भाजपा के ‘मिशन पश्चिम बंगाल’ से उड़ी ममता बनर्जी की नींद!
Monday - May 27, 2019 1:28 pm ,
Category : WTN HINDI
‘ख़तरे’ में ममता बनर्जी की राजनीति
लोकसभा चुनाव में ‘प्रचण्ड’ जीत के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर भाजपा का ‘फोकस’
MAY 27 (WTN) – लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचण्ड जीत के बाद यदि सबसे ज़्यादा ख़तरा किसी को पैदा हो गया है, तो वह हो गया है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को। जैसा कि आप जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूरे देश में 303 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल कर ममता बनर्जी की रातों की नींद हराम कर दी है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा की ज़ोरदार जीत के बाद ममता बनर्जी की आगे की राह काफ़ी कठिन नज़र आ रही है। बंगाल में शानदार विजय के बाद भाजपा की रणनीति अब विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराने की है। 18 सीटों की जीत के बाद उत्साहित भाजपा दिनों दिन पश्चिम बंगाल में अपना कैडर मज़बूत कर रही है, ताकि विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को टक्कर दी जा सके।
लोकसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद ममता बनर्जी की विधानसभा चुनाव के लिए चिंता बढ़ गई है। ममता बनर्जी के सामने ही भाजपा पिछले पांच सालों में काफ़ी मजबूत बनकर पश्चिम बंगाल में उभरी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सिर्फ़ 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को राज्य की 42 में से 34 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।
2014 से 2019, इन पांच सालों के दौरान पश्चिम बंगाल में खुद को मज़बूत करने के लिए भाजपा ने काफ़ी मेहनत की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने हर विधानसभा सीट पर पार्टी को खड़ा करने के लिए नये सिरे से काम किया, जिसका नतीजा यह रहा कि इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की। लोकसभा चुनाव में भाजपा को 16 सीटों का जबरदस्त फ़ायदा मिला, तो ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को 12 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा।
लोकसभा चुनाव में बंगाल में ज़ोरदार जीत के बाद भाजपा की नज़र अब विधानसभा चुनावों पर है, जहां पर भाजपा पहली बार सत्ता में आने के लिए कोशिश कर रही है। भाजपा की बढ़ती ताक़त से ख़बरदार ममता बनर्जी अब पार्टी में भारी फेरबदल कर रही हैं। भाजपा की चुनौती से निपटने के लिए ममता बनर्जी ने सबसे पहले अपनी पार्टी के संगठन में ही फेरबदल करना शुरू कर दिया है। ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी से कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां वापस ले ली हैं। भाजपा के बढ़ते असर से सावधान ममता ने अभिषेक से उन सारे ज़िलों की कमान वापस ले ली है, जहां भाजपा ने जीत हासिल की है।
लोकसभा चुनाव में सीटों के हिसाब से तो तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा से 4 सीटें ज़्यादा जीती हैं, लेकिन वोट प्रतिशत के मामले में भाजपा, तृणमूल कांग्रेस के काफ़ी क़रीब आ गई है। इस लोकसभा चुनाव में 22 सीटें जीतने वाली टीएमसी को 43.28 प्रतिशत मत मिले हैं, तो वहीं 18 सीटें जीतने वाली भाजपा को 40.25 प्रतिशत वोट मिले हैं। लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत के हिसाब से भाजपा, टीएमसी से ज़्यादा पीछे नहीं है। यही कारण है कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को भाजपा का डर सताने लगा है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 129 सीटों पर बढ़त हासिल की है। वहीं 60 विधानसभा सीटों पर भाजपा 4 हज़ार से कम वोटों से हारी है। पश्चिम बंगाल की राजनीति के जानकारों का मानना है कि राज्य की 192 सीटें ऐसी हैं जहां पर भाजपा, टीएमसी को मात दे सकती है। यह वो सीटें हैं जो कि बंगाल की उत्तर या फ़िर पश्चिम क्षेत्र में आती हैं।
आंकड़ों से साफ़ जाहिर है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा जोरदार तरीक़े से जनता के बीच अपनी पकड़ मज़बूत कर रही है। यदि लोकसभा चुनाव को आधार मान लिया जाए, तो साफ़ जाहिर होता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को भाजपा की ओर से से बहुत बड़ी चुनौती मिलने वाली है।
पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले भाजपा वहां पर अपने कैडर को और भी मज़बूत करने की कोशिश करेगी और राज्य के लोगों के बीच अपनी नीयत और नीतियों को पहुंचाने का काम करेगी। यदि भाजपा पश्चिम बंगाल के वोटर्स में पैठ जमाने में कामयाब हो गई, तो कोई बड़ी बात नहीं कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों टीएमसी को हार का सामना करना पड़े।
MAY 27 (WTN) – लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचण्ड जीत के बाद यदि सबसे ज़्यादा ख़तरा किसी को पैदा हो गया है, तो वह हो गया है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को। जैसा कि आप जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूरे देश में 303 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल कर ममता बनर्जी की रातों की नींद हराम कर दी है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा की ज़ोरदार जीत के बाद ममता बनर्जी की आगे की राह काफ़ी कठिन नज़र आ रही है। बंगाल में शानदार विजय के बाद भाजपा की रणनीति अब विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराने की है। 18 सीटों की जीत के बाद उत्साहित भाजपा दिनों दिन पश्चिम बंगाल में अपना कैडर मज़बूत कर रही है, ताकि विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को टक्कर दी जा सके।
लोकसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद ममता बनर्जी की विधानसभा चुनाव के लिए चिंता बढ़ गई है। ममता बनर्जी के सामने ही भाजपा पिछले पांच सालों में काफ़ी मजबूत बनकर पश्चिम बंगाल में उभरी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सिर्फ़ 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को राज्य की 42 में से 34 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।
2014 से 2019, इन पांच सालों के दौरान पश्चिम बंगाल में खुद को मज़बूत करने के लिए भाजपा ने काफ़ी मेहनत की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने हर विधानसभा सीट पर पार्टी को खड़ा करने के लिए नये सिरे से काम किया, जिसका नतीजा यह रहा कि इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की। लोकसभा चुनाव में भाजपा को 16 सीटों का जबरदस्त फ़ायदा मिला, तो ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को 12 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा।
लोकसभा चुनाव में बंगाल में ज़ोरदार जीत के बाद भाजपा की नज़र अब विधानसभा चुनावों पर है, जहां पर भाजपा पहली बार सत्ता में आने के लिए कोशिश कर रही है। भाजपा की बढ़ती ताक़त से ख़बरदार ममता बनर्जी अब पार्टी में भारी फेरबदल कर रही हैं। भाजपा की चुनौती से निपटने के लिए ममता बनर्जी ने सबसे पहले अपनी पार्टी के संगठन में ही फेरबदल करना शुरू कर दिया है। ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी से कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां वापस ले ली हैं। भाजपा के बढ़ते असर से सावधान ममता ने अभिषेक से उन सारे ज़िलों की कमान वापस ले ली है, जहां भाजपा ने जीत हासिल की है।
लोकसभा चुनाव में सीटों के हिसाब से तो तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा से 4 सीटें ज़्यादा जीती हैं, लेकिन वोट प्रतिशत के मामले में भाजपा, तृणमूल कांग्रेस के काफ़ी क़रीब आ गई है। इस लोकसभा चुनाव में 22 सीटें जीतने वाली टीएमसी को 43.28 प्रतिशत मत मिले हैं, तो वहीं 18 सीटें जीतने वाली भाजपा को 40.25 प्रतिशत वोट मिले हैं। लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत के हिसाब से भाजपा, टीएमसी से ज़्यादा पीछे नहीं है। यही कारण है कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को भाजपा का डर सताने लगा है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 129 सीटों पर बढ़त हासिल की है। वहीं 60 विधानसभा सीटों पर भाजपा 4 हज़ार से कम वोटों से हारी है। पश्चिम बंगाल की राजनीति के जानकारों का मानना है कि राज्य की 192 सीटें ऐसी हैं जहां पर भाजपा, टीएमसी को मात दे सकती है। यह वो सीटें हैं जो कि बंगाल की उत्तर या फ़िर पश्चिम क्षेत्र में आती हैं।
आंकड़ों से साफ़ जाहिर है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा जोरदार तरीक़े से जनता के बीच अपनी पकड़ मज़बूत कर रही है। यदि लोकसभा चुनाव को आधार मान लिया जाए, तो साफ़ जाहिर होता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को भाजपा की ओर से से बहुत बड़ी चुनौती मिलने वाली है।
पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले भाजपा वहां पर अपने कैडर को और भी मज़बूत करने की कोशिश करेगी और राज्य के लोगों के बीच अपनी नीयत और नीतियों को पहुंचाने का काम करेगी। यदि भाजपा पश्चिम बंगाल के वोटर्स में पैठ जमाने में कामयाब हो गई, तो कोई बड़ी बात नहीं कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों टीएमसी को हार का सामना करना पड़े।