एचआईवी-एड्स वैक्सीन जल्द बनने की संभावना, भारत से 2024 तक हो सकता है एचआईवी-एड्स का सफाया: डाॅ. दीपक चतुर्वेदी
Saturday - May 25, 2019 5:38 pm ,
Category : WTN HINDI
छह पद्धतियों से हो रहा दुनियाभर में एड्स का इलाज
एंटीरेट्रोवायरल थैरेपी एड्स उपचार में सबसे प्रभावी
दुनिया में एक प्रतिशत ऐसे भी लोग जिन पर नहीं होता एड्स वायरस का असर
भोपाल, 25 मई 2019 (WTN)। विगत 50 वर्षों से पूरे विश्व में बड़ी-बड़ी सेलीब्रिटीज से लेकर आम आदमी तक लाखों लोगों की दर्दनाक मौतों का कारण बने एचआईवी-एड्स का वायरस अब स्वयं खत्म होने जा रहा है। नवीनतम खोजों व वायरस को शरीर में खोजकर खत्म करने वाले आधुनिक उपचारों के चलते वर्ष 2024 तक भारत के एड्समुक्त होने की पूरी संभावना है। वैज्ञानिक अब इस रोग के वैक्सीन को बनाने के भी बहुत निकट पहुंच गए हैं। दुनियाभर में इसके 4 करोड़ मरीज हैं जबकि भारत में इनकी संख्या 20 लाख है। पिछले वर्ष भारत में 88 हजार लोगों इसके वायरस के संक्रमण से ग्रसित हुए जबकि लंबे समय से बीमार 68 हजार लोगों की इस रोग से मृत्यु हो गई।
उक्त आशय की जानकारी आज आयोजित एक पत्रकार वार्ता में शहर के जाने-माने चिकित्सक एवं मेडीसिन विशेषज्ञ डाॅ. दीपक चतुर्वेदी ने दी। इस पत्रकार वार्ता का आयोजन 18 मई से आरंभ हुए एचआईवी-एड्स वैक्सीनेशन दिवस व जागरूकता सप्ताह के समापन अवसर पर किया गया। उन्होंने बताया कि पोलियो की तरह भारत को एड्समुक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन तक के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक कार्ययोजना (2017-2024 ) पर काम कर रही है।
एड्स उपचार में नवीनतम प्रगति
डाॅ. चतुर्वेदी ने बताया कि इस वर्ष एड्स रोगियों के लिए एक ऐसी गोली बाजार में आई है जिसने अनेक गोलियां का काम एक गोली में कर दिया है। यह गोली एड्स के वायरस को बढ़ने नहीं देती। वर्तमान में एंटीरेट्रोवायरल थैरेपी, बायोनार डबल वैक्सीन, शाॅक एंड किल, इम्यूनो थैरेपी, फ्रेंच वीएसी-35 तथा जीन थैरेपी जैसी माॅडर्न थैरेपीज से किया जा रहा है। लगभग 95 प्रतिशत की सफलता दर के साथ एंटीरेट्रोवायरल थैरेपी अब तक की सबसे कारगर थैरेपी है। थाईलैंड, नार्वे व फ्रांस सहित दुनिया के विभिन्न देशों में वैज्ञानिकों ने अलग-अलग एड्स वैक्सीनों विकसित की हैं जिनके परिणाम काफी सकारात्मक रहे हैं।
दिग्गज खिलाड़ियों से लेकर अभिनेता बने एड्स का शिकार
उन्होंने आगे बताया कि भारत में सामाजिक कारणों से एड्स से होने वाली मौतों को छिपाया जाता है जबकि विकसित देशों में लोग खुलकर इस बारे में सामने आते हैं। अभिनेता राॅक हडसन, राजनेता निकलस ईडन, गायक फ्रेडी मर्करी तथा टेनिस प्लेयर आर्थर एश ने इस रोग की वजह से असमय मौत का शिकार बने और इन्होंने अपने जीते जी इस रोग से ग्रसित होने की बात स्वीकार की।
इलाज न कराने पर 11 वर्ष में हो जाती है मृत्यु
डाॅ. चतुर्वेदी ने बताया कि आधुनिक दवाओं के सेवन से कोई भी एड्स पीड़ित व्यक्ति अपनी पूरी उम्र सामान्य तरह से जी सकता है जबकि इसका इलाज न कराने पर सामान्यतौर पर 11 वर्ष के भीतर व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
बचाव ही इस रोग का उपचार
एचआईवी-एड्स से बचाव के उपायों पर चर्चा करते हुए डाॅ. चतुर्वेदी ने कहा एचआईवी के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन लंबे समय तक और स्वस्थ जीवन जीने के लिए वायरस वाले अधिकांश लोगों को सक्षम करने के लिए उपचार हैं। एचआईवी को रोकने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप सेक्स के लिए कंडोम का इस्तेमाल करें और सुई या अन्य इंजेक्शन लगाने वाले उपकरणों को कभी साझा न करें।
क्या है एचआईवी-एड्स?
डाॅ. चतुर्वेदी ने कहा कि ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस या एचआईवी, वह वायरस है जो एड्स का कारण बनता है। एड्स एचआईवी संक्रमण का अंतिम चरण है। इस अवस्था में शरीर जीवन को खतरे में डालने वाले संक्रमण से नहीं लड़ पाता है। एचआईवी प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है और संक्रमण व बीमारी से लड़ने की आपकी क्षमता को कमजोर करता है। - Window To News