रंग लाई मोदी सरकार की मेहनत, साल के आख़िर तक भारत बनेगा दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
Tuesday - June 4, 2019 11:54 am ,
Category : WTN HINDI
ब्रिटेन को पछाड़कर भारत बनेगा पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था
चुनौतियों से निपटते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को दिया नया 'आयाम'
JUNE 04 (WTN) – अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से गति देने के लिए काफ़ी काम किया, जिसका नतीजा अब दिखने लगा है। यदि इसी नीति और नीयत के साथ मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाती रही तो आने वाले दिनों में भारत, ब्रिटेन को पछाड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
IHS मार्किट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में आर्थिक परिदृश्य काफ़ी सकारात्मक नज़र आ रहा है। कहा जा रहा है कि यदि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए ठोस फ़ैसले सही समय पर लेती रही तो 2019-23 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की औसत वृद्धि दर 7 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है। यानी कि यदि विकास का पहिया चलता रहा तो साल 2025 तक भारत, जापान को पीछे छोड़कर एशिया प्रशांत क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
इसे मोदी सरकार की एक उपलब्धि माना जा सकता है कि इस साल के आख़िरी तक भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था से आगे अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था है। अनुमान लगाया जा रहा है कि साल के आख़िरी तक भारत की जीडीपी 3,000 अरब डॉलर के आगे निकल जाएगी, और इस तरह भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय अमेरिका की अर्थव्यवस्था $19.39 ट्रिलियन जीडीपी के साथ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहीं चीन की जीडीपी $12.01 ट्रिलियन, जापान की $4.87 ट्रिलियन, जर्मनी की $3.68 ट्रिलियन और ब्रिटेन की $2.62 ट्रिलियन है। वहीं भारत की जीडीपी इस समय $2.61 ट्रिलियन के साथ छठे स्थान पर है।
मोदी सरकार के पहले पांच सालों में भारत की अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में सुधार हुआ है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले पांच सालों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ती जाएगी, और वैश्विक जीडीपी में भारत का योगदान भी बढ़ेगा। पर्चेसिंग पावर आधारित जीडीपी में इस समय $9.45 ट्रिलियन के साथ भारत का स्थान दुनिया में तीसरा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत की जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा अभी सिर्फ़ 18 प्रतिशत ही है। कहा जा रहा है कि यदि भारत को अपने जीडीपी में और भी गति देना है तो उसे जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र के हिस्से को 25 प्रतिशत तक लाना होगा, जो कि एक लक्ष्य था। बात करें सर्विस सेक्टर की तो भारत में सर्विस सेक्टर में पिछले कुछ सालों से काफ़ी वृद्धि देखी गई है, लेकिन भारतीय जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। इस समय भारत की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान सिर्फ़ 17 प्रतिशत के स्तर तक आ गया है। हालांकि, अन्य देशों की तुलना में फ़िर भी भारत की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान ज़्यादा है।
अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक़ यदि भारत को अपने अर्थव्यवस्था को और भी गति देना है तो उसे निर्यात बढ़ाना होगा और आयात पर कम से कम निर्भर रहना होगा, बचत दर को बढ़ाना होगा, जनसंख्या पर नियंत्रण रखना होगा। आने वाले समय में मोदी सरकार के सामने चुनौती है कि बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए विनिर्माण क्षेत्र और सेवा क्षेत्र में रोज़गार के अवसर किस तरह से मुहैया कराए जाएं। अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहतरीन परिवहन व्यवस्था और बिजली की सुचारू उपलब्धता का काफ़ी महत्व होता है। आने पांच सालों में मोदी सरकार को इन दोनों के तरफ़ भी ध्यान देना होगा।
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के लिए ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस का भी काफ़ी महत्व होता है। साल 2019 की ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भारत की रैंक 190 देशों में 77वीं थी, जो कि अन्य विकासशील देशों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा है। भारत की तुलना में टर्की की रैंकिंग 43, चीन की 46 और मैक्सिको की 54 है। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस में भारत की रैकिंग में सुधार भी मोदी सरकार के लिए एक चुनौती है, क्योंकि इसमें जितना ज़्यादा सुधार होगा उतना ही ज़्यादा विदेशी निवेश भारत में आएगा। हालांकि, पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार की तुलना में मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में काफ़ी काम किया है जिसका नतीजा है कि 2015 में भारत की रैंकिंग 189 देशों में 142 थी, वहीं अब यह 190 देशों में 77 पर आ गई है।
अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए काफ़ी काम किये जिसमें जीएसटी को लागू करना भी शामिल था। लेकिन चुनौतियां आगे और भी हैं जिसका सामना मोदी सरकार को करना होगा। बढ़ती जनसंख्या और उस हिसाब से रोज़गार उपलब्ध कराना एक बहुत बड़ी चुनौती मोदी सरकार के सामने है। वहीं ईरान पर प्रतिबंध के बाद सुचारू रूप से कच्चे तेल की आपूर्ति, डॉलर के मुक़ाबले रूपये की मज़बूती और निर्यात में बढ़ावा जैसी चुनौतियां मोदी सरकार के सामने होंगी, अब देखना होगा कि इन चुनौतियों से मोदी सरकार कैसे निपटती है?
JUNE 04 (WTN) – अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से गति देने के लिए काफ़ी काम किया, जिसका नतीजा अब दिखने लगा है। यदि इसी नीति और नीयत के साथ मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाती रही तो आने वाले दिनों में भारत, ब्रिटेन को पछाड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
IHS मार्किट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में आर्थिक परिदृश्य काफ़ी सकारात्मक नज़र आ रहा है। कहा जा रहा है कि यदि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए ठोस फ़ैसले सही समय पर लेती रही तो 2019-23 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की औसत वृद्धि दर 7 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है। यानी कि यदि विकास का पहिया चलता रहा तो साल 2025 तक भारत, जापान को पीछे छोड़कर एशिया प्रशांत क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
इसे मोदी सरकार की एक उपलब्धि माना जा सकता है कि इस साल के आख़िरी तक भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था से आगे अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था है। अनुमान लगाया जा रहा है कि साल के आख़िरी तक भारत की जीडीपी 3,000 अरब डॉलर के आगे निकल जाएगी, और इस तरह भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय अमेरिका की अर्थव्यवस्था $19.39 ट्रिलियन जीडीपी के साथ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहीं चीन की जीडीपी $12.01 ट्रिलियन, जापान की $4.87 ट्रिलियन, जर्मनी की $3.68 ट्रिलियन और ब्रिटेन की $2.62 ट्रिलियन है। वहीं भारत की जीडीपी इस समय $2.61 ट्रिलियन के साथ छठे स्थान पर है।
मोदी सरकार के पहले पांच सालों में भारत की अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में सुधार हुआ है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले पांच सालों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ती जाएगी, और वैश्विक जीडीपी में भारत का योगदान भी बढ़ेगा। पर्चेसिंग पावर आधारित जीडीपी में इस समय $9.45 ट्रिलियन के साथ भारत का स्थान दुनिया में तीसरा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत की जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा अभी सिर्फ़ 18 प्रतिशत ही है। कहा जा रहा है कि यदि भारत को अपने जीडीपी में और भी गति देना है तो उसे जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र के हिस्से को 25 प्रतिशत तक लाना होगा, जो कि एक लक्ष्य था। बात करें सर्विस सेक्टर की तो भारत में सर्विस सेक्टर में पिछले कुछ सालों से काफ़ी वृद्धि देखी गई है, लेकिन भारतीय जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। इस समय भारत की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान सिर्फ़ 17 प्रतिशत के स्तर तक आ गया है। हालांकि, अन्य देशों की तुलना में फ़िर भी भारत की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान ज़्यादा है।
अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक़ यदि भारत को अपने अर्थव्यवस्था को और भी गति देना है तो उसे निर्यात बढ़ाना होगा और आयात पर कम से कम निर्भर रहना होगा, बचत दर को बढ़ाना होगा, जनसंख्या पर नियंत्रण रखना होगा। आने वाले समय में मोदी सरकार के सामने चुनौती है कि बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए विनिर्माण क्षेत्र और सेवा क्षेत्र में रोज़गार के अवसर किस तरह से मुहैया कराए जाएं। अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहतरीन परिवहन व्यवस्था और बिजली की सुचारू उपलब्धता का काफ़ी महत्व होता है। आने पांच सालों में मोदी सरकार को इन दोनों के तरफ़ भी ध्यान देना होगा।
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के लिए ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस का भी काफ़ी महत्व होता है। साल 2019 की ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भारत की रैंक 190 देशों में 77वीं थी, जो कि अन्य विकासशील देशों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा है। भारत की तुलना में टर्की की रैंकिंग 43, चीन की 46 और मैक्सिको की 54 है। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस में भारत की रैकिंग में सुधार भी मोदी सरकार के लिए एक चुनौती है, क्योंकि इसमें जितना ज़्यादा सुधार होगा उतना ही ज़्यादा विदेशी निवेश भारत में आएगा। हालांकि, पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार की तुलना में मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में काफ़ी काम किया है जिसका नतीजा है कि 2015 में भारत की रैंकिंग 189 देशों में 142 थी, वहीं अब यह 190 देशों में 77 पर आ गई है।
अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए काफ़ी काम किये जिसमें जीएसटी को लागू करना भी शामिल था। लेकिन चुनौतियां आगे और भी हैं जिसका सामना मोदी सरकार को करना होगा। बढ़ती जनसंख्या और उस हिसाब से रोज़गार उपलब्ध कराना एक बहुत बड़ी चुनौती मोदी सरकार के सामने है। वहीं ईरान पर प्रतिबंध के बाद सुचारू रूप से कच्चे तेल की आपूर्ति, डॉलर के मुक़ाबले रूपये की मज़बूती और निर्यात में बढ़ावा जैसी चुनौतियां मोदी सरकार के सामने होंगी, अब देखना होगा कि इन चुनौतियों से मोदी सरकार कैसे निपटती है?