मोदी सरकार को शपथ ग्रहण से पहले मिला अमेरिका से ‘तोहफ़ा’!
Wednesday - May 29, 2019 3:44 pm ,
Category : WTN HINDI
अमेरिका ने भारतीय करेंसी को निगरानी सूची से किया बाहर
अमेरिका ने भारत को दी ‘राहत’, चीन को दिया ‘झटका’!
MAY 29 (WTN) – लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की प्रचण्ड जीत के बाद भारत और नरेन्द्र मोदी के प्रति पूरी दुनिया का नज़रिया बदल गया है। बात करें अमेरिका की तो प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान भारत के अमेरिका के साथ उतार चढ़ाव के सम्बन्ध रहे थे, लेकिन मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिका का भारत के प्रति दृष्टिकोण बदला है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नरेन्द्र मोदी की सत्ता में वापसी के साथ ही भारत को अमेरिका ने एक बड़ी राहत दी है। दरअसल, अमेरिका ने भारत की मुद्रा की निगरानी समिति से बाहर कर दिया है। इस फ़ैसले के बाद अमेरिका, भारतीय रुपये को पहले की तुलना में ज़्यादा महत्व दे सकेगा। हालांकि, अभी भी चीन की मुद्रा युआन अमेरिका की निगरानी समिति में है। चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के बीच चीन के लिए व्यापार की दृष्टि से यह एक बहुत बड़ा झटका है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने इस फ़ैसले के पीछे मोदी सरकार द्वारा पिछले एक साल में उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का इस बारे में कहना है कि मोदी सरकार द्वारा पिछले एक साल में अर्थव्यवस्था के लिए उठाए गये सकारात्मक क़दमों से मौद्रिक नीति को लेकर उनकी आशंकाएं दूर हुई हैं। यही कारण है कि अमेरिका ने भारतीय रूपये को निगरानी समिति से बाहर कर दिया है।
दरअसल, भारत की अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित परिस्थितियों में उल्लेखनीय तरीक़े से बेहतरी हुई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक़, साल 2018 के पहले छह महीनों में रिज़र्व बैंक द्वारा की गई शुद्ध बिक्री से जून 2018 तक की चार तिमाहियों में विदेशी मुद्रा की शुद्ध ख़रीदी कम होकर 4 अरब डॉलर ही रह गई, जो कि जीडीपी का सिर्फ़ 0.2 प्रतिशत ही था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मई 2018 में अमेरिका ने भारत को इस सूची में डाला था। भारत के अलावा चीन, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैण्ड को भी अमेरिका ने इस सूची में शामिल किया था। अब जबकि अमेरिका ने भारत के साथ स्विट्जरलैण्ड को भी इस सूची से बाहर कर दिया है, तो इस सूची में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी के अलावा इटली, आयरलैण्ड, सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम जैसे नये देश भी शामिल हो गये हैं।
आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह अमेरिका की निगरानी समिति क्या है? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी निगरानी समिति दुनिया भर की करेंसी पर गौर करती रहती है। निगरानी समिति को यदि लगता है कि जिस भी देश की करेंसी अमेरिका के मानदण्डों पर ख़रा नहीं उतर रही है तो उस करेंसी को निगरानी समिति की सूची में डाल दिया जाता है। यह समिति उस देश से करेंसी में सुधार के लिए ज़रूरी क़दम उठाने का आग्रह करती है। दरअसल, जिस देश की करेंसी निगरानी समिति के अधीन रहती है, उसे अमेरिका कम महत्व देता है।
जैसा कि आप जानते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच काफ़ी दोस्ताना सम्बन्ध रहे हैं। लोकसभा चुनाव में ज़ोरदार जीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई थी और उनके साथ काम करने की दृढ़ता जताई थी। ट्रम्प ने मोदी को बधाई देते हुए कहा था कि अमेरिकी पूरी तरह से भारत के साथ काम करने को तैयार है। कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के सम्बन्धों को एक नया मुकाम हासिल होगा। दोनों देशों के बीच नये सम्बन्धों की शुरूआत अमेरिकी ने की है, जिसके तहत अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अपनी निगरानी समिति से भारतीय करेंसी को बाहर कर दिया है।
MAY 29 (WTN) – लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की प्रचण्ड जीत के बाद भारत और नरेन्द्र मोदी के प्रति पूरी दुनिया का नज़रिया बदल गया है। बात करें अमेरिका की तो प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान भारत के अमेरिका के साथ उतार चढ़ाव के सम्बन्ध रहे थे, लेकिन मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिका का भारत के प्रति दृष्टिकोण बदला है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नरेन्द्र मोदी की सत्ता में वापसी के साथ ही भारत को अमेरिका ने एक बड़ी राहत दी है। दरअसल, अमेरिका ने भारत की मुद्रा की निगरानी समिति से बाहर कर दिया है। इस फ़ैसले के बाद अमेरिका, भारतीय रुपये को पहले की तुलना में ज़्यादा महत्व दे सकेगा। हालांकि, अभी भी चीन की मुद्रा युआन अमेरिका की निगरानी समिति में है। चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के बीच चीन के लिए व्यापार की दृष्टि से यह एक बहुत बड़ा झटका है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने इस फ़ैसले के पीछे मोदी सरकार द्वारा पिछले एक साल में उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का इस बारे में कहना है कि मोदी सरकार द्वारा पिछले एक साल में अर्थव्यवस्था के लिए उठाए गये सकारात्मक क़दमों से मौद्रिक नीति को लेकर उनकी आशंकाएं दूर हुई हैं। यही कारण है कि अमेरिका ने भारतीय रूपये को निगरानी समिति से बाहर कर दिया है।
दरअसल, भारत की अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित परिस्थितियों में उल्लेखनीय तरीक़े से बेहतरी हुई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक़, साल 2018 के पहले छह महीनों में रिज़र्व बैंक द्वारा की गई शुद्ध बिक्री से जून 2018 तक की चार तिमाहियों में विदेशी मुद्रा की शुद्ध ख़रीदी कम होकर 4 अरब डॉलर ही रह गई, जो कि जीडीपी का सिर्फ़ 0.2 प्रतिशत ही था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मई 2018 में अमेरिका ने भारत को इस सूची में डाला था। भारत के अलावा चीन, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैण्ड को भी अमेरिका ने इस सूची में शामिल किया था। अब जबकि अमेरिका ने भारत के साथ स्विट्जरलैण्ड को भी इस सूची से बाहर कर दिया है, तो इस सूची में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी के अलावा इटली, आयरलैण्ड, सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम जैसे नये देश भी शामिल हो गये हैं।
आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह अमेरिका की निगरानी समिति क्या है? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी निगरानी समिति दुनिया भर की करेंसी पर गौर करती रहती है। निगरानी समिति को यदि लगता है कि जिस भी देश की करेंसी अमेरिका के मानदण्डों पर ख़रा नहीं उतर रही है तो उस करेंसी को निगरानी समिति की सूची में डाल दिया जाता है। यह समिति उस देश से करेंसी में सुधार के लिए ज़रूरी क़दम उठाने का आग्रह करती है। दरअसल, जिस देश की करेंसी निगरानी समिति के अधीन रहती है, उसे अमेरिका कम महत्व देता है।
जैसा कि आप जानते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच काफ़ी दोस्ताना सम्बन्ध रहे हैं। लोकसभा चुनाव में ज़ोरदार जीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई थी और उनके साथ काम करने की दृढ़ता जताई थी। ट्रम्प ने मोदी को बधाई देते हुए कहा था कि अमेरिकी पूरी तरह से भारत के साथ काम करने को तैयार है। कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के सम्बन्धों को एक नया मुकाम हासिल होगा। दोनों देशों के बीच नये सम्बन्धों की शुरूआत अमेरिकी ने की है, जिसके तहत अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अपनी निगरानी समिति से भारतीय करेंसी को बाहर कर दिया है।