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बलूचों के कारण चीन की महत्वाकांक्षी सीपीईसी परियोजना पर संकट के बादल!

Saturday - May 18, 2019 3:49 pm , Category : WTN HINDI
सीपीईसी प्रोजेक्ट के विरोध में बलूचिस्तान के अलगाववादी
सीपीईसी प्रोजेक्ट के विरोध में बलूचिस्तान के अलगाववादी

चीन और पाकिस्तान की ‘ख़िलाफत’ में सामने आए बलूच

MAY 18 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि विस्तारवादी चीन, पाकिस्तान में अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना सीपीईसी के लिए काफ़ी मशक्कत कर रहा है। चीन की मंशा है कि यह प्रोजेक्ट जल्द से जल्द पूरा हो जाए। लेकिन चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में रुकावट पैदा हो सकती है, और यह रुकावट पैदा करने जा रहे हैं पाकिस्तान के प्रांत बलूचिस्तान के अलगाववादी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सीपीईसी प्रोजक्ट को निशाना बनाते हुए पिछले सप्ताह कई आत्मघाती हमले किये गये हैं। वहीं इसी सप्ताह पाकिस्तान के समुद्री तट पर ग्वादर के पास पार्ल कॉन्टिनेंटल होटल पर आत्मघाती हमला किया गया। जानकारी के लिए बता दें कि सीपीईसी प्रोजेक्ट चीन के बेल्ट ऐंड रोड का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो चीन के शिनजियांग राज्य को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के जरिये चीन की पहुंच अऱब सागर तक हो जाएगी।

चीन के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि सीपीईसी प्रोजेक्ट के तहत पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में कई काम होने हैं। दरअसल, बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे ग़रीब प्रांत है और सालों से बलूचिस्तान अलगाववादियों और धार्मिक सम्प्रदायों के बीच संघर्ष के कारण पिछड़ा हुआ है। ऐसे में बलूच लोग वहां पर चीन का जमकर विरोध कर रहे हैं।

ग्वादर में हुए आत्मघाती हमले की ज़िम्मेदारी अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है। जानकारी के मुताबिक़, ग्वादर बंदरगाह स्थित होटल में आने वाले चीनी और पाकिस्तानी निवेशक बीएलए के निशाने पर थे। बीएलए का इस बारे में कहना है कि उसने बलूचिस्तान में चीन को शोषण आधारित परियोजनाओं को बंद करने की चेतावनी दी थी। वहीं बीएलए ने चीन के उस रूख पर भी नाराज़गी दिखाई है, जिसमें उसने बलूच लोगों के दमन का समर्थन किया है। बीएलए ने धमकी दी है कि यदि बलूचिस्तान में चीन की दखलंदाजी जारी रही, तो इस तरह के हमले और भी होते रहेंगे।

कहा जा रहा है कि ग्वादर के पार्ल कॉन्टिनेंटल होटल पर हुआ हमला चीन के महत्वाकांक्षी सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। ऐसा इसलिए, क्योंकि सीपीईसी का एक बहुत ही अहम हिस्सा इसी इलाके से होकर गुजरता है। यदि बलूच अलगाववादियों ने इस प्रोजेक्ट को निशाने पर ले लिया, तो चीन के लिए यह एक बहुत बड़ा ख़तरा होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बलूचिस्तान काफ़ी लम्बे समय से पाकिस्तान का एक संघर्षरत प्रांत रहा है। दशकों से बलूच लोग पाकिस्तान से स्वायत्तता और संसाधनों पर अपना हक़ मांग रहे हैं। बलूचिस्तान के लोगों की आवाज़ को दबाने के लिए पाकिस्तान की सेना ने बलूच अलगाववादियों पर काफ़ी जुल्म किये हैं, जिसकी गवाह पूरी दुनिया रही है।

इस बारे में जानकारों का कहना है कि बलूचिस्तान में चीनी निवेश के आने से वहां पर अलगवादी आंदोलन और भी तेज़ हो सकते हैं। वहीं चीनी निवेश की सुरक्षा में पाकिस्तान की सेना की वहां पर उपस्थिति होने के कारण बलूचों में असंतोष बढ़ गया है। यह पहली बार है कि बलूच अलगाववादी अपना विरोध जताने के लिए अब आत्मघाती हमलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि बलूचिस्तान के अलगाववादी इस तरह के आत्मघाती हमले जान बूझकर कर रहे हैं, क्योंकि ऐसा करके वो पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ़ आकर्षित करना चाहते हैं।

जानकारों का मत है कि चीन के ख़िलाफ़ बलूचों में गुस्सा वास्तविक है, क्योंकि चीन ने बलूचों के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी दमन का समर्थन किया है। लेकिन बलूच लोगों का असली गुस्सा अभी भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ही है। बलूचिस्तान के लोगों का मानना है कि उनके पिछड़ेपन, समस्याओं और हिंसा के लिए पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना ही ख़ासतौर से ज़िम्मेदार है।

इधर, मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, चीनी अधिकारी पाकिस्तान से निर्वासित बलूच राष्ट्रवादियों को घर लाने के बदले उनसे मदद की मांग कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि चीनी अधिकारी अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों में निर्वासित क़रीब आधा दर्जन बलूच राष्ट्रवादियों के सम्पर्क में हैं। चीनी अधिकारी निर्वासित बलूचों की सुरक्षित घर वापसी के बदले में उनसे सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए बलूचिस्तान में मदद और सुरक्षा की मांग कर सकते हैं।

अब देखना होगा कि बलूचिस्तान में चीन किस तरह से अपने सीपीईसी प्रोजक्ट को पूरा कर पाता है? जिस तरह के हमले चीन और पाकिस्तानी सरकार के लोगों को निशाने बनाते हुए ग्वादर में हुए हैं, उससे साफ़ जाहिर होता है कि बलूच अलगाववादी शांत बैठने वाले नहीं हैं। वे समय-समय पर हमले करके चीन और पूरी दुनिया के सामने अपनी आवाज़ बुलन्द करना चाहते हैं कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। अब जबकि बलूच अलगाववादी आत्मघाती हमले तक करने लगे हैं, तो ऐसे में देखना होगा कि चीन की क्या रणनीति इस पूरे मामले पर रहती है?