जल्द ही दिखेगी मोदी सरकार के पांच साल के आर्थिक एजेंडे की ‘झलक’!
Tuesday - May 28, 2019 11:02 am ,
Category : WTN HINDI
मोदी सरकार के आर्थिक फ़ैसलों पर टिकी निगाहें
मोदी सरकार के पहले पूर्ण बजट और जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिये जा सकते हैं ‘बड़े फ़ैसले’
MAY 28 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत के बाद एक बार फ़िर से केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल से सभी को काफ़ी आशाएं हैं। बात करें मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की तो अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने काफ़ी कड़े फ़ैसले लिये थे। नोटबंदी और जीएसटी जैसे फ़ैसलों के कारण मोदी सरकार को कई बार आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था, लेकिन टैक्स राहत और नियंत्रित महंगाई के कारण आम जनता का साथ भी मोदी सरकार को मिला।
30 मई को नरेन्द्र मोदी एक बार फ़िर से प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। ऐसे में मोदी सरकार के शुरूआती महीनों में उनके द्वारा लिये जाने वाले आर्थिक फ़ैसलों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यह सही है कि मोदी सरकार के पास लोकसभा में प्रचण्ड बहुमत है, लेकिन यही बहुमत मोदी सरकार के लिए एक चुनौती भी है। चुनौती इसलिए, क्योंकि मोदी सरकार पर अब दबाव होगा कि वो आर्थिक सुधार की दिशा में आगे बढ़े, लेकिन साथ ही आम जनता को महंगाई और टैक्स में राहत मिले।
अमेरिका की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक़, यदि मोदी सरकार ने अपने आर्थिक एजेंडे पर काम किया तो आने वाले पांच सालों में नरेन्द्र मोदी, भारत के लिए आगामी 25 सालों की आर्थिक प्रगति के रास्ते खोल देंगे। खैर आने वाले पांच सालों में मोदी सरकार क्या-क्या काम करेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन शुरुआती कुछ महीनों में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
सबसे पहले मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट से सभी को काफ़ी आशाएं हैं। मोदी सरकार का पहला बजट आने वाले समय के लिए एक रोडमैप तैयार करेगा। कहा जा रहा है कि आर्थिक सुधारों की एक बड़ी झलक मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में मोदी सरकार कड़े आर्थिक फ़ैसले ले सकती है, लेकिन साथ ही कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए आम जनता को काफ़ी सौगातें भी दे सकती है।
बजट के साथ ही अगले महीने ही भारतीय रिज़र्व बैंक की क्रेडिट पॉलिसी की घोषणा होना है। रिज़र्व बैंक की क्रेडिट पॉलिसी की अगली बैठक 6 जून को है। रिज़र्व बैंक की इस बैठक को लेकर बाज़ार को काफ़ी उम्मीदें हैं। कहा जा रहा है कि महंगाई को ध्यान में रखते हुए रिज़र्व बैंक ब्याज दरों पर कोई फ़ैसला ले सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने रिज़र्व बैंक के कर्ज समाधान सर्कुलर को अमान्य कर दिया है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि आरबीआई की क्रेडिट पॉलिसी में प्रावधान सम्भव है।
मोदी सरकार में नये वित्त मंत्री के पदभार सम्भालने के बाद जीएसटी काउंसिल की बैठक भी अगले महीने हो सकती है। कहा जा रहा है कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में बचे हुए पुराने कामों को मंज़ूरी दी जा सकती है। इस बार टैक्स की दरों पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है, वहीं इस बार की जीएसटी काउंसिल की बैठक में पेट्रोलियम प्रोडक्ट को जीएसटी में शामिल किया जा सकता है। जीएसटी प्रधानमंत्री मोदी का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसके जरिये वे देश में एक देश, एक टैक्स के फार्मूले को लागू करने में सफल होते दिख रहे हैं।
मोदी सरकार के लिए बिमल जालान कमेटी की रिपोर्ट का काफ़ी इंतज़ार है। दरअसल, भारतीय रिज़र्व बैंक के पास 10 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा की पूंजी पड़ी हुई है। इस पूंजी का क्या किया जाना चाहिए, इस पर आरबीआई के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। यही कमेटी फैसला करने वाली है कि इस पूंजी को सरकार को दिया जाना चाहिए या बैंक के पास ही रखे रहना चाहिए। मोदी सरकार को आशा है कि यदि इस पूंजी का एक तिहाई हिस्सा भी सरकार को मिल गया तो सरकार के पास एक बड़ी पूंजी होगी, जिसका उपयोग सरकार अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में कर सकती है।
यानी कि साफ़ है कि आने वाले कुछ महीनों में मोदी सरकार की नीतियों और फ़ैसलों से स्पष्ट हो जाएगा कि आने वाले पांच सालों में क्या कुछ आर्थिक एजेंडा मोदी सरकार का रहने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी कड़े आर्थिक फ़ैसले लेने से पीछे नहीं हटने वाले हैं, लेकिन कड़े आर्थिक फ़ैसलों के साथ ही ग़रीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू करने से भी वे पीछे नहीं हटेंगे।
MAY 28 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत के बाद एक बार फ़िर से केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल से सभी को काफ़ी आशाएं हैं। बात करें मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की तो अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने काफ़ी कड़े फ़ैसले लिये थे। नोटबंदी और जीएसटी जैसे फ़ैसलों के कारण मोदी सरकार को कई बार आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था, लेकिन टैक्स राहत और नियंत्रित महंगाई के कारण आम जनता का साथ भी मोदी सरकार को मिला।
30 मई को नरेन्द्र मोदी एक बार फ़िर से प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। ऐसे में मोदी सरकार के शुरूआती महीनों में उनके द्वारा लिये जाने वाले आर्थिक फ़ैसलों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यह सही है कि मोदी सरकार के पास लोकसभा में प्रचण्ड बहुमत है, लेकिन यही बहुमत मोदी सरकार के लिए एक चुनौती भी है। चुनौती इसलिए, क्योंकि मोदी सरकार पर अब दबाव होगा कि वो आर्थिक सुधार की दिशा में आगे बढ़े, लेकिन साथ ही आम जनता को महंगाई और टैक्स में राहत मिले।
अमेरिका की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक़, यदि मोदी सरकार ने अपने आर्थिक एजेंडे पर काम किया तो आने वाले पांच सालों में नरेन्द्र मोदी, भारत के लिए आगामी 25 सालों की आर्थिक प्रगति के रास्ते खोल देंगे। खैर आने वाले पांच सालों में मोदी सरकार क्या-क्या काम करेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन शुरुआती कुछ महीनों में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
सबसे पहले मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट से सभी को काफ़ी आशाएं हैं। मोदी सरकार का पहला बजट आने वाले समय के लिए एक रोडमैप तैयार करेगा। कहा जा रहा है कि आर्थिक सुधारों की एक बड़ी झलक मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में मोदी सरकार कड़े आर्थिक फ़ैसले ले सकती है, लेकिन साथ ही कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए आम जनता को काफ़ी सौगातें भी दे सकती है।
बजट के साथ ही अगले महीने ही भारतीय रिज़र्व बैंक की क्रेडिट पॉलिसी की घोषणा होना है। रिज़र्व बैंक की क्रेडिट पॉलिसी की अगली बैठक 6 जून को है। रिज़र्व बैंक की इस बैठक को लेकर बाज़ार को काफ़ी उम्मीदें हैं। कहा जा रहा है कि महंगाई को ध्यान में रखते हुए रिज़र्व बैंक ब्याज दरों पर कोई फ़ैसला ले सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने रिज़र्व बैंक के कर्ज समाधान सर्कुलर को अमान्य कर दिया है, जिसके बाद कहा जा रहा है कि आरबीआई की क्रेडिट पॉलिसी में प्रावधान सम्भव है।
मोदी सरकार में नये वित्त मंत्री के पदभार सम्भालने के बाद जीएसटी काउंसिल की बैठक भी अगले महीने हो सकती है। कहा जा रहा है कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में बचे हुए पुराने कामों को मंज़ूरी दी जा सकती है। इस बार टैक्स की दरों पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है, वहीं इस बार की जीएसटी काउंसिल की बैठक में पेट्रोलियम प्रोडक्ट को जीएसटी में शामिल किया जा सकता है। जीएसटी प्रधानमंत्री मोदी का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसके जरिये वे देश में एक देश, एक टैक्स के फार्मूले को लागू करने में सफल होते दिख रहे हैं।
मोदी सरकार के लिए बिमल जालान कमेटी की रिपोर्ट का काफ़ी इंतज़ार है। दरअसल, भारतीय रिज़र्व बैंक के पास 10 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा की पूंजी पड़ी हुई है। इस पूंजी का क्या किया जाना चाहिए, इस पर आरबीआई के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। यही कमेटी फैसला करने वाली है कि इस पूंजी को सरकार को दिया जाना चाहिए या बैंक के पास ही रखे रहना चाहिए। मोदी सरकार को आशा है कि यदि इस पूंजी का एक तिहाई हिस्सा भी सरकार को मिल गया तो सरकार के पास एक बड़ी पूंजी होगी, जिसका उपयोग सरकार अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में कर सकती है।
यानी कि साफ़ है कि आने वाले कुछ महीनों में मोदी सरकार की नीतियों और फ़ैसलों से स्पष्ट हो जाएगा कि आने वाले पांच सालों में क्या कुछ आर्थिक एजेंडा मोदी सरकार का रहने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी कड़े आर्थिक फ़ैसले लेने से पीछे नहीं हटने वाले हैं, लेकिन कड़े आर्थिक फ़ैसलों के साथ ही ग़रीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू करने से भी वे पीछे नहीं हटेंगे।