषा में कहा जाए तो इन लोकेशन पर वाई-फाई का उपयोग किया जा सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले 5 लाख सार्वजनिक वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाने की योजना थी, लेकिन इसे बढ़ाकर अब 10 लाख कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि इससे आम जनता को सस्ती दर पर इंटरनेट सेवा मुहैया हो सकेगी। इस बारे में दूरसंचार विभाग का कहना है कि इससे निजी क्षेत्र के लोगों को बड़े पैमाने पर रोज़गार मिलेगा, और देश में इंटरनेट सुविधा का विस्तार होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्राई ने एसटीडी-पीसीओ पर आधारित पीडीओ (सार्वजनिक डाटा कार्यालय) मॉडल अपनी सिफारिश में पेश किया था। इसी मॉडल के आधार पर अब डाटा कार्यालय हर छोटे बड़े शहरों और कस्मों में हर कहीं दिखाई देंगे। दावा किया जा रहा है कि इससे छोटे ऑपरेटर्स को बाज़ार में आसानी से प्रवेश मिलेगा,  इसके साथ ही ज़रूरत के अनुसार छोटे इंटरनेट रिचार्ज का पैक मिल सकेगा।

सरकार की यह योजना है तो तारीफ़-ए-क़ाबिल, लेकिन देखना होगा कि यह कितना सफ़ल हो पाती है? क्योंकि जिस तरह से उपभोक्ता अपने स्मार्ट फ़ोन की सिम में इंटरनेट पैकेज को रिचार्ज करा लेता है, तो फ़िर वाई-फाई हॉट स्पॉट का वो उपयोग क्यों करेगा? लेकिन कहा जा रहा है कि वाई-फाई हॉट स्पॉट की तेज़ गति के कारण यह जल्द ही लोगों में लोकप्रिय होगा। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि सरकार के दावों में कितनी सच्चाई है?